हाई कोर्ट ने कहा, दोषी अफसरों पर तत्काल करें कार्रवाई, तीन महीने में एसआईटी जांच पूरी करने का निर्देश

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इलाहाबाद नगर निगम में हुए पेंशन घोटाले की जांच 19 में से 11 आरोपियों की मौत हो जाने के बाद भी पेंडिंग होने पर हाई कोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार किया है. कोर्ट ने एसआईटी को जांच तीन महीने में पूरी करने का निर्देश दिया है और कहा है कि इस मामले में दोषी अफसरों पर तत्काल सख्त कार्रवाई की जाय.

सहायक एकाउंटेंट की याचिका खारिज

यह आदेश जस्टिस एसपी केशरवानी ने गबन राशि की वसूली व पेंशन आदि जब्त करने के आदेश के खिलाफ सहायक एकाउन्टेन्ट राजबहादुर माथुर की याचिका को खारिज करते हुए दिया है. कोर्ट ने करोड़ों के घोटाले की जांच एक से दूसरी एजेन्सी को सौंपने व जांच लटकाये रखने की आलोचना की और कहा कि विजिलेंस ने अधिकारियों को बचाने का प्रयास किया. घटना की प्राथमिकी भी दर्ज करायी गयी. पुलिस को जांच करने नहीं दिया गया. 9 साल बाद विजिलेंस रिपोर्ट शासन को भेजी गयी. मुख्य सचिव ने 13 दिसम्बर 17 को हाई पावर कमेटी गठित कर दी. 19 आरोपियों में से 11 की मौत हो चुकी है. 31 मई 2018 को प्रमुख सचिव नगर विकास ने एसआईटी जांच बैठा दी है. एसआईटी को कहा गया है कि वह जीवित आरोपियों का पता लगाये उनकी सम्पत्ति की जांच करे.

क्या है पूरा मामला

16 फरवरी 1985 से 30 जून 1995 के दौरान पेंशन मद में करोड़ों का भुगतान कर अधिकारियों ने हजम कर लिया

1999 की आडिट रिपोर्ट में इस घोटाले का खुलासा हुआ

कुल 4 करोड़ 75 लाख 80 हजार रुपये की बंदरबांट का मामला सामने आया

कुल 900 पेंशनर थे और 2800 लोगों को पेंशन का भुगतान कर दिया गया

कई लोगों को एक से अधिक बार एक समय में भुगतान किया गया

सेन्ट्रलाइज्ड कैडर सहित निगम के 19 अधिकारियों की जांच की गयी

केके शर्मा को दोषी करार दिया गया और प्रतिकूल प्रविष्टि सहित दो इन्क्रीमेन्ट रोक दिये गये. याची पर भी कार्यवाही की गयी.