- यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेने जा रहे थे
- यूनिवर्सिटी प्रशासन के अनुरोध पर एयरपोर्ट पर ही रोके गये अखिलेश
- प्रदेश मे कई जगह हिंसक प्रदर्शन, कल राजभवन जाएंगे अखिलेश

10.30 पर अखिलेश को प्राइवेट प्लेन से भरनी थी उड़ान
9.54 पर एडीएम और सीओ ने जाने से रोक दिया
1.10 पर अखिलेश वापस पार्टी मुख्यालय वापस, पीसी


lucknow@inext.co.in
LUCKNOW: सपाइयों ने प्रदेश के कई हिस्सों में जमकर बवाल किया, धरने पर बैठ गए। दरअसल में सुबह करीब 10.30 पर अखिलेश अपने प्राइवेट प्लेन से यूनिवर्सिटी छात्रसंघ के शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत करने के लिए प्रयागराज जाने वाले थे,अखिलेश एयरपोर्ट पहुंचे तभी एडीएम वैभव मिश्रा और सीओ कृष्णानगर लाल प्रताप सिंह उनको प्लेन पर चढऩे से रोकने लगे। इस बीच अखिलेश के मुख्य सुरक्षा अधिकारी ने एडीएम को धक्का देकर पीछे कर दिया। बावजूद इसके दोनों अधिकारी अखिलेश से प्लेन पर न सवार होने का अनुरोध करते रहे। विधानसभा और संसद में भी इस मसले की गूंज सुनाई पड़ी। इसी दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ न कहा कि यूूनिवर्सिटी में अराजकता न हो, इसलिए जाने से रोका गया। वहीं अखिलेश ने पलटवार करते हुए कि योगी सरकार ठोंको और रोको नीति अपना रही है।
अखिलेश को उड़ने से रोकने में अफसरों के छूटे पसीने,यहां देखें एयरपोर्ट से लेकर सड़क तक पूरा मंजर
अखिलेश एयरपोर्ट पर, सपाई सड़कों पर जमे

अखिलेश यादव को प्रशासन द्वारा चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट पर रोके जाने के बाद पूरे प्रदेश में सपाईयों का गुस्सा फूट पड़ा और प्रयागराज समेत तमाम जगहों पर उन्होंने प्रदर्शन किया। प्रयागराज में उपद्रव कर रहे सपाईयों पर पुलिस को लाठियां भांजनी पड़ी जिसमें बदायूं के पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव भी चोटिल हो गये। वहीं अखिलेश ने करीब तीन घंटे तक एयरपोर्ट पर ही रुककर अपना विरोध दर्ज कराया तो विधानसभा और विधान परिषद  में सपा विधायकों ने धरना देकर योगी सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। वहीं राज्य सरकार ने साफ किया कि यूनिवर्सिटी प्रशासन के अनुरोध पर अखिलेश को प्रयागराज जाने से रोका गया था क्योंकि उनके जाने से कानून-व्यवस्था बिगडऩे की आशंका थी। इस बारे में उनको सुबह ही सूचना दे दी गयी थी।
अखिलेश को उड़ने से रोकने में अफसरों के छूटे पसीने,यहां देखें एयरपोर्ट से लेकर सड़क तक पूरा मंजर
सपाइयों ने घेरा राजभवन
अखिलेश को एयरपोर्ट पर रोके जाने की सूचना मिलते ही सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एयरपोर्ट जाकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रशासन की काफी देर तक मान-मनौव्वल के बीच इस बाबत अखिलेश के ट्वीट ने सपाईयों को आक्रोशित कर दिया और वे एयरपोर्ट पहुंचने लगे।  तमाम विधायक भी वहां पहुंचने लगे जिसके बाद अखिलेश ने उनको वापस सदन में जानेे को कहा। दोपहर 1।10 पर अखिलेश वापस पार्टी मुख्यालय आ गये जहां उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस कर योगी सरकार पर जमकर हमला बोला। वहीं सपाइयों ने राजभवन पर भी प्रदर्शन किया। अखिलेश बुधवार को राजभवन जाकर इस मामले की शिकायत भी करेंगे। वहीं देर शाम सीएम ने एडीएम को लोकभवन तलब कर लिया।
अखिलेश को उड़ने से रोकने में अफसरों के छूटे पसीने,यहां देखें एयरपोर्ट से लेकर सड़क तक पूरा मंजर
मेरे घर की रेकी कराई गई

