-सौ साल पुराने राजकीय आयुर्वेद अस्पताल को मिलेगी नई जगह

- संपूर्णानंद संस्कृत यूनिवर्सिटी में शिफ्ट करने की है योजना

- दैनिक जागरण आईनेक्स्ट ने जर्जर हॉस्पिटल से संबंधित खबर को प्रमुखता से पब्लिश किया था

कभी शहर के एकलौते आयुर्वेद अस्पताल में शुमार कबीरचौरा के राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय को लेकर अधिकारियों की नींद टूट गई है. अब इसके अच्छे दिन आने वाले हैं. इसे बेहतर चिकित्सालय बनाने को लेकर कवायद शुरु हो गई है. 70 के दशक से चल रहे इस खंडहरनुमा चिकित्सालय को संपूर्णानंद संस्कृत यूनिवर्सिटी में शिफ्ट करने पर विचार किया जा रहा है. अधिकारियों की मानें तो लंबे समय से अपनी ही हालत पर रो रहे इस अस्पताल को पुन: जीवित करने के लिए राजकीय आयुर्वेद मुख्यालय के उच्च अधिकारियों को प्रस्ताव भेजा जा चुका है.

प्रमुखता से प्रकाशित हुई थी खबर

बता दें कि आयुर्वेद अस्पताल की इस जर्जर हालत को देखते हुए दैनिक जागरण आई नेक्स्ट ने पिछले माह इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था. खबर के माध्यम से बताया गया कि यहां इलाज के लिए आने वाला न सिर्फ मरीज बल्कि यहां तैनात डॉक्टर्स और स्टाफ की जान भी खतरे में है.

क्या कहते हैं अधिकारी

25 बेड के आयुर्वेद हॉस्पिटल को फिर से शुरू करने के लिए इसे संपूर्णानंद संस्कृत यूनिवर्सिटी में शिफ्ट करने की योजना तैयार की गई है. अधिकारियों की मानें तो संपूर्णानंद वीवी में जिस जगह पर राजकीय स्नातकोत्तर आयुर्वेद महाविद्यालय था, उसी जगह पर राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय बनाने को लेकर प्लान बनाया जा रहा है. क्योंकि अब आयुर्वेद महाविद्यालय चौकाघाट स्थित खुद की जमीन पर संचालित हो रहा है. ऐसे में इस खाली जगह पर अस्पताल बनाने के लिए संस्कृत वीवी के प्राचार्य को सहमति देने के लिए पत्र भी लिखा गया है. सहमती मिलते ही इस काम शुरु कर दिया जाएगा.

40 से 50 मरीज रोज

कबीरचौरा स्थित दो बड़े अस्पतालों के बगल में बने इस जर्जर अस्पताल में आज भी रोजाना 40 से 50 मरीज आते हैं, जहां उनकी सरकारी पर्ची भी कटती है इलाज भी किया जाता है, पर उन्हें एडमिट नहीं किया जाता. वजह कि इमारत कभी भी गिर सकती है. इसलिए यहां कोई भी मरीज 10 मिनट से भी ज्यादा रुकना नहीं चाहता.

25 बेड का है अस्पताल

यह हॉस्पिटल 25 बेड का है. पर इसकी इमारत एकदम जर्जर हो गयी है. अस्पताल की दूसरी मंजिल बेहद डरावनी है. कहने को यह मरीजों को एडमिट करने वाला वार्ड है, लेकिन वर्तमान में एक भी बेड ऐसा नहीं है जिस पर मरीज को लिटाया जा सके. फर्श टूटकर गिर रहा है, पैर रखते ही कब कौन सा हिस्सा गिर जाए कुछ कहा नहीं जा सकता. इस कारण यहां पर वर्ष 2000 के बाद कोई भी मरीज एडमिट नहीं किया गया.

इस अस्पताल को लेकर विभाग गंभीर है. इसको लेकर डायरेक्टर को प्रपोजल तैयार कर भेजा गया है. साथ ही संस्कृत वीवी के प्राचार्य को भी इस संदर्भ में पत्र लिखा गया है.

डॉ. बद्री प्रसाद, जिला आयुर्वेद व यूनानी अधिकारी