JAMSHEDPUR: यह अध्ययन आम लोगों की आंख खोलने के लिए काफी है. जिस तेजी से लोग सिगरेट के कश खींचकर छल्ले उड़ाते हैं, गुटखा खाकर इधर-उधर थूकते हैं, वह वनस्पतियों का विकास भी नहीं होने देता. इससे इंसानी स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ता होगा, अंदाजा लगाया जा सकता है. कदमा स्थित एडीएलएस सनशाइन स्कूल के बॉयोटेक्नोलोजी विभाग के छात्रों के आकृति विज्ञान पर किए गए अध्ययन को मीडिया के सामने प्रस्तुत किया गया. प्राचार्या इंद्राणी सिंह के निर्देशन पर बॉयोटेक्नोलोजी विभाग के शिक्षक डॉ. संतोष कुमार की देखरेख में प्रयोग किया गया. 12वीं के छात्रों अबु बकर, के साई भास्कर और शगुफ्ता यास्मीन ने इस अध्ययन के आश्वर्यजनक परिणाम को सामने रखा.

दिखा तंबाकू सेवन का दुष्प्रभाव

छात्रों के दल ने चार खाद्य फसलों गेहूं, चना, चावल और जौ के बीज बोए. चार अलग-अलग बर्तनों में बोए गए बीज से पौधे निकले. एक बर्तन को छोड़कर बाकी तीन में क्रमश: एक पैकेट, दो पैकेट और तीन पैकेट गुटखा डाल दिया. जिन पौधों से छेड़छाड़ नहीं की गई उसका सामान्य विकास हो रहा था. बाकी में पौधे पीले पड़ने लगे, विकास अवरुद्ध हो गया, पत्ते सूखने लगे और पानी ग्रहण करने की क्षमता भी काफी कम हो गई. इस अध्ययन से पौधों में अजैव तनाव से लड़ने की क्षमता को पहचाना गया.

स्कूल प्रबंधन ने की सराहना

स्कूल के चेयरमैन एनपीआर मूर्ती, जेनरल सेक्रेटरी मज्जी रवि कुमार, एम नागेश्वर राव, पी सिम्हाद्री राव व प्रबंधक समिति के अन्य सदस्यों ने अध्ययन दल के सदस्यों की मेहनत, उनकी अंतर्दृष्टि की सराहना करते हुए प्रोजेक्ट की सफलता पर बधाई दी.

अध्ययन बच्चों के पोषण व अनुसंधान कौशल को बढ़ाने का नायाब तरीका है. बॉयोटेक्नोलोजी पूर्ण रूप से अनुसंधन उन्मुख विषय है. पौधों पर किए गए अध्ययन से बच्चों ने समाज पर होनेवाले बुरे प्रभाव को पहचाना व उनसे लड़ने की प्रेरणा ली.

- इंद्राणी सिंह, प्रिंसिपल, एडीएलएस