स्वंय सिद्धि मुहुर्त संज्ञक अक्षय तीज में करें खाता पूजन एवं खरीदारी, कर्ज लेने से रहें दूर

-रोहिणी व्रत एवं मातंगी जयन्ती भी, दिन का चौघडि़या मुहुर्त- श्रेष्ठ चौघडि़या मुहुर्त

चर, लाभ, अमृत का चौघडि़या:- प्रात: काल 08:52 से अपरान्ह: 01:52 बजे तक

शुभ का चौघडि़या:- अपरान्ह 03:12 से सांय 04:51 बजे तक

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BAREILLY : वैशाख शुक्ल की तृतीया तिथि 'अक्षय तृतीया' के नाम से जाना जाती है। मान्यता है कि इस दिन किया गया कोई भी धार्मिक कार्य अक्षय होता है, उनका फल कभी समाप्त नहीं होता। भविष्य पुराण के अनुसार इस तिथि से युगादि तिथियों का प्रारम्भ हुआ था, इसलिए इसका धार्मिक महत्व है।

शाम 4.26 तक रोहिणी नक्षत्र
व्रत सोमवार तथा रोहिणी नक्षत्र में आये तो महान फलदायक माना जाता है। इसका फल मृगशिरा में भी अच्छा होता है। इस दिन तिल सहित कुशों के जल से पितृों का जलदान करने से पित्तीश्वरों की अनन्त काल तक तृप्ती होती है। प्रात: काल मूंग और चावल की खिचड़ी बिना नमक डाले बनाई जाती है। इस वर्ष अक्षय तृतीया आज है। तृतीया तिथि मध्यरात्रोपरान्त 02:16 बजे तक रहेगी। मंगलवार को रोहिणी नक्षत्र सांय 04:26 बजे तक रहेगा। बाद में मृगशिरा आ जायेगा। स्वंय सिद्धि मुहुर्त संज्ञक अक्षय तीज अत्यन्त शुभ फलदायक मानी जायेगी। इस तिथि में होने वाला कोई भी कार्य क्षय नही होता, बल्कि प्रत्येक कार्य में सिद्धि मिलती है। यह स्वंय सिद्धि मुहुर्त यदि अपनी राशि के अनुसार शुभ लग्न, चौघडि़या मुहुर्त भी सही मिल जाये तो कई गुना अधिक शुभ फल में वृद्धि होती है। इस मुहुर्त में जातको को कर्ज लेने से दूर रहना चाहिए।

पूजन शुभ कार्य निष्फल नहीं होता
मुहुर्त ज्योतिष में इस दिन को अबूझ मुहुर्त के रूप में मान्यता प्राप्त है। आज के दिन मंगलवार में रोहिणी नक्षत्र होने से बनने वाला मातंग योग कुल वृद्धि करने वाला श्रेष्ठ कहा जाता है। उपरोक्त श्रेष्ठ चौघडि़या मुहुर्त के साथ श्रेष्ठ लग्न कर्क और सिंह प्रात: 10:14 बजे से अपरान्ह 02:50 बजे तक सब कायरें में पूजा करने तथा कराने वालों के लिए एवं खरीदारी के लिए अभिष्ट सिद्धि मानी जायेगी। दिन में भी कर्क लग्न में अभिजीत मुहुर्त लगेगा जोकि कई दोषों को दूर करने में सहायक होगा। स्वंय सिद्धि मुहुर्त अथवा अबूझ मुहुर्त एवं अवतार तिथि के समागम में पूजन शुभ कार्य निष्फल नहीं होता।

करें खरीदारी पायें सौभाग्य
मां लक्ष्मी के पूजन के दृष्टिकोण से यह दिन श्रेष्ठ माना जाता है, इस दिन स्वर्ण, चांदी के आभूषणों की खरीदारी श्रेष्ठ मानी जाती है। धातु के रूप में लक्ष्मी जी घर पर आती हैं। इस दिन क्त्रय किये गये आभूषणों का पूजन किया जाता है। उसमें मां लक्ष्मी की स्थिति मानकर पूजा की जाती है, जिससे सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इस दिन अबूझ मुहुर्त, स्वयं सिद्ध मुहुर्त होने के कारण गृह प्रवेश, वाहन आदि खरीदना, धन का निवेश करना अधिक लाभप्रद रहता है।

राशि के अनुसार उपाय

मेष : यह जातक लाल कपड़े में सवा किलो लाल मसूर की दाल बांधकर घर का प्रतिष्ठान अथवा कार्यस्थल में रखे उन्नति होगी।

वृषभ: यह जातक गंगा जल को मटके में भरकर सफेद कपड़े से ढक कर अथवा घड़े का मुँह बांधकर अपने निवास अथवा कार्य स्थल पर रखे।

मिथुन: यह जातक एक काँसे के बर्तन हरे कपड़े में बांधकर घर अथवा प्रतिष्ठान में पूर्व दिशा की ओर रखे।

कर्क :- यह जातक किसी शुद्ध बर्तन में गंगा जल भरकर उसमें चांदी का एक सिक्का डालकर पूर्व दिशा में रखे।

सिंह: यह जातक एक कटोरी सेंधा नमक भरकर घर अथवा प्रतिष्ठान अथवा कार्यस्थल पर पूर्व दिशा में रखे।

कन्या:- यह जातक पानी से भरी एक कटोरी में कपूर डालकर प्रतिष्ठान में पूर्व दिशा में रखे।

तुला : यह जातक कोई भी सफेद रंग की मूर्ति घर अथवा व्यापार स्थल में रखे उन्नति होगी।

वृश्चिक:- यह जातक एक छोटी शीशी में शहद भरकर लाल कपड़े में लपेटकर घर अथवा प्रतिष्ठान में दक्षिण की ओर रखे।

धनु : जातक पीले कपड़े में कोई भी धार्मिक पुस्तक लपेटकर निवास प्रतिष्ठान अथवा फैक्ट्री के पूर्व में रखे।

मकर: किसी बर्तन में नारियल के तेल में काले तिल डालकर एवं एक नारियल पर काला धागा बांधकर दोनो वस्तुएं घर अथवा प्रतिष्ठान के पूर्वी कोने में रखे।

कुंभ : जातक नारियल के दो सूखे गोलो को ऊपर से कांटकर अनाज भरकर उस पर मौली लपेटकर किसी गरीब को दान, मन्दिर में रखे, दूसरा निवास अथवा प्रतिष्ठान में रखे।

मीन:- यह जातक सवा मीटर पीला कपड़ा लेकर उसमें 21 पीले सिक्के बांधकर निवास, प्रतिष्ठान अथवा कार्यस्थल के ईशान कोण में रखे।