- जीरो फीस पर एडमिशन का लालच देकर स्टूडेंट्स को दिया जाएगा एडमिशन

- कॉलेज करेंगे शुल्क प्रतिपूर्ति का खेल

- फंसेगा हजारों स्टूडेंट्स का भविष्य

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LUCKNOW: उत्तर प्रदेश टेक्निकल यूनिवर्सिटी यूपीटीयू में स्टेट इंजीनियरिंग एग्जामिनेशन एसईई ख्0क्भ् को डाटा बेचने के साथ ही नया खेल भी शुरू होने की आशंका बढ़ गई है. यूपीटीयू से एफिलिएटेड कॉलेजेज में इन डाटा का यूज काउंसिलिंग से पहले स्टूडेंट्स को एडमिशन देने के लिए शुरू कर दिया है. कॉलेज स्टूडेंट्स को फोन कर उन्हें डायरेक्ट एडमिशन देने के साथ ही साथ उन्हें कई तरह के प्रलोभन भी दे रहे, जिसे स्टूडेंट्स उनके यहां एडमिशन ले. इसके लिए कॉलेज स्टूडेंट्स को पूरी फीस शुल्क प्रतिपूर्ति के माध्यम से भी वापस कराने तक का आश्वासन दे रहे है. ज्ञात हो कि दो दिन पहले यूपीटीयू के एसईई में आवेदन करने वाले करीब तीन लाख कैंडीडेट्स को डाटा एक-एक लाख रुपए में प्राइवेट कॉलेजों को बेचने का मामला सामने अाया था.

कॉलेज कराएंगे स्टूडेंट्स की फीस वापस

एसईई का डाटा खरीदने वाले कॉलेज स्टूडेंट्स को काउंसिलिंग के माध्यम से एडमिशन न लेकर सीधे मैनेजमेंट कोटे से एडमिशन लेने की बात कह रहे है. इसके लिए कॉलेजों की ओर से कैंडीडेट्स को एडमिशन के टाइम डिस्काउंट व जीरो फीस पर एडमिशन देने का लालच दे रहे है. कॉलेज ऐसा सिर्फ अपनी सीटों को भरने के लिए कर रहे है. राजधानी के बड़े इंजीनियरिंग कॉलेज के डायरेक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि राजधानी में ही कई कॉलेजों ने कैंडीेडेट्स को फोन कर जीरो फीस पर एडमिशन देने की बात कही है. उनकी ओर से कैंडीडेट्स को लालच दिया है कि उनको एडमिशन के लिए एक भी रुपए फीस के तौर पर नहीं देना होगा. कॉलेज प्रशासन एडमिशन के टाइम ही उनसे शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए फॉॅर्म भरवा लेगा.

गरीब स्टूडेंट्स पर ज्यादा फोकस है

वहीं दूसरी ओर यूपीटीयू के सूत्रों का कहना है कि कॉलेजों को जो डाटा बेचा गया है उसमें स्टूडेंट्स के फैमली बैक ग्राउंड के बारे में विशेष तौर पर जानकारी उपलब्ध कराई गई है. ताकि कॉलेज आसानी से ऐसे गरीब स्टूडेंट्स का फीस वापस करा सके. यूपीटीयू के अधिकारियों का कहना है कि यह खेल पिछले कई सालों से यूनिवर्सिटी से चला रहा है. कॉलेज हर साल यूपीटीयू का डाटा खरीदते है. शुल्क प्रतिपूर्ति का फायदा उठाकर ऐसे स्टूडेंट्स को अपने यहां एडमिशन देते है. इन कॉलेजों का पढ़ाई और स्टूडेंट्स के फ्यूचर से कुछ लेना देना नहीं होता है. यह तो इनकी आड़ में अपनी दुकान चलाते है. ताकि उनका नुकशान न हो.

हर साल होता है हंगामा

कॉलेजों के इस खेल के कारण हर साल स्टूडेंट्स को प्रॉब्लम का सामना करना पड़ता है. कॉलेज स्टूडेंट्स को जीरो फीस पर एडमिशन तो दे देता है. उनके शुल्क प्रतिपूर्ति के फॉर्म भरकर सम्बन्धित विभाग को भेजता है. पर विभागीय जांच में अगर फॉर्म गलत पाया जाता है, तो कॉलेज फीस वसूलने के लिए स्टूडेंट्स के भविष्य को खराब करने से भी गुरेज नहीं करते है. इसी साल समाज कल्याण विभाग की ओर से कई कॉलेजों के शुल्क प्रतिपूर्ति के फॉर्म की जांच में कमियां पाई थी. उसे कॉलेजों को वापस भ्ोजा था.

कैंडीडेंट्स को दिया जाता है कई तरह का लालच

डाटा खरीदने वाले कॉलेज स्टूडेंट्स को केवल जीरो फीस पर एडमिशन देने का लालच ही नहीं देते है. बल्कि वह इसके साथ कैंडीडेट्स को लैपटॉप व बेहतर प्लेसमेंट का भी लालच देते है. इतना अगर कोई कैंडीडेट किसी दूसरे कॉलेज में एडमिशन लेने की बात कहता है कॉलेज की ओर से उसे फीस में छूट देने की गारंटी भी देता है. यह पूरी प्रक्रिया कॉलेजों की ओर से केवल अपनी सीटें भरने के लिए ही किया जाता है.