-मैग्नेटिक स्ट्रिप वाले एटीएम कार्ड हुए ब्लॉक,

-नये एटीएम कार्ड मिलने में हो रही देरी, रोजाना बैंकों में हो रही किचकिच

इन दिनों शहर के बैंकों में भीड़ बढ़ गई है. ये भीड़ रुपयों के लेन-देन को लेकर नहीं बल्कि माइक्रो चिप में माइग्रेट होकर मिलने वाले एटीएम कार्ड के लिए जुट रही है. शहर की आधी से अधिक आबादी के पास पुराने मैग्नेटिक स्ट्रिप वाले एटीएम कार्ड हैं. बैंकों की ओर से इन्हें 30 मई से ब्लॉक कर दिया गया है. नये माइक्रो चिप वाले एटीएम कार्ड कस्टमर्स को डिलेवर तो रहे हैं लेकिन उनकी रफ्तार काफी धीमे है. परेशान पब्लिक बैंक पहुंच रही और वहां भी नए कार्ड नहीं मिल रहे हैं. इसके चलते बैंक कर्मियों व कस्टमर्स में खूब किचकिच हो रही.

नहीं मिल रहा पता

बैंकों की ओर से तर्क यह दिया जा रहा है कि नए एटीएम कार्ड कस्टमर्स को डोर-टू-डोर डिलेवर किए जा रहे हैं. सिर्फ उनके पास एटीएम नहीं पहुंच पा रहा है जिन्होंने केवाईसी फार्म भरते समय एड्रेस पूरा शो नहीं किया था. एटीएम कार्ड डिलेवर करने की जिम्मेदारी एक कूरियर कंपनी को सौंपी गई है. यदि एड्रेस में जरा सी भी गड़बड़ी है तो कूरियर कंपनी चिप वाले एटीएम डिलेवर नहीं करके सीधे बैंकों को भेज दे रही हैं. बैंकों में पहुंचकर कस्टमर्स अपना नया एटीएम कार्ड रिसीव कर रहे हैं लेकिन इसकी रफ्तार बहुत धीमे हैं.

पुराने कार्ड अनसेफ

बैंकों की ओर से कस्टमर्स को माइक्रो चिप लगा हुआ एटीएम कार्ड अवेलेबल कराने का उद्देश्य हैकर से बचाना है. इसलिए पुराने एटीएम कार्ड के बदले फ्री में नया माइक्रो चिप लगा हुआ एटीएम कार्ड दिया जा रहा है ताकि किसी प्रकार की धोखाधड़ी व गड़बड़ी न हो. चूंकि इन दिनों एटीएम कार्ड धोखाधड़ी की शिकायतें लगातार आ रही हैं. कारण है ब्लैक स्ट्रिप (मैग्नेटिक पट्टी) वाले पुराने एटीएम कार्ड की क्लोनिंग आसानी से हो सकती है. शहर के 39 बैकों की लगभग साढ़े चार सौ ब्रांचेज में लगभग 25 लाख से अधिक खाताधारक है. जिनके पैसों की सिक्योरिटी के लिए अब चिप वाले कार्ड जारी किए जा रहे हैं.

आसान है क्लोनिंग

एक्सप‌र्ट्स की मानें तो पुराने एटीएम कार्ड की मैग्नेटिक स्ट्रिप में खातेदार की सभी जानकारी होती है. कार्ड स्वाइप करने पर मशीन सारी जानकारी जुटा लेती है. साइबर क्रिमिनल एटीएम व स्वाइप मशीन के आसपास एक्स्ट्रा डिजिटल डिवाइस लगाते हैं. जिसे फिक्स करने की जरूरत नहीं होती है. स्वाइप होने के बाद मशीन में बटन के पास माइक्रो कैमरे लगाते हैं, जिससे पिन पता चल जाता है. ट्रांजेक्शन पूरा होते ही अपराधी डिजिटल डिवाइस को कम्प्यूटर सिस्टम से जोड़ते हैं और एटीएम कार्ड का सीक्रेट नंबर हासिल कर क्लोन कार्ड पर चढ़ा देते हैं. कैमरे से पिन ले लेते हैं.

पहले थोड़ी परेशानियां थी लेकिन अब प्राब्लम दूर हो गयी है. कूरियर कंपनी की ओर से चिप वाले कार्ड की डिलेवरी अब तेज हो गई है. दो-तीन दिन के अंदर में ब्लॉक एटीएम के बदले चिप वाले एटीएम कार्ड अवेलेबल हो जाएंगे.

मिथिलेश कुमार, लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर यूबीआई

इन बैंकों में लंबी कतार

यूनियन बैंक, एसबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा, इलाहाबाद बैंक, एचडीएफसी, यूको बैंक आदि में भीड़ बढ़ी है. यही नहीं, इनके एटीएम भी बदले जा रहे हैं.

एक नजर

550

एटीएम हैं डिस्ट्रिक्ट में

125

यूबीआई के एटीएम

138

एसबीआई के एटीएम

287

अदर बैंक के एटीएम

70

परसेंट पब्लिक करती है एटीएम यूज