-डब्ल्यूएचओ के मानकों से 12 गुना ज्यादा आगरा का प्रदूषण

-सांस लेना दूभर, हर दिन बढ़ रहा प्रदूषण

आगरा. शहर में पटाखों के दहन, अंधाधुंध गाडि़यों की आवाजाही से ताजनगरी की हवा में जहर घुल चुका है. शाम होते ही धुंध से ढकी एक परत हमारे इर्द-गिर्द घूमने लगती है. धूल ऐसी जिसमें महीन पार्टीकल शामिल होते है. यह धुंध या स्मॉग हमारे शरीर में प्रवेश कर कई तरह की बीमारियों को न्योता देने का काम कर रही है. दिवाली से पहले बढ़ चुका वायु प्रदूषण दिवाली के बाद अपने निर्धारित मानकों से कई गुना आगे निकल चुका है. दयालबाग शिक्षण संस्थान वायु की गुणवत्ता पर लगातार नजर रख उसकी मॉनीटरिंग करने में लगा हुआ है. दिवाली की रात भी वायु प्रदूषण की गणना की गई. जिसमें वायु में उपस्थित पीएम 2.5, पीएम 10 और कार्बन डाई आक्साइड के मानक अपने स्टैंडर्ड वेल्यू से कई गुना आगे रिकार्ड किए गए है. जो कि मानव, पशु, इमारतों एवं एग्रीकल्चर आदि के लिए बहुत हानिकारक है.

12 गुना बढ़ा हुआ है प्रदूषण

ताजनगरी का वायु प्रदूषण विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा तय किए गए मानकों को तोड़कर 12 गुना आगे निकल चुका है. विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ के अनुसार वायु में उपस्थित पीएम 2.5 का मानक 10 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तय किया गया है. जबकि ताजनगरी में गुरुवार को पीएम 2.5 को 120.30 स्तर पर रिकॉर्ड किया गया है. जो कि तय मानक से 12 गुना ज्यादा है.

गुणवत्ता के मानकों से आगे दर्ज किए गए आकंड़े

वायु की सुरक्षित गुणवत्ता के मानक को ताजनगरी की आबोहवा तोड़ रही है. राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तय किए गए मानकों को तोड़कर ताजनगरी की हवा खतरे के जोन से गुजर रही है. डब्ल्यूएचओ के मानक 10 माइक्रोग्राम पर मीटर क्यूबिक, यूरोपियन यूनियन एयर क्वालिटी स्टैंडर्ड के मानक 15 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर एवं नेशनल एम्बियंट एयर क्वालिटी स्टैंडर्ड के मानक 40 माइक्रोग्राम पर मीटर क्यूबिक को तोड़कर शहर की हवा 120 माइक्रोग्राम पर मीटर क्यूबिक दर्ज की गई है. जो सभी से कई गुना ज्यादा दर्ज की गई है.

डीईआई रख रहा शहर की हवा पर नजर

दयालबाग शिक्षण संस्थान में वायु की गुणवत्ता को मापने के लिए संयत्र लगे हैं. पीएम 2.5, पीएम 10 एवं कार्बन डाई आक्साइड की मात्रा को हर दिन दर्ज किया जाता है. दिवाली को देखते हुए डीईआई की एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग लैब पिछले रविवार से वायु की गुणवत्ता पर नजर बनाए रखे हुए है. रोज सैंपल लिए जा रहे है. दयालबाग से लेकर सदर तक कई सैंपल दोपहर के समय लिए गए जिसमें कई चौंकाने वाले नतीजे सामने आए. सैंपल डीईआई के केमिस्ट्री विभाग के प्रोफेसर डॉ. रंजीत कुमार के निर्देशन में स्कॉलर प्रतिमा गुप्ता और हुजूर सरन द्वारा रिकॉर्ड किए जा रहे है.

वायु में बढ़ी पोटेशियम सोडियम की मात्रा

दिवाली के दिन अधिक मात्रा में लोगों द्वारा पटाखे जलाए गए. वाहनों की बढ़ोत्तरी के साथ ही पटाखों ने वायु प्रदूषण को बढ़ाने में अपनी अहम भूमिका निभाई है. डॉ. रंजीत कुमार ने बताया कि पटाखों से निकली गैस में अधिक मात्रा में पोटेशियम, सोडियम, कैडियम, जिंक एवं लेड होता है. जो कि हवा में घुल कर उसे जहरीला बना देते है और लोगों का सांस तक लेना दूभर हो जाता है. गले और सांस संबंधी कई बीमारी मनुष्य को घेर लेती है.

एयर क्वालिटी लैब में दर्ज किए गए आंकड़े

दिन पीएम2.5 पीएम10 सीओ2

मंगलवार 83.25-192.83-946.48

बुधवार 99.78-231.77-873.43

गुरुवार 120.30-275.23-842.06

पीएम 2.5 और पीएम 10 की गणना माइक्रोग्राम पर मीटर क्यूब एवं कार्बन डाइ ऑक्साइड की गणना पा‌र्ट्स पर मिलियन में

इन बातों का रखे ध्यान

-भीड़-भीड़ वाले इलाकों में जाने से बचें.

-सांस की परेशानी, आंखों में पानी आना, गले में खराश आदि होने पर डॉक्टर से संपर्क करें.

-सांस के मरीज कुछ दिन बाहर निकलने से बचें.

-सिरदर्द, चक्कर आने पर घर पर रहकर रेस्ट करें या डॉक्टर को दिखाएं.

-संभव हो तो एक कुछ दिन मार्निग वॉक पर न जाएं.

-रात के समय मार्केट या भीड़भाड़ वाली जगह न जाएं.

-मास्क लगाकर या मुंह बांधकर घर से निकलें.

बढ़ता प्रदूषण और मंहगाई दोनों ही चीजें लोगों को दोहरी मार रही है. स्वस्थ रहने के लिए हमें अपने वातावरण को भी स्वस्थ्य रखना होगा. दिवाली में इस बार महंगे दामों पर पटाखे बिके, पर लोगों ने भी खरीदने में कोई कसर नही छोड़ी. लोगों ने अपनी पॉकेट और स्वास्थ्य दोनों को ही खतरे में ला खड़ा कर दिया है.

डॉ. रंजीत कुमार, प्रोफेसर रसायन विभाग डीईआई

पटाखों के कारण शहर में पॉल्यूशन बढ़ा हुआ है. ऐसे में सबसे ज्यादा बुजुर्ग, बच्चों और सांस के मरीजों को दिक्कत हो रही है. गला खराब और आंखों में पानी आने की समस्या लोगों में बढ़ी है. लोग पटाखे जलाने से बचें और अपना ध्यान रखें.

रितेश बंसल, फिजीशियन सिनर्जी हॉस्टिपल