- परोल के लिए घूम रही फाइल

- खारिज हो गई रमाकांत की दया याचिका

GORAKHPUR : गोरखपुर जेल में कैदियों के परोल आवेदन को संस्तुति नहीं मिल पा रही. परोल के आवेदन पेंडिंग पड़े हैं. फाइलें इस दफ्तर से उस दफ्तर का चक्कर लगा रही हैं. जेल प्रशासन का कहना है पुलिस की रिपोर्ट के अभाव में परोल की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही. विलंब को लेकर बस यही कहा जा रहा है कि सबकी किस्मत संजय दत्त जैसी नहीं, कि जब चाहें जेल से घर जाने की छुट्टी मिल जाए.

फॉर योर इंफॉर्मेशन

मर्डर तथा डकैती के बंदियों को छोड़कर किसी सिद्धदोष बंदी को परोल पर छोड़ने का नियम है. बंदी के परिवार में आश्रित, माता-पिता, परिजनों की बीमारी या मौत होने पर, पुत्र और पुत्री के विवाह तथा कृषि कार्य, आवास मरम्मत के कामों के लिए डीएम अधिकतम एक माह का परोल स्वीकृत कर सकते हैं. अचानक जरूरत पड़ने पर डीएम 72 घंटे के लिए परोल की अनुमति भी दे सकते हैं. इसके अलावा कमिश्नर जिला मजिस्ट्रेट द्वारा स्वीकृत परोल की अवधि में 16 दिन की बढ़ोत्तरी कर सकते हैं अथवा अधिकतम एक माह का परोल स्वीकृत कर सकते हैं. शासन स्तर से दो माह के परोल की अनुमति मिल सकती है.

धूल फांक रहे बंदियों के आवेदन

विभिन्न मामलों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे छह बंदियों ने परोल के लिए आवेदन किया है. आवेदन विचार के लिए विभिन्न अफसरों की टेबल पर धूल फांक रहे हैं. जिला कारागार में बंद वंश बहादुर, सुदामा सिंह, तिलक सहित छह बंदियों ने खुद को परोल पर छोड़ने की गुजारिश की है. जेल प्रशासन का कहना है कि आजीवन कारावास के सजायाफ्ता रमाकांत ने दया याचिका लगाई. 10 साल की सजा पूरी कर चुके रमाकांत ने खुद को रिहा करने की मांग की, लेकिन मानक पूरे न होने से गवर्नमेंट ने उसकी याचिका खारिज कर दी.

हाल फिलहाल किसी बंदी को परोल पर नहीं छोड़ा गया है. छह बंदियों ने परोल के लिए आवेदन किया है, लेकिन पुलिस रिपोर्ट न लगने से उनके आवेदन पेडिंग पड़े हैं. बंदी रमाकांत की दया याचिका खारिज हो चुकी है.

आरके सिंह, जेलर