18 बार कॉल के बाद भी नहीं पहुंची एंबुलेंस

प्रसूता को प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर नहीं किया गया भर्ती

डीएम तक पहुंची सूचना तब भी नहीं पहुंची एंबुलेंस

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महिलाओं को सुविधा दिलाने के लिए एंबुलेंस चलवाने का लम्बा-चौड़ा दावा भले ही प्रशासन कर रहा हो लेकिन खीरी एरिया में सामने आई घटना ने इसकी पोल खोलकर रख दी है. दर्द से कराह रही प्रसूता को प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर भर्ती करने से इंकार कर दिया गया. एक मीडियाकर्मी ने इसकी सूचना सीधे डीएम तक पहुंचाई, इसके बाद भी आधे घंटे से अधिक समय तक एंबुलेंस नहीं पहुंची. फाइनली मीडियाकर्मी ने अपनी गाड़ी से महिला को डफरिन पहुंचाया. उसने एक पुत्र को जन्म दिया है. इस संवेदनहीन रवैए से प्रशासन के साथ डॉक्टर्स की कलई खुल गई है. डीएम ने सीएमओ को जांच सौंपते हुए स्वास्थ्य केन्द्र के प्रभारी को निलंबित करने का आदेश दिया है और एंबुलेंस के चालक को हटाने का आदेश दिया है.

प्रसव पीड़ा होने पर लेकर पहुंचे थे

मामला कोरांव तहसील के डिगलो गांव का है. यह गांव बाढ़ से प्रभावित है. संडे को मीडियाकर्मी अमित श्रीवास्तव यहां कवरेज के लिए गए हुए थे. यहां उन्होंने 27 वर्षीय अंजू प्रसव पीड़ा से कराहते देखा और साथ में इटवा नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र का संवेदनहीन चेहरा भी. यहां उसे भर्ती ही नहीं किया गया. यहां से मीडियाकर्मी ने सीधे डीएम को फोन किया और वास्तविकता बताई. इसके बाद डीएम ने भरोसा दिलाया कि 20 मिनट में एंबुलेंस पहुंच जाएगी लेकिन समय बीतता गया और वह नहीं पहुंची. इसके बाद मीडियाकर्मी ने इनीशिएटिव लिया और प्रसूता को अपनी गाड़ी से डफरिन लाने का फैसला लिया. उन्होंने इसकी सूचना डीएम को दे दी तो प्रशासनिक अमला हरकत में आ गया. आनन-फानन में सीएमओ को डीएम ने डफरिन भेजा और इलाज की समुचित व्यवस्था कराने का आदेश दिया.

अस्पताल में नहीं किया भर्ती

अंजू ने सोमवार को एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया. खास बात यह भी है कि बच्चे का जन्म नार्मल हुआ. इसके बाद भी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर उसे भर्ती न किए जाने से कई सवाल खड़े हो गए हैं. मानवीय पहलू को ध्यान में रखते हुए मदद करने वाले जर्नलिस्ट अमित श्रीवास्तव को सोमवार को कमिश्नर राजन शुक्ला ने शाल भेंट करके सम्मानित भी किया. डीएम ने सोमवार को एडीएम डॉ विपिन कुमार मिश्र के माध्यम से बच्चे के लिए खिलौना तथा कपड़े भेजे. उन्हाेंने मामले की जांच एसडीएम कोरांव को सौंपी है और सीएमओ से कहा है कि जांच में दोषी पाए जाने पर लापरवाह चिकित्सक को निलम्बित करें. एम्बुलेंस न पहुंचने पर एम्बुलेंस के वाहन चालक के खिलाफ कार्यवाही करते हुए उसे हटा दिया गया है.