कर्फ्यू हटा
गुजरात में रविवार को पाटीदार आरक्षण आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा के बाद मेहसाणा शहर में लगाये गए कर्फ्यू को आज हटा लिया गया है। इससे पहले कल पाटीदार समुदाय के प्रदर्शन में हिंसा के बाद यहां कर्फ्यू लगाया गया था। मेहसाणा समेत उत्तरी गुजरात के कई शहरों में इंटरनेट सेवा पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। पुलिस ने एहतियात के तौर पर मेहसाणा से एक हजार आंदोलनकारियों को मेहसाणा और पांच सौ आंदोलनकारियों को सूरत से हिरासत में ले लिया है। पाटीदारों ने सोमवार को गुजरात बंद का एलान किया है।

निशाने पर मंत्री और सांसद
मेहसाणा में भाजपा सांसद जयश्री पटेल के दफ्तर में भी़ड़ ने तो़ड़फोड़ की और कैबिनेट मंत्री नितिन पटेल के कार्यालय पर पथराव किया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मेहसाणा में कर्फ्यू लगा दिया गया। कलेक्टर लोचन सेहरा ने बताया भारतीय खाद्य निगम के एक गोदाम व जिला कार्यालय के एक दफ्तर में आग लगा दी गई। कुछ बसें व अन्य वाहन भी फूंक दिए गए। पांच पुलिसकर्मी, दो अफसर व 25 कार्यकर्ता घायल हुए हैं।

अहमदाबाद में भी तनाव
मेहसाणा की घटना के बाद अहमदाबाद व सूरत में भी सैकड़ों पाटीदार युवक सड़कों पर उतर आए। अहमदाबाद में मेट्रो ट्रेन के बोर्ड आदि तो़ड़ दिए। सूरत पुलिस आयुक्त आशीष भाटिया ने बताया कि पथराव व अन्य आरोपों में 500 पाटीदार युवकों की धरपकड़ की गई है। सूरत में भी बंद को देखते हुए धारा 144 लगा दी गई है। इस बीच एसपीजी व हार्दिक पटेल के नेतृत्व वाले पाटीदार अनामत आंदोलन (पास) ने सोमवार को गुजरात बंद का आह्वान किया है। इसे देखत हुए पूरे राज्य में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।

ग्रहमंत्री ने मुख्‍यमंत्री से मांगा ब्‍योरा
इसी बीच गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने मुख्यमंत्री आनंदी बेन पटेल से फोन पर बात कर हालात की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी दी।
इससे पूर्व हार्दिक पटेल के नेतृत्व में 25 अगस्त 2015 को अहमदाबाद की रैली से पटेल आंदोलन हिंसक हुआ था। राज्य के 12 शहरों में हिंसा के बाद कर्फ्यू लगाना पड़ा था। हिंसा में 10 लोग मारे गए थे और कई घायल हो गए थे। इसके बाद हार्दिक को 18 अक्टूबर 2015 को राजकोट में गिरफ्तार कर लिया गया। उन पर राष्ट्रद्रोह की धारा लगाई गई है। पिछले छह माह से वह जेल में हैं।

पाटीदारों की मांग
गुजरात की आबादी में 12 फीसदी पटेल समुदाय के लोग हैं। जबकि अन्य 78 फीसदी में ओबीसी, अजा-जजा हैं। पटेल समुदाय अपने लिए ओबीसी कोटे में आरक्षण की मांग कर रहा है। इससे पहले 1981 में कांग्रेस की माधवसिंह सोलंकी सरकार ने आरक्षण के लिए नई कैटेगरी एसईबीसी (सामाजिक व आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग) बनाई। इसके खिलाफ पटेलों ने पहला आंदोलन छेड़ा था। इसमें 100 से ज्यादा लोग मारे गए थे।

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