-निगम में एक बार दर्ज बच्चे के नाम को चेंज कराने वालों को झेलनी पड़ सकती है मुसीबत

-नियमों के मुताबिक नाम चेंज होने की बजाय जुड़ जाएगा नए नाम से

बच्चे को आप प्यार में गोलू-मोलू बुलाते हैं तो इसे पुकारने तक ही रखिएगा. इसे बर्थ सर्टिफिकेट में दर्ज नहीं कराइएगा. अगर इस नाम तो कभी चेंज करना पड़ा तो बहुत पापड़ बेलना पड़ेगा. तब भी नाम बदल नहीं सकेगा है. नगर निगम में कई मामले आए हैं जिनमें बच्चें के जन्म के एक साल बाद किसी कारणवश नाम चेंज कराने में फरियादियों को बहुत परेशानी झेलनी पड़ी फिर भी पुराना नाम नहीं बदला जा सका.

नाम के आगे लगेगा उर्फ

साल 2015 में सरकार की गाइडलाइन के तहत अगर कोई व्यक्ति अपने बच्चे का नाम एक साल दर्ज करा दिया है और उसके बाद उसका नाम चेंज कराने जाता है तो वह पुराना नाम नहीं हटवा सकता. बर्थ सर्टिफिकेट में बच्चे के नए नाम के साथ उर्फ लिखकर पुराना नाम भी जुड़ा रहेगा. यह गाइड पुरानी होने के बावजूद कम लोगों को इसके बारे में पता है. इसकी वजह से ढेरों लोग बच्चों का नाम बदलने के लिए आवेदन कर रहे हैं.

एक साल सोचने का मौका

नगर निगम अधिकारियों की मानें तो तीन साल पहले ही यह नियम लागू हो चुका है. बावजूद इसके लोग अभी भी अपने बच्चें का दो नाम रखकर समस्या बढ़ा रहे है. पहले मां-बाप अपने बच्चों को दो नाम रखते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है. नगर निगम की ओर से पैरेंट्स को एक साल तक का समय दिया जाता है कि वे सोच समझकर अपने बच्चे का नाम रखें ताकि इस तरह की समस्या का सामना न करना पड़े.

नामकरण न होने से बढ़ रही मुसीबत

बर्थ सर्टिफिकेट बनाने वाले कर्मचारियों की माने तो पिछले एक साल में 100 से ज्यादा ऐसे मामले आए है, जिनमें पुराना नाम हटाकर नए नाम जोड़ना था. नाम बदलने के पीछे मकसद ये है कि कई लोगों ने बच्चे का नाम उसके जन्म के दौरान ही जो मन में आया रख दिया. बच्चे के बड़े होने पर उसका नाम बदलना चाहते हैं और निगम में अर्जी लगा देते है. इससे में निगम कर्मचारियों को परेशानी होती है. नए आवेदन के साथ नाम सुधार वाले आवेदन की भीड़ से समय से काम नहीं हो पाता है.

बच्चे के जन्म के कुछ दिन बाद ही उसका जन्म प्रमाण पत्र बनवाने वाले पैरेंट्स से यही कहा जाता है कि वे सोच समझकर ही बच्चे का नाम दर्ज कराए. इसके बाद उसका नाम नहीं बदला जा सकता.

डॉ. एके दूबे, नगर स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम