- पीजीआई के डॉक्टर्स नच् बच्चे के दिल में छेद की जटिल सर्जरी की

- पीजीआई में पहली बार किसी विदेश्च्ी बच्चे की हुई सर्जरी

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LUCKNOW: संजय गांधी पीजीआई के सीवीटीएस विभाग के डॉक्टरों ने अफगानिस्तान से आए डेढ़ साल के शम्स रहमान के दिल की सर्जरी कर उसे नई जिंदगी दी है. यह पहला मौका है एसजीपीजीआई में किसी दूसरे देश के मरीज का जटिल ऑपरेशन किया गया. 18 माह के च्स बच्चे को दिल्ली और बंगलुरु में दिखाने के बाद डॉक्टर्स ने एसजीपीजीआई के डॉ. निर्मल गुप्ता को दिखाने की सलाह दी थी.

दिल में था छेद

अफगानिस्तान में काबुल से 165 दूर खोस्त के पास लखन बावर निवासी हाफिज उल्ला पिछले कई महीनों से अपच्े बच्चे की बीमारी से परेशान थे. डॉक्टर्स ने चेकअप के बाद उसके दिल में छेद (वेंट्रीकुलर सेप्टल डिफेक्ट) के साथ अन्य जटिलताएं पाई थीं. इस बीमारी का इलाज अफगारिस्तान में संभव नहीं था. ऐसे में उद्योगपति रहमतुल्ला गौहर ने उनकी मदद का बीड़ा उठाया. पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ने भी उन्हच् बच्चे की मदद को कहा. जिसके बाद डेढ़ साल का शम्स रहमान दिल्ली आ गया. यहां उसे फोर्टिस हॉस्पिटल में दिखाया गया. उसके बाद बंगलुरु ले जाया गया. लेकिन बीमारी की जटिलता को देखते हुए यहां से भी डॉक्टरों ने उसे एसजीपीजीआई के सीवीटीएस विभाग में डॉ. निर्मल गुप्ता को दिखाने की सलाह दी.

हाफिज उल्ला ने मदद मांगी

डॉ. निर्मल गुप्ता ने अपनी टीम के साथ मिलकर उसके सभी चेकअप किए और फिर 7 मार्च कच्े बच्चे का ऑपरेशन किया. ऑपरेशन के एक हफ्ते बाद अब शम्स पूरी तरह ठीक है. डॉ. निर्मल के अनुसार अगले दो से तीन दिनों में उसे छुट्टी दे दी जाएगी.

काफी रिस्की ऑपरेशन था

डॉ निर्मल गुप्ता ने बताया कि ऐसी बीमारच्ी बच्चों में होती है, लेकिन शम्स रहमान की समस्या काफी जटिल थी. उसके दिल में छेद के साथ ही छेद की जगह से एब्नार्मल ग्रोथ भी थी. उन्होंने बताया कि ऐसा मामला उन्होंने अपनी लाइफ में नहीं देखा. यह ऐसी सर्जरी थी कि अगर एक मिमी. की भी जगह रह जाती तच्े बच्चे की मौत हो सकती थच्. बच्चे के ऑपरेशन में 3 घंटे से अधिक समय लगा जिसमें लगभग 65 हजार रुपए का ही खर्च आया. इस ऑपरेशन में डॉ निर्मल गुप्ता के अलावा डॉ. वरुणा वर्मा, डॉ. सिद्धार्थ व एनेस्थेटिस्ट की टीम ने भी सहयोग किया.

टेलीमेडिसिन से होगा फालोअप

हाफिज उल्ला और उसकी पत्नी नसीमा पीजीआई के डॉक्टर्स तारीफ कर रहे हैं, लेकिन वह दोबारा दिखाने के लिए यहां नहीं आ सकते. जबच् िबच्चे को एक माह, 6 माह, 1 साल पर फालोअप जरूरी है. साथ ही आगे भी साल भर में उसका चेकअप कराना है. डॉ निर्मल गुप्ता ने कहा कि वह अपने देश जा सकते हैं. काबुल में भारत सरकार की ओर से बनाया गया इंदिरा गांधी चिल्ड्रिेन हॉस्पिटल में टेलीमेडिसिन के द्वारा वच् बच्चे का फालोअप कर सकेंगे.