- आरटीओ की जांच में कई एंबुलेंस को माल और सवारियां ढोते हुए पकड़ा गया

- रोड टैक्स फ्री होने का एम्बुलेंस संचालक उठा रहे हैं फायदा

सामान्य वाहनों की कैटेगरी से बाहर होकर आरटीओ से सुविधा पा रहे एम्बुलेंस संचालक सरकारी विभाग को चूना लगा रहे हैं. मानवता की सेवा के लिए इस्तेमाल आने वाले एम्बुलेंस को परिवहन विभाग ने रोड टैक्स से बाहर किया है. इनसे किसी प्रकार का कोई टैक्स लेने का प्रावधान नहीं है, लेकिन यहां एम्बुलेंस मरीजों के साथ माल की ढुलाई भी कर रहे हैं. इसका खुलासा आरटीओ की जांच में हुआ. जांच में कई एंबुलेंस माल और सवारियां ढोते हुए पकड़े गये. इन पर कार्रवाई की गयी.

इस तरह हुआ खुलासा

अधिकारियों की माने तो जन सेवा के नाम पर आरटीओ से जारी होने वाले एम्बुलेंस का रजिस्ट्रेशन और रोड टैक्स दोनों ही माफ होता है. इसलिए इन पर विभाग की ज्यादा नजर नहीं होती, लेकिन पिछले दिनों आरटीओ में पंजीकृत वाहनों में करीब आधे वाहनों की जांच की गई. जिसमें 10 फीसदी ऐसे वाहनों का चालान किया गया. जिसमें मरीज के बजाए सामान मिले.

15 से 20 हजार का फायदा

सोचने वाली बात ये है कि जब 50 फीसदी वाहनों की जांच में ऐसे एम्बुलेंस आए हैं तो पूरे में कितने आएंगे. यही नहीं मामले की गंभीरता को देखते हुए आरटीओ की ओर से जनवरी में सात एम्बुलेंस संचालकों को नोटिस भीे भेजी गई है. बता दें कि वर्तमान में आरटीओ में करीब 550 गाडि़यां एम्बुलेंस के तौर पर रजिस्टर्ड है.

एक तरफ जहां एम्बुलेंस संचालक टैक्स छूट का लाभ ले रहे है, वहीं ये मरीजों से भी अच्छी खासी कमाई कर रहे हैं. अस्पताल से घर या वहां से अस्पताल लाने के लिए एम्बुलेंस संचालक 4 से 7 किमी दूरी के लिए 600 से एक हजार रूपए तक चार्ज करते हैं.

203 वाहनों की जांच

अधिकारियों की मानें तो पिछले दिनों कुल 203 एम्बुलेंस की जांच की गई थी, जिसमें 23 वाहनों का चालान काटने के साथ 11 वाहनों को बंद कर दिया गया था. उन्होंने बताया कि जब भी एम्बुलेंस की जांच की जाती है तब उन वाहनों में कोई न कोई अजनबी बैठा मिलता, पूछने पर बताते हैं कि मरीज है, लेकिन हुलिया मरीज जैसा नहीं लगता. इससे यह समझना भी मुश्किल हो जाता है कि वे सवारी बैठाकर ले जाते हैं या मरीज.

एक नजर

203

वाहन की हुई जांच

23

का किया चालान

11

वाहन किए गए बंद

पिछले दिनों हुए जांच में एम्बुलेंस में मरीज के बजाए सामान व सवारियां देखी गई थी, जिसके बाद उनका चालान किया गया.

राजीव कुमार, आरटीओ प्रवर्तन