पार्टी दफ्तर पर प्रेस कांफ्रेंस में अखिलेश ने कहा कि योगी सरकार ठोंको और रोको नीति अपना रही है। मैंने विगत 27 दिसंबर और दो फरवरी को अपना कार्यक्रम भेजा था। दरअसल भाजपा प्रयागराज यूनिवर्सिटी के चुनाव को जीता मान रही थी। वहां मिली हार के बाद गोरखपुर यूनिवर्सिटी में चुनाव रद कर दिया। हार पचा नहीं पाए तो छात्रसंघ अध्यक्ष के हॉस्टल में आग लगवा दी। कार्यक्रम के मंच पर बम चलवा दिये। उन्होंने आरोप लगाया कि एलआईयू आधी रात को उनके घर की रेकी कर रही है। सुबह भी तीन अधिकारी घर आ गये। एयरपोर्ट गया तो गैरकानूनी तरीके से पुलिस और अधिकारी वहां आए। उन्होंने कहा कि मेरे ऊपर कोई भी मुकदमा नहीं है। उन्होंने सीएम योगी और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य पर दर्ज मुकदमों की तख्तियां भी दिखाई। कहा कि ये पहले सीएम हैं जो अपने ऊपर दर्ज मुकदमे वापस ले रहे है। हिंसा करने वाला सीएम बन गया। तंज कसा कि भाजपा ने ट्विटर पर इंटरनेशनल टेररिस्ट तैयार किए है।
अखिलेश को उड़ने से रोकने में अफसरों के छूटे पसीने,यहां देखें एयरपोर्ट से लेकर सड़क तक पूरा मंजर
यूनिवर्सिटी में अराजकता न हो, इसलिए अखिलेश यादव को वहां जाने से रोका गया। सपा अराजकता फैलाने के लिए जानी जाती है। अखिलेश यूनिवर्सिटी जाते तो वहां बवाल होता। छात्र गुटों में हिंसा होने की आशंका की वजह से यूनिवर्सिटी प्रशासन के अनुरोध पर यह कदम उठाया गया। सपा को अपनी अराजक गतिविधियों से बाज आना चाहिए। दस दिन पहले खुद अखिलेश यादव कुंभ गये थे और संगम में स्नान करके आए थे।
योगी आदित्यनाथ,मुख्यमंत्री

यह अति निंदनीय राजनीतिक द्वेष से प्रेरित सरकारी कदम है। यह बीजेपी सरकार की तानाशाही व लोकतंत्र की हत्या का प्रतीक भी है। बीजेपी की केंद्र व राज्य सरकार गठबंधन से भयभीत है। वह राजनीतिक गतिविधि व पार्टी प्रोग्राम पर भी रोक लगाने पर तुली है। बीजेपी सरकार धर्म के साथ-साथ कुंभ का भी राजनीतिक तौर पर अपहरण करके इसको भी चुनावी स्वार्थ के लिये भुनाने का प्रयास करने में लगी है।
मायावती, बसपा अध्यक्ष
 
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कैंपस में राजनैतिक लोगों के प्रवेश पर रोक लगाई थी। इसमें प्रशासन का सहयोग भी मांगा था। इस बाबत प्रयागराज के डीएम और एसएसपी ने पत्र लिखा था। हाईकोर्ट ने भी ऐसे मामलों में सहयोग करने का निर्देश दिया था। सुबह ही दल विशेष के निजी सचिव को इस बाबत सूचित कर दिया गया था। जिन लोगों ने हिंसा की है, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्रवीण कुमार, आईजी कानून-व्यवस्था

धरने से उठाने पर बिगड़ा माहौल, पुलिस से बराबरी से लड़े उपद्रवी

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