छुट्टा पशु पकड़ने के लिए दौड़ी निगम की टीमें

5 फरवरी तक आवारा पशु और निराश्रित पशुओं को पकड़ने का हाईकोर्ट ने दिया आदेश

Meerut. निराश्रित पशु और गोवंश को आश्रय और सुरक्षा देने की मुख्यमंत्री योगी की मुहिम में भले ही निगम अपनी लापरवाही के चलते 10 जनवरी तक अभियान के अंतिम दिन निगम जागरुक नही हो सका, लेकिन अब हाई कोर्ट की फटकार के बाद निगम दिन रात आवारा पशु पकड़ने में जुट गया है. एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने मेरठ नगर निगम को फटकार लगाते हुए 5 फरवरी तक आवारा पशु और निराश्रित पशुओं को पकड़ने का आदेश दिया है.

5 फरवरी तक का समय

हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार निगम को अभियान चलाकर अगले माह 5 फरवरी तक आवारा कुत्ते, पशु और निराश्रित गोवंश को शहर की सड़कों से दूर करना होगा. इस अभियान के तहत गोवंश को आश्रय देने के लिए निगम द्वारा सूरजकुंड डिपो और अछरेड़ा में अस्थाई गौशाला बनाई गई है. बाकि आवारा कुत्तों के लिए 20 जनवरी से निगम अलग अभियान चलाएगा. इस अभियान के बाद 8 मार्च को कोर्ट द्वारा मिली अगली तारीख में निगम को अपने शहर की स्थिति बतानी होगी.

खामियों का अंबार

मुख्यमंत्री के आदेश और हाई कोर्ट की फटकार के बाद निगम ने भले ही आनन फानन में अस्थाई कैंप बनाकर गोवंश की धरपकड़ करनी शुरु कर दी हो, लेकिन अभी तक पशुओं के चारे और पानी तक की निगम पूरी व्यवस्था नही कर पाया है.

तीसरे दिन ठंडा पड़ा अभियान

शहर की सड़कों पर आवारा पशुओं की भरमार है लेकिन निगम की टीम को पशु सड़कों पर नही दिखाई दे रहे हैं. इसी का नतीजा है कि निगम द्वारा अभी गोवंश की धरपकड़ का अभियान शुरु हुए तीन दिन का समय नही बीता की अभियान ठंडा पड़ गया. शुक्रवार को जहा 78 पशु पकड़े गए थे वही शनिवार को 15 गाय, 8 बछड़े और 8 सांड पकड़े गए.

अछरेड़ा में बना आश्रय केंद्र

गोवंश को आश्रय के लिए सूरजकुंड डिपो में गाय और बछडे़ के लिए अस्थाई आश्रय केंद्र बनाया गया है. वहीं परतापुर के अच्छरैडा की एक फैक्ट्री में सांड के लिए अस्थाई आश्रय केंद्र तैयार किया गया है. जिसमें शनिवार को सांडों का लाया गया.

लगातार निराश्रित पशु पकड़ने का काम किया जा रहा है. इसके साथ ही आवारा पशुओं की धरपकड़ के लिए टीम बनाई जाएगी. फिलहाल प्राथमिकता के आधार पर गोवंश पशुओं को आश्रय में लाया जा रहा है.

अमित कुमार, अपर नगरायुक्त