सरकारी खाद्यान्न ब्लैक करके 80 लाख का सरकार को नुकसान पहुंचाने का है आरोप

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18 लाख कमीशन लेकर काले धन को सफेद करके सरकार को 80 लाख का नुकसान पहुंचाने के आरोपी राजेन्द्र सिंह को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कोई राहत देने से इंकार कर दिया है. हाईकोर्ट ने इलाहाबाद सत्र न्यायालय में राजेन्द्र सिंह के खिलाफ मनीलाड्रिंग एक्ट के तहत चल रहे आपराधिक मुकदमे पर रोक की मांग में दाखिल याचिका खारिज कर दी है.

तीन साल में किया गया खेल

यह आदेश जस्टिस रमेश सिन्हा तथा डीके सिंह की खण्डपीठ ने राजेन्द्र सिंह की याचिका पर दिया है. याचिका का प्रतिवाद सीबीआई अधिवक्ता ज्ञान प्रकाश ने किया. वर्ष 2004-06 में लोक वितरण प्रणाली का दुरुपयोग करते हुए याची ने गोंडा जिले के नवाबगंज सरकारी गोदाम से खाद्यान्न लेकर कोटेदारों की मिलीभगत से ब्लैक मार्केटिंग की. इसमें गोदाम इंचार्ज राममूर्ति यादव व शिव बक्श सिंह (जिनकी बाद में मृत्यु हो चुकी है) की मिलीभगत से 3163 करोड़ के खाद्यान्न लिए. 2.53 करोड़ के खाद्यान्न कोटेदारों को दिखाये. 52 लाख रुपये शिवबक्श सिंह को वापस किये और 18 लाख रुपये याची ने बतौर कमीशन अपने पास रखा. इस कार्यवाही में राज्य सरकार को 80.64 लाख रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ. पहले एसआईटी जांच हुई. बाद में जांच सीबीआई को सौंपी गयी. 36 आरोपियों की जांच के बाद सीबीआई ने कई के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है. जांच में खुलासा हुआ कि याची ने 18 लाख रुपये से पांच ट्रक व दो प्लाट खरीदे हैं. एक में गोदाम बनाया है. जब उससे स्रोत पूछा गया तो उसने 17 लाख रुपये एक व्यक्ति से लोन लेना बताया और कहा कि ट्रक किश्तों पर है. सीबीआई ने अन्य पेपर बरामद किये और लोक वितरण प्रणाली का खाद्यान्न कोटेदारों को देने के बजाय ब्लैक मार्केट में बेचे जाने के आरोप में चार्जशीट दाखिल की है. इसी मामले में सहायक निर्देशक प्रवर्तन निदेशालय ने इलाहाबाद में याची के खिलाफ आपराधिक इस्तगासा दाखिल किया है. जिस पर सत्र न्यायालय ने सम्मन जारी किया है. याची का कहना था कि इसी मामले की सीबीआई कोर्ट लखनऊ में चल रहे मुकदमे पर लखनऊ पीठ ने रोक लगा रखी है. जब तक सीबीआई अदालत का फैसला नहीं आ जाता तब तक मनीलाड्रिंग एक्ट के तहत मुकदमे की कार्यवाही रोकी जाय. कोर्ट ने कहा कि दोनों अपराध अलग है. मुकदमे चल सकते है. सत्र न्यायालय इलाहाबाद के आदेश में कोई अवैधानिकता नहीं है.