असि नदी को नई पीढ़ी नाला के रूप में जानती थी. एक वक्त में नदी के रूप में बहने वाली असि गंदगी की वजह से नाले में परिवर्तित हो गयी थी. लेकिन अब फिर नदी का रूप लेने लगी है. नगर निगम व पुणे की संस्था वर्टीव एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड सहित सेरी व जीडब्ल्यूआरपीएल की मदद से असि नदी का उद्धार हो रहा है. यही नहीं नदी के किनारों को हरा-भरा करने की तैयारी भी है. इसके तहत संकटमोचन पुलिया के पास नदी के किनारे हर्बल गार्डेन का खाका खींचा गया है.

बैक्टीरिया के जरिए साफ हुआ असि नदी का पानी

-पुणे की कंपनी ने नाला से फिर बदला नदी में

-किनारों पर फैलायी जा रही हरियाली

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असि नदी के दिन बदलने लगे हैं. कंदवा से अस्सी तक बैक्टीरियल बायोरिमेडिएशन टेक्निक की ऐसी धारा बही कि नदी के पानी से अब दुर्गध नहीं आ रहा है. नदी के साथ ही किनारों किनारे भी खूबसूरत बनाए जा रहे हैं. हर तरफ हरियाली बिखेरी जा रही है. नगर निगम व पुणे की संस्था वर्टीव एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड सहित सेरी व जीडब्ल्यूआरपीएल की मदद से अस्सी नदी का उद्धार हो रहा है. सीएसआर फंड से हुए कायाकल्प के बाद संकटमोचन पुलिया के पास नदी के किनारे हर्बल गार्डेन का खाका खींच दिया गया है. संकटमोचन पुलिया से रविंद्रपुरी पुलिया के बीच नदी किनारे के हिस्से में हर्बल गार्डेन बनाया जाएगा. गार्डेन को लेकर डिजाइन भी तय कर दी गई है.

फिल्टर हो रहा पानी

कंदवा से अस्सी तक लगभग छह जगहों पर ग्रीन ब्रिज लगाए गए हैं. जो पानी को साफ करने में सहायक साबित हो रहे है. बायोरिमेडिएशन तकनीक के तहत ऐक्टिवेटेड माइक्रोब्स नदी के पानी में मौजूद प्रदूषकों जैसे तेल, व आर्गेनिक मैटेरियल खा लेते हैं. छह ग्रीन ब्रिज कंदवा, डीएलडब्ल्यू, सुंदरपुर, संकटमोचन, रविदास पार्क व गंगा में गिरने वाले स्थान पर लोहे के ग्रील लगाए गए हैं. इनके अंदर खास प्रकार के बैक्टीरिया रखे गए हैं. बैक्टीरिया इन-सीटू प्रक्रिया के तहत पानी में दोगुने संख्या में बढ़ते हैं. सीवेज के ट्रीटमेंट में ये बैक्टीरिया महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और किसी प्रकार की कोई गंध नहीं छोड़ते है. इसके जरिए भारी धातु और जहरीले रसायन जैसे प्रदूषक कम हो जाते है. जिससे 70 से 80 प्रतिशत गंदा पानी शोधित होता है.

नहीं रखता कोई नाक पर रूमाल

2017 में बनारस घूमने आए बीएचयू के एलुमनी सुनील खन्ना ने अस्सी नदी की दुर्दशा देखी तो उनसे रहा नहीं गया. जिस तरह पब्लिक अस्सी नदी के पास से गुजरते समय नाक पर रूमाल रखती है ठीक उसी तरह उन्होंने भी नाक पर रूमाल रख लिया. हालांकि यह प्रण किया कि अस्सी नदी के इस हालत में बदलाव जरूर करेंगे. वर्टीव एनर्जी इंजीनियरिंग लिमिटेड कंपनी के अध्यक्ष सुनील खन्ना ने अपने डायरेक्टर को प्रस्ताव बनाकर दिया और सीएसआर फंड के तहत अस्सी नदी के कायाकल्प को धन मुहैया कराया. कार्यदायी संस्था को जुलाई 2018 में काम सौंपा गया और दिसंबर 2018 में काम पूरा भी कर लिया गया. खास बात कि पानी को साफ करने में किसी भी प्रकार का कोई केमिकल यूज नहीं किया गया.

साल भर तक देखभाल

कंदवा से लेकर अस्सी तक नदी की देखभाल की जिम्मेदारी भी वर्टीव ने उठा रखी है. नदी किनारे सुंदरता को बढ़ाने और नदी में गंदगी पर रोक लगाने को लेकर संस्था ने अपना रूख तय कर दिया है. इसके लिए बकायदा आधा दर्जन से अधिक कर्मचारियों की तैनाती भी की गई है. नदी के कायाकल्प में ग्रीन वाटर रेवूलेशन के एमडी यशवंत कुलकर्णी व सेरी के सीईओ स्याली जोशी का योगदान प्रमुख है.

अस्सी नदी की दुर्दशा देखने के बाद मन बहुत मर्माहित हुआ. तय किया नदी का कायाकल्प करके ही दम लिया जाएगा. छोटी सी शुरूआत हुई तो असर बड़ा देखने को मिला. आगे भी नदी की सुंदरता के लिए कई योजनाएं तैयार की गई हैं.

सुनील खन्ना, अध्यक्ष

वर्टीव एनर्जी लिमिटेड कंपनी