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PATNA : होली पर आप दिल्ली, मुंबई और कोलाकाता से घर आना चाहते हैं तो आपको बता दें कि रेलवे एजेंट आपके हिस्से का टिकट चुरा चुके हैं. आपको ट्रेन में लंबी वेटिंग मिलेगी. इस कारण आपकी होली बेरंग हो सकती है. यह खुलासा हाल ही आरपीएफ द्वारा दो ट्रेवल्स एजेंट के खिलाफ कार्रवाई के बाद हुआ. दोनों ट्रेवल्स एजेंट ने करीब ढाई करोड़ रुपए के टिकट बुक किए थे. इन टिकटों को बुक करने के लिए पर्सनल आईडी के उपयोग किया गया था. स्थिति ये है कि पटना-दिल्ली और पटना-मुंबई रूट पर थर्ड एसी में 15 से 25 वेटिंग चल रही है. वहीं, स्लीपर में 150 से 200 वेटिंग चल रही है. रेल टिकट की बुकिंग में चल रहे खेल को लेकर डीजे आई नेक्स्ट की पड़ताल में जो खुलासा हुआ है उसे जानकर आप भी चौंक जाएंगे.

शॉर्ट नेम से करते हैं बुकिंग

रेलवे एजेंट चार महीने पहले से ही पर्सनल आईडी से शॉर्ट नेम (ए कुमार, ए झा, डी शर्मा..) से टिकट बुक करते हैं. शॉर्ट नेम होने के कारण टीटी भी पकड़ नहीं पाते हैं.

25 से 40 वर्ष तक लिखते हैं उम्र

एजेंट टिकट बुक करते समय 25 से 40 वर्ष औसत उम्र लिखते हैं. इसके बाद उम्र के हिसाब से यात्री को टिकट दे देते हैं. टीटी भी ट्रेन में उम्र पर ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं और चेक करने के बाद आगे निकल जाते हैं.

बना देते हैं फर्जी आईडी

एजेंट पहले तो कोशिश ये करते हैं कि शॉर्ट नेम और उम्र का मिलान हो जाए लेकिन जब मिलान नहीं होता है तब यात्री को फर्जी आईडी बनाकर दे देते हैं. यात्री ट्रेन में टीटी को वो आईडी दिखाकर बच जाते हैं. टीटी के पास उस आईडी को चेक करने का कोई विकल्प नहीं होता है.

15 मिनट का उठाते हैं फायदा

पर्सनल आईडी से तत्काल टिकट बुक करने के लिए 15 मिनट का समय मिलता है. वहीं, कमर्शियल आईडी को 15 मिनट बाद मौका मिलता है. ऐसे में एजेंट पर्सनल आईडी का उपयोग कर आम लोगों का हक मार लेते हैं.

कई एप का करते हैं उपयोग

कई बार ऐसे गिरोह भी पकड़े गए हैं जो एप का उपयोग करते हैं. रेड मिर्ची, नियो, बप्पा, क्रोशिया, कोबरा, लायना, रेमंड सहित अन्य एप का उपयोग करते हैं और तत्काल टिकट की बुकिंग के समय सर्वर स्लो कर टिकट बुक कर लेते हैं.

ऐसे समझें कमाई का खेल

ट्रेवल्स एजेंट लाइसेंस लेने के बाद अगर टिकट बुक करते हैं तो उन्हें स्लीपर के टिकट पर 30 और एसी के टिकट पर 40 रुपए कमीशन मिलता है. अगर लाइसेंस लेने के बाद एक दिन में स्लीपर के 25 और एसी के 5 टिकट को बुक करता है तो उसे 25 स्लीपर टिकट के 750 और एसी के 5 टिकट पर 150 रुपए कमीशन मिलेंगे. यानी एक दिन में कमाई 900 रुपए हो रही है. अगर ब्लैक में स्लीपर टिकट बेचेगा तो उसे एक टिकट पर 300 से 400 और एसी के टिकट पर 500 से 700 रुपए तक मुनाफा होता है.

रेलवे को लग रहा लाखों रुपए का झटका

आरपीएफ टीम ने जिन दो ट्रेवल्स एजेंसी पर छापेमारी की है उस एजेंसी के पास लाइसेंस नहीं मिला. लाइसेंस लेने के लिए रजिस्ट्रेशन फीस दो लाख, सिक्योरिटी मनी एक लाख, डाटा एक्सेस प्रभार के रूप में 1 लाख 60 हजार रुपए हर तीन वर्ष पर देना होता है. तीन साल बाद फिर से लाइसेंस का नवीनीकरण किया जाता है. ऐसे में एजेंट बिना लाइसेंस लिए पर्सनल आईडी से टिकट बुक करना शुरू कर देते हैं. इससे रेलवे को लाखों रुपए का चूना लगता है.


क्या होता है पर्सनल आईडी

ऑनलाइन टिकट की बुकिंग के लिए यात्रियों को आईआरसीटीसी पर आईडी बनानी पड़ती है. इसमें उसका नाम, पता, एड्रेस, मोबाइल नंबर सहित अन्य जानकारियां होती हैं. एक माह में 6 टिकट बुक किया जा सकता है. वहीं, अगर आईडी आधार से लिंक है तो ये 12 टिकट निकाल सकते हैं.

कमर्शियल आईडी

आम लोगों की सुविधा के लिए रेलवे ट्रेवल्स एजेंट को लाइसेंस देता है. इनको टिकट बेचने का अधिकार रहता है. इसके बदले रेलवे को लाइसेंस फीस देनी होती है. हर टिकट की बुकिंग पर कमीशन तय रहता है.

ऐसे बनाते हैं फर्जी आईडी

आमतौर पर जब भी कोई आईआरसीटीसी पर आईडी बनाता है तो उसे मोबाइल नंबर और जीमेल आईडी देना होता है. एक जीमेल और मोबाइल नंबर पर दो आईडी नहीं बना सकते हैं. इससे बचने के लिए ये लोग फ्री में मिल रहे सीम का उपयोग करते थे और फर्जी जीमेल आईडी बनाकर आईआरसीटीसी पर फर्जी आईडी बना लेते हैं.