आगरा. सिटी के पार्क कागजों में दुरुस्त हैं. इनमें बुनियादी सुविधाओं के साथ हरियाली भी छा रही है, लेकिन हकीकत में देखा जाए तो पार्को में सौन्दर्यीकरण तो दूर बुनियादी सुविधाएं तक नहीं हैं, लेकिन नगर निगम के अफसरों का दावा है कि पार्को की स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है. सभी पार्क में सुविधाएं दुरुस्त हैं. उनके सौन्दर्यीकरण का कार्य लगातार जारी है.

36 पार्को को एनजीओ को देने के बाद भी नहीं सुधरे हालात कूड़ेदान बने पार्क

नगर निगम ने 36 पार्को को एनजीओ को दे रखा है. इनको तीन वर्ष तक के लिए दिया गया है, लेकिन कमोबेश स्थिति जस की तस है. आपको बता दें कि सिटी में नगर निगम के 346 पार्क हैं. कागजों 170 दुरुस्त हैं. वहीं अधिकारियों का दावा है, कि 150 पार्को का सौन्दर्यीकरण हो चुका है. इसके अलावा ताजनगरी फेस-2, कालिंदी विहार, शास्त्रीपुर्म, आदि स्थानों पर आगरा विकास प्राधिकरण के 85 पार्क हैं. ये भी विकसित नहीं हैं.

चार करोड़ से 18 पार्को को किया जाना था विकसित

सिटी के 18 पार्को को अमृत योजना के तहत विकसित किया जाना था. इसके लिए चार करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया था, लेकिन अभी तक कार्य शुरु नहीें हो पाया है. अभी गत महीने नगर निगम द्वारा कई कार्यो के लिए 72.42 करोड़ रुपये का प्रस्ताव स्वीकृत किया था. इसमें सड़क, नाले, स्ट्रीट लाइट सॉलिड वेस्ट, हरियाली समेत सौन्दर्यीकरण का काम भी किया जाना था. अभी कार्य शुरु नहीं हुआ है. जिन पार्को को इस योजना के तहत चयनित किया गया था, उसमें बल्केश्वर पार्क, जयपुर हाउस पार्क, शहीद नगर पार्क, बिजलीघर पार्क समेत ऐसे पार्क जहां सार्वजनिक रुप से ज्यादा लोग जुटते हैं. ऐसे पार्को को विकसित किया जाना था.

कहीं बाउन्ड्रीबाल टूटी, तो कहीं बनाया कूड़ेदान

सिटी के पार्को की स्थिति बद से बदत्तर है. कहीं बाउन्ड्रीबाल टूटी है, तो कहीं बुनियादी सुविधाएं दूर-दूर तक नजर नहीं आती हैं. जयपुर हाउस स्थित एक एक जनप्रतिनिधि के मकान के सामने पार्क की हालत बदतर है. यहां न तो बैठने के लिए जगह है, न ही अन्य कोई व्यवस्था है. सुभाष पार्क में पानी की टंकी टूटी पड़ी है. पाथवे तो क्षतिग्रस्त है ही, इसके अलावा सिटिंग सीट, बच्चों के झूले टूटे पड़े हैं. संजय प्लेस के पार्क को कूड़ेदान बना रखा है.