नगर निगम के बाबू ने बिना अधिकारियों की स्वीकृति के जारी किया वर्क ऑर्डर

लेखाधिकारी ने पकड़ी फाइल, रोका पेमेंट

Meerut. नगर निगम में एक बाबू ने ही तीन कार्यो के लिए तकरीबन सवा तीन लाख रुपये का वर्क ऑर्डर जारी कर दिया. इसके बाद जब फाइल पेमेंट के लिए अकाउंट विभाग में पहुंची तो अधिकारियों में खलबली मच गई. हालांकि, लेखाधिकारी ने इस मामले में आपत्ति जताकर पेमेंट करने से इंकार कर दिया.

जलकल विभाग का मामला

दरअसल, नगर निगम के जलकल विभाग में तैनात एक बाबू ने हैंडपंप की मरम्मत के लिए 95 हजार रुपये के दो टेंडर और ट्यूबवेल की मरम्मत के लिए 1.25 लाख रुपये का एक टेंडर जारी किया. कुल मिलाकर बाबू ने बिना अधिकारियों की स्वीकृति के तीन टेंडर जारी किए. इसके बाद जलकल विभाग के बाबू ने ही संबंधित ठेकेदार को वर्क ऑर्डर भी जारी कर दिया. उस वर्क आर्डर पर न तो जीएम जलकल और न ही वहां के दूसरे अधिकारियों ने ध्यान दिया.

पहले भी आए मामले

वैसे, जलकल विभाग में यह कोई नया मामला नहीं है. इससे पहले भी कई घोटाले जलकल विभाग के सामने आ चुके हैं. जिसमें हैंडपंप की मरम्मत, ट्यूबवेल की मरम्मत, जैसे कार्यो में गोलमाल किया गया था. हैरत की बात यह है कि नगर निगम में आज तक किसी भी कर्मचारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है. लेकिन इस बार नगर निगम के जलकल विभाग के बाबू द्वारा वर्क ऑर्डर जारी करने पर कार्रवाई हो सकती है. कारण लेखाधिकारी ने नगर आयुक्त से मामले की शिकायत की है.

मामला संज्ञान में आया है. संबंधित विभाग का विभागाध्यक्ष ही वर्क आर्डर जारी कर सकता है. विभागाध्यक्ष से पूछा जाएगा कि बाबू ने आखिरकार वर्क ऑर्डर कैसे जारी किया. मामले की जांच कर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी.

मनोज कुमार चौहान, नगर आयुक्त