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PATNA : अगर आप कोई वेबसाइट सर्च कर रहे हैं तो सावधान हो जाएं। वह फर्जी भी हो सकती है और आप ठगी के शिकार हो सकते हैं। पटना में इन दिनों लगातार इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं। जालसाजों ने दूध, गैस एजेंसी और हाईकोर्ट की वेबसाइट के नाम से फर्जी वेबसाइट बना रखा था। लगातार आ रहे ऐसे मामले के बाद दैनिक जागरण आई नेक्स्ट ने जब एक्सपर्ट से बात की तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। एक्सपर्ट ने बताया कि जो डोमेन एक बार किसी ने ले लिया सेम वही मिलना मुश्किल होता है लेकिन जालसाज मिलते-जुलते नाम से डोमेन लेकर फर्जी वेबसाइट शुरू कर देते हैं। लोगों को पता ही नहीं चलता है कि कौन असली और कौन नकली है। आज डीजे आई नेक्स्ट में पढि़ए किस तरह ठगे जाते हैं और कैसे इससे बच सकते हैं।

100 रुपए में मिल जाता है डोमेन

* जिस भी संस्था की फेक साइट बनानी है तो जालसाज मिलते जुलते नाम ले लेते हैं। आसानी से महज 100 रुपए में डोमेन मिल जाता है।

* शासकीय वेबसाइट के लास्ट में जीओवी। इन, एनआईसी। इन लगा रहता है लेकिन लोगों को जानकारी के अभाव में ये समझ में नहीं आता है।

*  इसके बाद आता है होस्टिंग। ये वो जगह वेबसाइट से रिलेटेड फाइल (वेब पेज, इमेज, डेटा बेस इत्यादी...)को रखते हैं। ये भी 100-150 रुपए में आसानी से मिल जाता है।


बेरोजगार
साइबर जालसाजों के निशाने पर बेरोजगार युवक रहते हैं। ये लोग नौकरी के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते हैं। इस कारण जालसाज ऐसे लोगों को आसानी से ठगी का शिकार बना लेते हैं। ऐसे लोगों से सावधान रहना जरूरी है।


जरूरतमंद
कई बार लोग कर्ज में डूबे रहते हैं या बीमारी के कारण उन्हे रुपए की सख्त जरूरत होती है। ऐसे लोग नए संभावनाओं की तलाश में विभिन्न वेबसाइट का सर्च करते हैं और फंस जाते हैं।

जागरूकता का अभाव
जालसाजों के निशाने पर जागरूक नहीं रहने वाले लोग भी रहते हैं। या वैसे लोग जो सिस्टम से अपग्रेड नहीं है। इस कारण वो लोग निशाने पर आ जाते हैं।


हाईकोर्ट से लेकर गैस एजेंसी का बना दिया फर्जी वेबसाइट

केस- 1
मनेर के दवा व्यवसाई राकेश कुमार एक नामी दूध कंपनी का वितरक बनने के लिए कंपनी के वेबसाइट पर दावा किया था। उनका कहना है कि वेबसाइट का किसी ने क्लोन बना लिया था। इस कारण मैंने वहां पर अप्लाय कर दिया। इसके बाद मुझसे 11.50 लाख रुपए ठग लिए।



केस- 2
गोसाई टोला निवासी संजीव कुमार से 1.885 लाख रुपए की ठगी हो गई। वो काफी दिनों से गैस एजेंसी लेने का प्रयास कर रहे थे। 6 फरवरी को वेबसाइट सर्च किया फिर उन्होंने आवेदन किया। इसके बाद इनके पास फोन आया कि आपको सिलेक्ट कर लिया गया है। उनसे एनओसी और रजिस्ट्रेशन के नाम पर करीब 1.885 लाख रुपए की ठगी हुई है।


केस- 3
साइबर अपराधियों ने पटना हाईकोर्ट का फर्जी वेबसाइट बना डाला। इस फर्जीवाड़ा का पता चलते ही हाईकोर्ट के अधिकारियों ने कोतवाली थाने में इसकी शिकायत की। इस फर्जी वेबसाइट पर चपरासी की बहाली का विज्ञापन भी डाला गया था।

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