-जमीन और संसाधन उपलब्ध कराएगी राज्य सरकार

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PATNA: कृषि विज्ञान केंद्र की तर्ज पर बिहार के सभी जिलों में पशु विज्ञान केंद्र खोले जाएंगे. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसके लिए भारतीय कृषि अनुसंधान केंद्र (आईसीएआर) से मदद मांगी है. साथ ही जमीन देने का वादा भी किया है. उन्होंने कहा कि पशु अस्पताल प्रभावी नहीं हैं. जिलों में ऐसे अस्पताल बनाए जाएंगे जहां सभी प्रकार के पशुओं के इलाज के लिए व्यवस्था हो. साथ ही इनडोर और आउटडोर व्यवस्था को भी दुरुस्त करने की जरूरत है. यह बातें नीतीश कुमार ने बुधवार को अधिवेशन भवन में बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के प्रथम स्थापना दिवस समारोह में संबोधित करते हुए कहीं.

नहीं होगी संसाधन की कमी

सीएम नीतीश कुमार ने पशु अस्पतालों में एक्सपर्ट डॉक्टर और जरूरी दवाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया और कहा कि पशु अस्पतालों में सुधार के लिए सरकार संसाधन की कमी नहीं होने देगी. पशुओं की देसी नस्ल को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि जैविक खेती के लिए पशुओं की जरूरत है. नस्ल सुधार के लिए राज्य में पॉलिसी बनाई गई है, जो राज्य के जलवायु के अनुरूप है. उन्होंने कहा कि नालंदा एवं पटना समेत 4 जिलों में जैविक खेती के लिए किसानों को अग्रिम इनपुट सब्सिडी दी जा रही है. आगे इसे और बढ़ाया जाएगा. गोबर से वर्मी कंपोस्ट और गोमूत्र से जैविक पेस्टिसाइड तैयार हो सकता है.

हरियाली हो 17 फीसदी

कृषि रोड मैप में कृषि के साथ ही पशुपालन और पर्यावरण को बढ़ावा देने की नीति बनाई गई है. राज्य में हरित आवरण को 9 से बढ़ाकर 17 फीसद तक पहुंचाना है. इसमें सफलता भी मिली है. पशु विज्ञान विवि की स्थापना के निर्णय के साथ ही तय किया गया था कि इसके लिए एक नया फिशरीज कॉलेज किशनगंज में स्थापित किया जाएगा.यहां 250 एकड़ जमीन में डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर कृषि कॉलेज और फिशरीज कॉलेज खोला गया है. सीएम ने विश्वविद्यालय का प्रतीक चिह्न एवं सील का लोकार्पण किया और फिशरीज कालेज की रिमोट के जरिए शुरुआत की. सीएम ने सफल पशुपालकों एवं उद्यमियों को सम्मानित किया, जिनमें सिवान के मो. मुस्ताक अजीजी, मुजफ्फरपुर की समुद्री देवी, पटना के संतोष कुमार, भोजपुर के जितेंद्र कुमार सिंह एवं मुजफ्फरपुर के राजू कुमार चौधरी शामिल हैं. कार्यक्रम को डिप्टी सीएम सुशील मोदी, मंत्री पशुपति कुमार पारस, सचिव डॉ. एन विजयलक्ष्मी, कुलपति डॉ. रामेश्वर सिंह एवं कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल के अध्यक्ष एके श्रीवास्तव ने भी संबोधित किया.

मेरे पास भी हैं गाय

नीतीश ने कहा कि मैं भी गोपालन करता हूं. मेरे पास फ्रीजियन, साहिवाल, जर्सी और देसी नस्ल की गायें हैं. मैं रोज सुबह सबसे पहले गोशाला जाता हूं. फ्रीजियन में बीमारी की आशंका अधिक रहती है. जर्सी और देसी नस्ल की गायें रखने में कम परेशानी है. देसी नस्ल की गाय को अच्छी ब्रिडिंग कराई जाए तो बेहतर होगा. उन्होंने कहा कि उनकी फ्रीजियन गाय को एक बीमारी हुई थी. उस समय तत्कालीन मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह की गाय को भी यही बीमारी थी. एक्सपर्ट को बीमारी का पता नहीं चल सका. इससे गाय को बचाया नहीं जा सका.

700 करोड़ अंडे पड़ जा रहे कम

इसी कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि मछली उत्पादन में बिहार जल्द ही आत्मनिर्भर बन जाएगा. अभी मछली उत्पादन में बिहार देश में चौथे, मांस में छठे, दूध में नौवें और अंडा उत्पादन में 10वें स्थान पर है. उन्होंने कहा कि बिहार में हर साल 800 करोड़ अंडे की जरूरत है, जबकि उत्पादन मात्र 100 करोड़ है. बिहार में सालाना प्रति व्यक्ति 12 अंडे की खपत है, जबकि राष्ट्रीय औसत 66 है. वैसे सरकार ने मध्याह्न भोजन योजना व आंगनबाड़ी केन्द्रों में सप्ताह में एक दिन अंडा अनिवार्य कर दिया है.

लोन लेना होगा आसान

डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने कहा कि मुर्गी फार्म लगाने में कृषि भूमि को व्यावसायिक भूमि में बदलने में आ रही दिक्कतों को सरकार दूर करेगी, ताकि बैंकों से लोन की सुविधा मिल सके. राज्य सरकार कोशिश करेगी कि मुर्गी पालकों को प्रदूषण नियंत्रण पर्षद से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने की जरूरत न पड़े. मोदी ने कहा कि बक्सर के डुमरांव में भारत सरकार के 'गोकुल ग्राम' के तहत 8 करोड़ की लागत से गायों की देसी नस्ल के विकास एवं गैर दुधारू पशुओं के गोबर व मूत्र के इस्तेमाल की योजना शुरू की गई है. केंद्र की 'संजीवनी' योजना के तहत आधार नंबर की तरह पशुओं के लिए भी आधार नंबर की पहल की गई है. इसके तहत पशुओं की कान में छेद कर एक चिप लगा दिया जाता है जिसके जरिए उसके टीकारण, गर्भधारण की तिथि एवं अन्य जानकारियों को प्राप्त किया जा सकता है. बिहार में इस तरह का काम प्रारंभ हो गया है. जल्द ही इसे और तेजी में किया जाएगा.