-देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालु आस्था की खिचड़ी लेकर पहुंचे मंदिर

-एक माह तक चलने वाले खिचड़ी मेले और मनोरंजन के साथ बच्चे उठाएंगे झूलों का लुत्फ

- खाजा-खजला, मिठाई, श्रृंगार व अन्य जरूरत के सामानों से पटा मंदिर परिसर

GORAKHPUR@inext.co.in
GORAKHPUR: मकर संक्रांति पर देश व विदेशों से आस्था की खिचड़ी लिए श्रद्धालु गोरखनाथ मंदिर पहुंच चुके हैं। मंगलवार सुबह से देर रात तक लाखों श्रद्धालु खिचड़ी चढ़ाएंगे। मंदिर प्रशासन व जिला प्रशासन की तरफ से तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। मंदिर के पट खुलते ही सुबह 3.30 बजे ब्रह्म मुहूर्त में बाबा गोरखनाथ को सबसे पहले सीएम व गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ खिचड़ी चढ़ाएंगे। उसके बाद नेपाल नरेश की खिचड़ी बाबा के चरणों में अर्पित की जाएगी।

खिचड़ी के रूप में मनाया जाता है मक संक्रांति
मकर संक्रांति मुख्य रूप से सूर्योपासना का पर्व है। इस दिन गोरखनाथ मंदिर सहित देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों पर भारी भीड़ स्नान केसाथ दान-पुण्य करने के लिए जुटती है। हिन्दू धर्म में मकर संक्रांति के पुण्यकाल में स्नान-दान, जप-होम आदि शुभ कार्यो के लिए अच्छा समय माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस संक्रांति के पुण्यकाल में किया गया दान, दाता को सौगुना होकर प्राप्त होता है। सूर्य देवता इस दिन दक्षिणायण से उत्तरायण होकर विशेष फलदायक हो जाते हैं। शास्त्रों में उत्तरायण की अवधि को देवताओं का दिन बताया गया है। इस दृष्टि से मकर संक्रांति देवताओं का प्रभातकाल सिद्ध होता है। उत्तर भारत में यह पर्व खिचड़ी संक्रांति के रूप में मनाया जाता है। जबकि, दक्षिण भारत में पोंगल, पश्चिम बंगाल में तिलुवा संक्रांति और पंजाब में लोहिड़ी के रूप में मनाने की प्रथा है।

सुरक्षा के लिए है चाक चौबंद व्यवस्था
गोरक्षनाथ मंदिर परिसर में पूरी आस्था के साथ खिचड़ी चढ़ाने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए चाक-चौबंद व्यवस्था की गई है। प्रशासनिक व पुलिस के आलाधिकारियों ने सुरक्षा की कमान संभाल ली है। मंदिर परिसर की हर गतिविधि को सीसीटीवी कैमरे में कैद किया जाएगा। एक हजार स्वयंसेवकों व मंदिर के सेवक को नियंत्रित करने और व्यवस्था संभालने के लिए अपना सहयोग दे रहे हैं। भक्तजनों द्बारा खिचड़ी चढ़ाने का सिलसिला दिन-रात चलेगा।

दूसरे स्टेट्स से भी आए श्रद्धालु
योगी आदित्यनाथ के सीएम बनने के बाद मंदिर में खिचड़ी चढ़ाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या इस बार बढ़ चुकी है। इस बार नेपाल सहित अन्य देशों के साथ देश की राजधानी दिल्ली, मुंबई व अन्य राज्यों बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, गुजरात, उड़ीसा, पंजाब से बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने के लिए श्रद्धालु आ चुके हैं। दूर-दराज से आए इन श्रद्धालुओं और बच्चों के लिए मनोरंजन का भी मेले में भरपूर लुत्फ उठाया जा सकता है। मंदिर परिसर में खाजा-खजला, मिठाई और श्रृंगार के साथ अन्य जरूरत के सामानों की दुकानें बरबस ही लोगों को आकर्षित कर रही हैं।

चलती चली आ रही है परंपरा|
पौराणिक मान्यता है कि बाबा गुरु गोरक्षनाथ भगवान शिव के अंशज अवतार थे। वह एक बार हिमांचल के कांगण नामक क्षेत्र से विचरण करते हुए जा रहे थे। अभी वह च्वाला देवी के धाम के पास से गुजर रहे थे कि च्वाला देवी ने प्रकट होकर धाम में आतिथ्य स्वीकार करने का आग्रह किया। उनके आग्रह पर ही वह भिक्षा मांगते हुए यहां पर आए और तप करने लगे। तभी से उन्हें खिचड़ी चढ़ाने की परम्परा अनवरत चली आ रही है।

देवी-देवताओं के मंदिर हैं आस्था का केंद्र|
|गोरखनाथ मंदिर परिसर के भीतर अन्य देवी-देवताओं के मंदिर भी लोगों की आस्था का केंद्र है। नाथ सम्प्रदाय के सभी ब्रह्मलीन संतों को देखकर ऐसा प्रतीत है, जैसे आज भी वह सैकेड़ों वर्षो से तप कर रहे हैं.

भीम सरोवर करेगा इस बार आकर्षित|
करोड़ों की लागत से गोरखनाथ मंदिर में बना भीम सरोवर श्रद्धालुओं को काफी आकर्षित करेगा। शाम होते ही लाइट एंड साउंड सिस्टम से श्रद्धालुओं को बाबा गोरखनाथ का दर्शन होगा। वहीं भीम सरोवर के आसपास का मनोरम दृश्य लोगों के लिए त्रेता युग की गाथा का प्रतीक होने के साथ उनकेमनोरंजन का का भी केंद्र होगा।

खाजा खजला समेत झूले का लेंगे लुत्फ|
मंदिर में दर्शन करने आने वाले वाले श्रद्धालुओं को जहां दर्शन के बाद खाजा खजला के स्टाल पर स्वाद लेने का मौका मिलेगा। वहीं मंदिर में लगाए गए बड़े और छोटे झूले बच्चों समेत बड़ों को आकर्षित करेंगे। साथ ही साथ मौत का महिलाओं के खरीदारी करने के लिए दुकानें सजाई गई हैं।