-रोटावायरस वैक्सीन को नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में किया गया शामिल

-बच्चों को वैक्सीन की खुराक पिलाकर सीएमओ ने की शुरुआत, गंभीर दस्त के दौरान होगी सुरक्षा

अब जिले के बच्चों की मौत डायरिया जैसी गंभीर बीमारी के कारण नहीं होगी. क्योंकि डायरिया से बच्चों की होने वाली मौत की रोकथाम के लिए रोटावायरस वैक्सीन को नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल कर लिया गया है. इसका शुभारंभ बुधवार को आईएमए भवन में सीएमओ डॉ. वीबी सिंह ने बच्चों को वैक्सीन की खुराक पिलाकर की. उन्होंने बताया कि यह वैक्सीन रोटावायरस के कारण बच्चों को होने वाले गंभीर दस्त के दौरान सुरक्षा प्रदान करेगी. इस मौके पर सीएमओ ने कहा कि हर नवजात को जन्म के छठे, 10वें और 14वें सप्ताह में रोटावायरस वैक्सीन की पांच बूंदें पेंटा-1, 2 व 3 वैक्सीन के साथ पिलाई जाएगी.

यूपी देश का 11 वां राज्य

आईएमए अध्यक्ष डॉ. अरविंद सिंह ने बताया कि अब उत्तर प्रदेश देश का 11वां ऐसा राज्य हो गया है, जो इस रोटावायरस वैक्सीन से बच्चों को पूरी तरह से सुरक्षा प्रदान करेगा. इस वैक्सीन से दस्त के चलते बच्चों की होने वाली मौतों में कमी आएगी. सरकार ने नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में रोटावायरस वैक्सीन को देश में चरणबद्ध तरीके से शामिल किया है. अब तक रोटावायरस वैक्सीन देश के 10 राज्यों, जिनमें हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, असम, राजस्थान, मध्यप्रदेश, तमिलनाडु, त्रिपुरा व झारखंड में सफलतापूर्वक लागू किया गया था.

क्या है रोटावायरस?

रोटावायरस एक अत्यधिक संक्रामक वायरस है, यह बच्चों में दस्त पैदा करने का सबसे बड़ा कारण है जिसके कारण बच्चे को हॉस्पिटल में एडमिट करना पड़ता है. यही नहीं इससे बच्चे की मृत्यु तक हो सकती है.

रोटावायरस के लक्षण

रोटावायरस संक्रमण की शुरुआत हल्के दस्त से होती है, जो आगे गंभीर रूप ले सकता है. पर्याप्त इलाज न मिलने पर शरीर में पानी व नमक की कमी हो सकती है. रोटावायरस संक्रमण से ग्रसित होने पर गंभीर दस्त के साथ-साथ बुखार और उल्टी भी होती है.

क्या कहते हैं आंकड़े

भारत में बच्चों की सबसे अधिक मौतें डायरिया के कारण होती हैं. डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों के मुताबिक भारत में पांच वर्ष तक के बच्चों की होने वाली मौतों में 10 प्रतिशत मौतें डायरिया के कारण होती हैं. भारत में जो बच्चे दस्त के कारण अस्पताल में एडमिट होते हैं उनमें से 40 प्रतिशत बच्चे रोटावायरस संक्रमण से ग्रसित होते हैं. दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों में रोटावायरस होने का खतरा अधिक रहता है. इस दौरान जिला प्रतिरक्षण अधिकारी व अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. वीएस राय, आईएमए के पूर्व अध्यक्ष व सचिव डॉ. संजय राय, डॉ. कार्तिकेय, आईएमए की मानद सचिव डॉ. मनीषा सिंह व विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे.