-मंडलीय हॉस्पिटल में खुलते ही बिगड़ गई जन औषधि केन्द्र की सेहत

-दवाएं ही नहीं हैं पूरी तो मरीजों को कैसे मिलेगा सस्ती दवाओं का लाभ

लोगों को कम कीमत पर सस्ती दवा उपलब्ध कराने के लिए शहर में केन्द्र सरकार की ओर से संचालित जनऔषधि केंद्र खोल तो दिए गए हैं लेकिन उन्हें इसका लाभ नहीं मिल रहा है. पिछले माह मंडलीय हॉस्पिटल में खुले जन औषधि केंद्र में अभी से दवाओं का टोटा हो गया है. हॉस्पिटल आने वाले मरीजों को ओपीडी में लिखी जाने वाली जरूरी दवाएं यहां नहीं मिल पा रही हैं. इसके चलते उन्हें बाहर से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही है.

खाली हाथ लौटते हैं मरीज

मंडलीय हॉस्पिटल के ओपीडी में इलाज के लिए रोजाना 1800 से 2000 मरीज पहुंचते हैं. इनमें मेडिसीन, आर्थो, ईएनटी, पेडियाट्रिक्स, सर्जरी, स्किन, गायनकोलॉजी, हार्ट, यूरोलॉजी के मरीज होते हैं. इन्हें डॉक्टर जो मेडिसीन प्रेस्क्राइब करते हैं, वे जन औषधि केंद्र में मिलती ही नहीं है. इसकी वजह से यहां आने वाले मरीजों को खाली हाथ ही लौटना पड़ता है. यही नहीं यहां अभी तक स्किन, सर्जरी, आई और आर्थो की एक भी दवा अवेलेबल नहीं है.

सिर्फ 60 प्रकार की दवा अवेलबल

जनऔषधि केंद्रों में करीब 250 से अधिक दवा मरीजों को कम कीमत पर उपलब्ध कराना है, लेकिन यहां पर सिर्फ 50 से 60 प्रकार की दवा ही उपलब्ध है. इसमें भी ओल्मीसॉल्टन (बीपी), एजेस्टोमाइसीन (एंटीबायोटिक) के अलावा फीवर, पैरासिटामाल, खांसी की सिरप, कार्डिक के अलावा कुछ अन्य दवाएं उपलब्ध हैं. जिले में चार सरकारी हॉस्पिटल समेत करीब 8 जगहों पर जन औषधि केंद्र हैं, जहां पर इसी प्रकार की समस्या बनी हुई है. इससे दूर दराज से आने वाले मरीजों को दिक्कत ज्यादा हो रही है. क्योंकि आर्थिक समस्या के चलते ये महंगी दवा खरीद नहीं सकते.

सर्जिकल सामान भी उपलब्ध नहीं

मंडलीय हॉस्पिटल हो या डीडीयू हॉस्पिटल या फिर रामनगर स्थित लाल बहादुर शास्त्री हॉस्पिटल किसी भी जन औषधि केंद्र में सीरिंज, निडिल, कैथिएटर, कैनोला व ग्लब्स जैसे सर्जिकल का एक भी सामान उपलब्ध नहीं है. यहां पर जो ग्लब्स 10 से 15 रुपए तक में मिल जाता है, वही मेडिकल स्टोर में वह 40 से 70 रुपए तक में मिलता है. इसी प्रकार अन्य सर्जिकल सामान भी दो से तीन गुना अधिक कीमत पर मिलते हैं.

केंद्र को एक लाख की सब्सिडी

केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक जन औषधि केन्द्र को खोलने के लिए सरकार की ओर से लोगों को करीब 2.5 लाख रुपये की सब्सिडी दी जाती है. जन औषधि केंद्र से दवा की होने वाली बिक्री पर 20 प्रतिशत कमीशन दिया जाता है.

इसको कंट्रोल रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय करता है. उनका काम जन औषधि केंद्र के लिए जगह और सुविधाएं उपलब्ध कराना है. अभी यह केन्द्र सब्सिडी के रूप में मिली दवाओं से चल रहे हैं. जब तक खुद के पैसे से दवाएं नहीं खरीदेंगे तो स्टॉक पूरा कैसे होगा.

डॉ. बीएन श्रीवास्तव, एसआईसी मंडलीय हॉस्पिटल

यहां है जन औषधि केन्द्र

मंडलीय हॉस्पिटल -कबीरचौरा

डीडीयू हॉस्पिटल -पांडेयपुर

लाल बहादुर शास्त्री हॉस्पिटल-रामनगर

मेंटल हॉस्पिटल-पांडेयपुर