स्मारक का किया जा रहा है खाका तैयार

डीएम ने टीम के साथ पहुंकर बनाई योजना

आगरा. पूर्व प्रधानमंत्री अटल विहारी बाजपेयी की जन्मस्थली बटेश्वर का उनके जीते जी तो उद्धार नहीं हो सका, लेकिन उनके स्वर्गवास के बाद जरूर लग रहा है कि कुछ बेहतर होने जा रहा है. घोषणाएं तो हो जाती हैं, लेकिन उनका क्रियान्वयन होना महत्वपूर्ण है. जानकारी के मुताबिक 23 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यहां आ सकते हैं. इसे देखते हुए सोमवार को जिलाधिकारी एनजी रवि कुमार बटेश्वर पहुंचे. उनके जन्म स्थल से लेकर उनके आसपास का क्षेत्र कैसे विकसित किया जा सकता है का खाका तैयार किया जा रहा है. जिसपर मुख्यमंत्री से विचार विमर्श के बाद मोहर लगनी है.

तीन बार की सरकार में नहीं हुआ विकास

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार से पहले केंद्र में भाजपा की अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार रही है. इसी बीच में उत्तर प्रदेश में भी भाजपा की सरकार रही. लेकिन बटेश्वर का उम्मीद के मुताबिक विकास नहीं हो सका. आज उनके खंडहर हो चुकी हवेली को स्मारक बनाए जाने की तैयारी की जा रही है. इसके साथ ही बटेश्वर को स्मारक के रूप में विकसित किए जाने की पूरी तैयारी चल रही है. यूं कहा जाए कि उनके जिंदा रहते हुए न तो उनके जन्म स्थल की याद आई और न ही वहां पर विकास करने की कभी पहल की गई. लेकिन उनके स्वर्गवास के बाद जरूर प्रदेश सरकार विकास स्मारक बनाए जाने को लेकर काफी उत्सुक दिखाई दे रही है. वहीं क्षेत्रीय विधायक रानी पक्षालिका के पति और पूर्व पूर्व राजा अरिदमन सिंह ने कहा कि उनके स्मारक आदि के लिए वे जमीन देने के लिए तैयार हैं. उन्होंने कहा कि उनका स्मारक भव्य बनेगा.

प्रतिनिधियों को भी आने लगी है याद

जनप्रतिनिधियों में पूर्व प्रधानमंत्री अटल विहारी वाजपेयी के जन्म स्थल को तमाम तरह की बयान बाजी की जा रही है. एक जनप्रतिनिधि कह रहा हैं वे वहां के विकास के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बात करेंगे. विकास की गंगा बहाई जाएगी. तो एक जनप्रतिनिधि कह रहे हैं कि यह मामला उनके क्षेत्र से जुड़ा हुआ है. बटेश्वर को स्मारक बनाने में किसी प्रकार से धन की कमी नहीं आने दी जाएगी.

टीम के साथ बटेश्वर पहुंचे डीएम

डीएम एनजी रवि कुमार पूरी टीम के साथ मौके पर पहुंचे. टीम में राजस्व की टीम के साथ ही मुख्य रूप से आर्कीटेक्ट भी थे. पूरा खाका तैयार किया जा रहा है. जिसे मुख्यमंत्री के सामने रखा जाएगा.

खंडहर हवेली बनेगी आकर्षण का केंद्र

यूं तो बटेश्वर को स्मारक के रूप में विकसित किया जाएगा, लेकिन खंडहर हो चुकी उनकी हवेली स्मारक के रूप में मुख्य रूप से प्रदर्शित की जाएगी.