-सारनाथ में आईपीडीएस वर्क पूरा होने से पहले ही ब्रस्ट हुआ जंक्शन बॉक्स

-तीन माह से खराब पड़ा है जंक्शन बॉक्स, प्रभावित एरिया में ठप है बिजली सप्लाई

-राहत के लिए बगैर मीटर के पोल की डायरेक्ट लाइन से चल रहा काम

सारनाथ का एक एरिया ऐसा भी है जहां बिजली के तारों को अंडरग्राउंड करने की मुहिम में तीन महीने से बिजली गुल है. आईपीडीएस वर्क में फाल्ट के बाद तमाम घरों में करीब तीन महीने से करंट नहीं पहुंच रहा. इससे भी खास बात ये है कि इस फाल्ट को ठीक करने के मसले पर बिजली विभाग और आईपीडीएस वर्क कराने वाली एजेंसी झगड़े में पड़ी है. दोनों ही ये मानने को तैयार नहीं कि फाल्ट ठीक करने की जिम्मेदारी उनकी है.

शुरू होते ही हुआ खराब

आईपीडीएस वर्क के सेकेंड फेज में सारनाथ क्षेत्र में चार माह पहले आईपीडीएस के कई जंक्शन बॉक्स लगाए गए. इनमें से एक जंक्शन बॉक्स काम करने के एक माह बाद ही खराब हो गया, लेकिन इसे ठीक कराने की जिम्मेदारी अब तक किसी अफसर ने नहीं ली. इसकी वजह से इस जंक्शन बॉक्स के दायरे में आने वाले दो दर्जन से ज्यादा घरों की पावर सप्लाई ठप है. अब ये घर बगैर मीटर के पोल से डायरेक्ट लाइन खींच कर घर रोशन करने को मजबूर हैं. फिक्स चार्ज पर इन्हें अनुमति भी मिल गयी है.

एक-दूसरे को ठहरा रहे जिम्मेदार

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस समस्या को लेकर कई बार शिकायत की गई है. लेकिन बिजली विभाग के अधिकारी कहते हैं कि इसे ठीक कराने की जिम्मेदारी उनकी नहीं आईपीडीएस की है. जबकि आईपीडीएस के अफसरों का कहना है कि उन्हें इसे ठीक कराने का पैसा नहीं मिला है. अभी उन्हें सिर्फ इसे लगाने का पैसा मिला है. इसलिए इसे बिजली विभाग ही ठीक कराएगा.

मीटर बाईपास कर जल रही लाइट

आईपीडीएस योजना की हवा यहां के अधिकारी ही निकालने में लगे हुए हैं. पुरानी काशी क्षेत्र में हुए काम के बाद जहां तमाम तरह की समस्याएं आ रही हैं. वहीं सारनाथ में काम पूरा होने से पहले ही समस्याएं आ गई जिसका फायदा सीधे तौर पर उपभोक्ताओं को मिल रहा है. बिजली विभाग और आईपीडीएस से जुड़े अफसरों के बीच आपसी खींचतान के चलते इस एरिया में मीटर बाईपास कर बिजली सप्लाई हो रही है. मीटर में लाइन की सप्लाई न होने से बिजली विभाग उन्हें फिक्स चार्ज पर विद्युत आपूर्ति कर रहा है.

नहीं हो रही खपत की जांच

बिजली विभाग द्वारा उपभोक्ताओं को फिक्स चार्ज वसूलने का मतलब ये है कि सभी समस्याओं की जानकारी होने के बाद भी अधिकारी इसका समाधान करने के बजाए उन्हें बगैर मीटर से विद्युत आपूर्ति कर रहे हैं. अधिकारियों की इस लापरवाही के चलते उपभोक्ता तो मौज काट रहे हैं, लेकिन पावर कॉरपोरेशन को हर माह लाखों का चूना लग रहा है. बता दें कि बगैर मीटर के चलने वाले इस एरिया में लॉन और बड़े-बड़े मकान हैं. जहां बेहिसाब बिजली का इस्तेमाल हो रहा है.

572 करोड़ का है प्रोजेक्ट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2015 में हर घर में 24 घंटे बिजली सप्लाई करने के लिए राष्ट्रीय एकीकृत बिजली विकास योजना (आईपीडीएस) का शुभारंभ किया था. केंद्र सरकार ने इसके लिए 572 करोड़ रुपए की राशि रिलीज की है. लेकिन अफसरों के आपसी लड़ाई में पीएम के इस ड्रीम प्रोजेक्ट को पलीता लग रहा है.

क्या कहते हैं अधिकारी

इस बाबत जब पूर्वाचल विद्युत वितरण निगम के एसई आरडी सिंह को कॉल किया गया तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया और व्हाट्सअप पर बात करने का मैसेज दिया. जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया.

वर्जन

इस समस्या की जानकारी उन्हें नहीं है. अगर कोई उपभोक्ता उनके पास शिकायत लेकर आता है तो उसका इस समस्या का समाधान कर दिया जाएगा.

एसबी वर्मा, चीफ इंजीनियर, आईपीडीएस