- जिले के सरकारी स्कूल्स में नामांकन के हिसाब से नहीं मिल रहा मिड डे मील के लिए राशन

- प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूल मिलाकर रोज भोजन से वंचित रह जाते हैं 62,513 स्टूडेंट्स

GORAKHPUR: बेसिक शिक्षा विभाग की लापरवाही से जिले में हर रोज लगभग 62 हजार बच्चे भूख रह जा रहे हैं. सरकारी स्कूलों में नामांकन का टारगेट हासिल करने के लिए तो जिम्मेदारों ने तमाम कवायदें कीं लेकिन हर छात्र को मिड डे मील मिल सके इसके लिए गंभीरता नहीं दिखाई जा रही. इस सत्र के आंकड़ों पर नजर डालें तो जिले में प्राइमरी स्कूलों के छात्रों की संख्या 2,30,796 है. लेकिन इनमें से केवल 1,70,000 बच्चों को ही मिड डे मील नसीब हो पा रहा है. यानि 60,796 बच्चे दोपहर के भोजन से दूर हैं. वहीं जूनियर हाई स्कूल में पढ़ने वाले 66,717 छात्रों में से 1717 बच्चे भी इस योजना के लाभ से दूर ही रह गए हैं.

दोपहर के भोजन से दूर हैं बच्चे

बेसिक शिक्षा विभाग के जिम्मेदारों का दावा है कि मिड डे मील योजना से दूर स्टूडेंट्स को इस योजना से जोड़ने के लिए मिड डे मील को-ऑर्डिनेटर की तरफ से लगातार कवायद की जा रही है. लेकिन विभाग से ही मिले ये आंकड़े साफ बयां कर रहे हैं कि मिड डे मील योजना को लेकर जिम्मेदार आखिर कितने गंभीर हैं. हाल ये कि एक अप्रैल में सत्र शुरू होने के बाद बढ़ते गए छात्रों के लिए अब तक भोजन की व्यवस्था नहीं की जा सकी है.

क्या है अधिकारियों का कहना

हालांकि इस उदासीनता पर बेसिक शिक्षा विभाग का तर्क है कि कभी भी शत प्रतिशत बच्चों की उपस्थिति स्कूलों में नहीं होती है. इसलिए 100 प्रतिशत खाद्यान नहीं आता है. खाद्यान करीब 60-70 प्रतिशत के रेश्यो से ही आता है. चूंकि स्कूलों में बच्चों का प्रतिशत कम होता है इसलिए खाद्यान भी विभाग से कम ही निर्गत किया जाता है. जबकि सवाल ये उठता है कि नियमानुसार, जब शासन से नामांकन के हिसाब से खाद्यान की डिमांड की जाती है तो फिर उतना राशन स्कूलों को क्यों नहीं आता.

जिले के प्राइमरी स्कूल्स में स्टूडेंट्स की संख्या

कक्षा स्टूडेंट्स

एक 45755

दो 51001

तीन 47980

चार 45759

पांच 40301

जूनियर हाईस्कूल में स्टूडेंट्स की संख्या

कक्षा स्टूडेंट्स

छह 22776

सात 23250

आठ 20691

मिड डे मील पाने वाले स्टूडेंट्स की संख्या

प्राइमरी स्कूल - 1,70,000

जूनियर हाईस्कूल - 65,000

वर्जन

बच्चों के नामांकन की संख्या और मिड डे मील के आंकड़ों में अंतर है. कुछ दिनों में इसे ठीक करा लिया जाएगा. चूंकि सौ प्रतिशत बच्चों की उपस्थिति होती नहीं है इसलिए खाद्यान सौ प्रतिशत नहीं आता है.

- बीएन सिंह, बीएसए