- चिकित्सक पिता बस में बैठा कर लौटा था, हुआ लापता

- आईडी बना कर दोस्त को किया मैसेज

आगरा. चार साल पहले अपने परिजनों से जुदा हुआ नौवीं का छात्र फेसबुक की मदद से 15 अगस्त को कैद की जिंदगी से आजादी मिल गई. वह परिजनों से मिल सका. परिजन उसकी तलाश में जुटे थे. चार साल के बाद न मिलने पर वे हताश हो चुके थे. अब बेटे को पाकर परिजनों में खुशी की लहर है.

पिता को छोड़ने गया था

महफूज सुरक्षित बचपन के समन्यवक नरेश पारस के मुताबिक न्यू आगरा सुनार गली निवासी होम्योपैथिक डॉक्टर डॉ. दिलीप कुश्वाह का 14 वर्षीय बेटा अमन 27 अप्रैल 2014 को पिता को भगवान टॉकीज छोड़ने आया था. लौटने के दौरान रास्ते में एक युवक मिला उसने अमन को बुला लिया. उसने पता नहीं क्या किया कि अमन उसके साथ चल दिया.

बंधक बना कर रखता था

घर लौटे अमन ने बताया कि युवक उसे विशाखापटनम ले गया. वहां पर उसे एक कमरे में बंद रखता था. एक टाइम खाना देता था. युवक उसे लेकर रेलवे स्टेशन गया तो अमन चकमा देकर निकल गया. वहीं पर अंगूर पैकिंग का काम किया. यहां पर कुछ लड़कों से उसकी दोस्ती हुई. लड़के उसे तिरुपति ले गए वहां पर एक जनरल स्टोर पर काम पर लगवा दिया.

राजस्थान से भेजा मैसेज

दुकान चलाने वाले राजस्थान के थे. वे उसे लेकर राजस्थान आए. यहां पर अमन ने हनी श्रीवास्तव के नाम से आईडी बनाई और अपने दोस्त अनुज को फेसबुक पर तलाश कर रिक्वेस्ट भेजी और घर आने के लिए मैसेज किया. दोस्त ने उसके घर पर बताया. परिजनों ने नरेश पारस से सम्पर्क कर घटना बताई. इसी के बाद 15 अगस्त को अमन अपने घर आ गया. बेटे को पाकर परिजनों के चेहरे खिल गए.