हाईकोर्ट सख्त, जिला जज गाजीपुर के खिलाफ आदेश रद
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ALLAHABAD: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सूचना आयुक्त पर 50 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है. हर्जाना राशि गाजीपुर के जिला जज शमशाद अहमद को दी जाएगी. यह आदेश जस्टिस सुधीर अग्रवाल और जस्टिस शशिकांत की खंडपीठ ने जिला जज शमशाद अहमद व अन्य की याचिका स्वीकार करते हुए दिया है.

न्यायिक अधिकारी को तलब करने की निंदा
राज्य सूचना आयुक्त ने याची जिला जज पर एटा में एडीजे/ केंद्रीय सूचना अधिकारी के तौर पर कार्यरत रहते हुए शिकायतकर्ता को सूचना न देने पर 25 हजार रुपये हर्जाना लगाया था और तलब किया था. जबकि शिकायतकर्ता लोकेंद्र द्विवेदी को मांगी गई सूचना दी जा चुकी थी. कोर्ट ने सूचना आयुक्त की ओर से एचजेएस रैंक के न्यायिक अधिकारी को बिना किसी वजह के तलब करने की निंदा की है और आयुक्त के दोनों आदेशों को रद कर दिया है.

क्या था पूरा प्रकरण
लोकेंद्र द्विवेदी ने एटा जिला न्यायालय में हुई सीधी भर्ती व इस संबंध में याचिकाओं की सूचना मांगी थी। कुछ सूचना हाईकोर्ट नियमों के तहत प्राप्त होनी थी तो कुछ विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से दी जानी थी। कुछ बिंदुओं पर सूचना जिला जज की ओर से दी जानी थी। सभी मांगी गई सूचना के बाबत शिकायतकर्ता को जानकारी उपलब्ध करा दी गई। इससे असंतुष्ट शिकायतकर्ता ने हाईकोर्ट के महानिबंधक के समक्ष अपील दाखिल की। अपील के निर्णय के खिलाफ जिला जज एटा के समक्ष अपील दाखिल की गई जो 12 मार्च 2013 को निर्णीत हो गई। सचिव विधिक सेवा प्राधिकरण ने भी सूचना दी दी। कुछ सूचनाएं एडीजे की ओर से 26 सितंबर 2013 को दे दी गई। इसके बाद राज्य सूचना आयोग लखनऊ के समक्ष अपील दाखिल की गई। आरोप है कि बिना तथ्यों की जांच किए सूचना आयुक्त ने एडीजे याची को तीन अप्रैल 2014 को तलब किया। 16 अक्टूबर 2014 को जब याची जिला जज गाजीपुर थे, 25 हजार रुपये हर्जाना वसूली आदेश दिया। इस आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी

जज, सूचना आयुक्त के अधीनस्थ कर्मचारी नहीं है. राज्य सूचना आयुक्त को न्यायिक अधिकारी को तलब करने का अधिकार नहीं है. घमंड में न्यायिक अधिकारी को तलब करना सही नहीं है. ऐसा कर उन्होंने न्यायिक कार्य को पंगु बनाया. सूचना आयुक्त ने तथ्य देखे बिना दबाव में न्यायिक अधिकारी के खिलाफ आदेश जारी किया.
इलाहाबाद हाई कोर्ट