-मेरठ में रोजाना 15 लाख रुपए की अमानक दवाओं की खपत

-आगरा से होती है सप्लाई, ज्यादा कमाई के चक्कर में फैल रहा धंधा

- आरटीआई एक्टीविस्ट ने की शिकायत, विभाग ले रहा संज्ञान

आई एक्सक्लूसिव

Meerut: अमानक दवाओं के कारोबार ने मेरठ को अपनी चपेट में ले लिया है. मेरठ में थोक व रिटेलर मिलाकर रोजाना 50 लाख रुपए की दवाई का कारोबार होता है. जिसमें से करीब 15 लाख रुपए रुपए की अमानक दवाओं की खपत रोजाना शहर में हो रही है. सभी अमानक दवाएं आगरा से लाई जा रही हैं. मोटी कमाई के फेर में चल रही नकली दवाओं की बिक्री के खेल में मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ हो रहा है. इसका खुलासा हेल्थ विभाग में पहुंचे एक खत से हुआ है. सूत्रों का दावा है कि यदि मामले की ठीक से जांच हो जाए तो हेल्थ व एफडीए विभाग में कई अफसरों की गर्दन फंस सकती है.

यमुना एक्सप्रेस वे से आती है खेप

पत्र भेजने वाले ने लिखा है कि यमुना एक्सप्रेस वे से करोड़ों रुपए की दवाई मेरठ, गाजियाबाद व नोएडा पहुंचाई जा रही है. ये दवाएं प्राइवेट टैक्सी, कार और बसों के माध्यम से गंतव्य तक पहुंचाई जाती है. इसके बाद अलग-अलग स्थान पर डिस्टीब्यूटरों के माध्यम से सप्लाई की जाती है. ऐसी दवाएं रोग ठीक नहीं करती बल्की नक्कालों की जेब भरती है. पत्र को देखने के बाद सीएमओ ने गुपचुप तरीके से मामले की जांच के आदेश दिए हैं.

अमानक कैसे?

-दवा की कोडिंग सही नहीं हो, ब्रांडिंग सही नहीं हो

-कुछ ऐसी दवाएं जिनका उपयोग आम हैं. उनकी कीमतों में फर्क है

-सिफैक्सिम, ओपलोक्सासिन, सिप्रो, टर्बोसिड जैसी एंटीबायोटिक दवाएं जैनरिक में बहुत सस्ती हैं. लेकिन इन दवाओं को महंगी कंपनियों की लिखते हैं

-टर्गोसिड दवा जिस कंपनी ने बनाई है. उसने इसकी एमआरपी 1910 रुपए रखी है. जबकि डॉक्टरों को एमआर इस दवा को केवल 500 रुपए में उपलब्ध करा देते हैं. डॉक्टर मरीज को 1900 में ही उपलब्ध कराता है.

आगरा से आने वाली आम दवाईयां

खांसी, वायरल, प्रोटीन की कमी होने पर दी जाने वाली दवाएं, महंगे एंटीबायोटिक के साथ-साथ एनआरएक्स कोटे में आने वाली दवाएं जैसे दिमागी बीमारी, नींद, खांसी और कफ संबंधी.

74 सैंपल, रिपोर्ट मिली 20 की

मेरठ में पिछले दिनों एफडीए टीम ने खैर नगर स्थित दवा मंडी में कई दिन छापेमार अभियान चलाया था. जिसमें तीन दिनों 74 सैंपल लिए गए थे. लेकिन अभी तक महज 20 की ही रिपोर्ट आई है. दवाई के असली-नकली का फर्क करने के लिए प्रदेश में केवल एक ही लैब है. जो लखनऊ में है. सैंपल लेकर लखनऊ से रिपोर्ट आने में कम से तीन माह लग जाते हैं.

आगरा में बिना बिल के सस्ती मिलती है दवा

आगरा से दवाई लाने पर दवा विक्रेताओं को रिकॉर्ड नहीं रखना होता है. वहां दवाएं सस्ती मिलती है. जबकि उनके रेट बहुत ज्यादा होते हैं. इससे मेडिकल स्टोर संचालक को फायदा मिलने के साथ सरकार को टैक्स भी नहीं देना पड़ता.

आगरा से अमानक दवाओं के कारोबार की जानकारी मिली है. पिछली बार सूचना के आधार पर ही तीन दिन तक अभियान चलाकर कार्रवाई की थी. चिह्नित की मेडिकल स्टोरों पर छापेमार कार्रवाई की जाएगी. कर कार्रवाई की जाएगी.

संदीप कुमार, ड्रग निरीक्षक

मेरठ में आगरा की नकली दवाओं की खपत के बारे में पूर्व में भी सूचनाएं मिली हैं. जल्द ही टीम गठित कर छापेमार कार्रवाई की जाएगी.

-रमेश चंद्र, सीएमओ