देश में लगातार हो रहे कमजोर मानसून की चर्चाओं से परेशान किसानों, सामान्यम नागरिको और निवेशकों को सांत्व ना देते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि देश में मानसून कम रहने की खबर को बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया जा रहा है। इसलिए इससे डरने की जरूरत नहीं है। उन्‍होंने ये भी आश्वा़सन दिया कि इसका प्रभाव खाद्यान्न उत्पादन ज्यादा नहीं होगा। जेटली ने बृहस्पतिवार को संवाददाताओं से बातचीत के दौरान कहा कि कम बारिश होने की खबरों से डरने की जरूरत नहीं है।

उन्होंने रिजर्व बैंक टिप्पणी पर भी कमेंट करते हुए कहा कि इसे गलत तरीके से पेश किया है। उन्होंने देश में बारिश के पैटर्न का जिक्र करते हुए कहा कि हमारे देश की भौगोलिक स्थितियां जगह के हिसाब से अलग अलग हैं। सारे हिस्सों में एक समान बारिश नहीं होती है। ऐसे में जहां ज्यादा वर्षा होती है, वहां यदि थोड़ी कम बारिश हो गई तो क्या वहां सूखा पड़ जाएगा।

इसलिए उन्होंने सबसे कहा कि मानसून खराब रहने या सूखा पड़ने की खबर को ज्यादा तवज्जो नहीं देनी चाहिए। उन्होंने रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन के बयान पर कहा कि मानसून ठीक नहीं रहने के आधार पर महंगाई की दरें बढ़ने का निष्कर्ष निकालना हास्यास्पद है। जेटली ने आम जनता को ये भी दिलासा दिलाया है कि सूखे से कम खाद्यान्न उत्पादन होने के बावजूद खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने नहीं पाएंगे, क्योंकि सरकार के पास पर्याप्त खाद्यान्न स्टॉक है।

हर परिस्थिति के लिए तैयार है सरकार
इस बीच केंद्र की राजग सरकार ने सूखे की आहट को इमरजेंसी के तौर पर लिया है। पिछले कुछ महीनों में प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में अपना लोहा मनवा चुके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपदा के इस पूरे हालात पर अभी से कड़ी नजर रखनी शुरू कर दिया है। कमजोर मानसून के पूर्वानुमान को देखते हुए कृषि मंत्रालय ने अपनी तैयारियों का एक  विस्तृत ब्योरा प्रधानमंत्री को भेज दिया है। रिपोर्ट में आपदा से पैदा होने वाली चुनौतियों के बारे भी विस्तार से बताया गया है।

समर्थन मूल्य में वृद्धि संभव
मानसून के कमजोर होने की दशा में खेती को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए सरकार खरीफ फसलों के समर्थन मूल्य में संतोषजनक वृद्धि कर सकती है। वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा कि एमएसपी का प्रस्ताव जल्द ही केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। सूखे में फसलों की सिंचाई के लिए किसानों को सस्ती व पर्याप्त बिजली आपूर्ति का भी बंदोबस्त किया जा रहा है। प्रधानमंत्री सिंचाई योजना पर तेजी से काम करने के लिए इसका दायित्व जल संसाधन मंत्री उमा भारती से लेकर कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह को सौंप दिया गया है।

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