-सीडब्ल्यूसी के मजिस्ट्रेट की तहरीर पर दर्ज हुई एफआईआर

BAREILLY: किला के खन्नू मोहल्ला में इल्लीगल तरीके से 3 वर्षीय बच्चे आरुष को रखने के मामले में सैटरडे किला पुलिस ने अपहरण और बच्चे को गलत तरीके से रखने के आरोप में डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल के फोर्थ क्लास इम्प्लॉयी दिनेश कुमार और बच्चे को रखने वाले सोनू के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. पुलिस ने सीडब्ल्यूसी के मजिस्ट्रेट डॉ. डीएन शर्मा की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज की है. मजिस्ट्रेट ने इस मामले में एसएसपी से शिकायत की थी. अब पुलिस दिनेश कुमार को पकड़कर पूछताछ करेगी, कि उसने किसका बच्चा लेकर सोनू को दिया था. वहीं तीन वर्ष पालने के बाद बच्चा चले जाने से सोनू व उसकी पत्‍‌नी परेशान हैं. वहीं प्रेमनगर में बच्चे को जबरन रखने के मामले में पुलिस ने बच्चा मां के सुपुर्द करा दिया है.

22 मार्च 2015 को लिया बच्चा

बता दें कि 26 जुलाई को चाइल्ड लाइन ने शिकायत मिलने पर खन्नू मोहल्ला से सोनू के घर से आरुष को छुड़ाया था. बच्चे को सीडब्ल्यूसी के सामने पेश किया गया था. जहां बच्चे की काउंसिलिंग के बाद उसे वॉर्न बेबी फोल्ड में भेज दिया गया था. सोनू ने पूछताछ में बताया था कि उसने 22 मार्च 2015 को 60 हजार में बच्चा डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल के कर्मचारी दिनेश से लिया था. जिसके बाद उसने बच्चे को पाला था और उसके नाम प्रॉपर्टी भी दी थी. इस मामले में एएचटीयू ने फ्राइडे को महिला डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में जाकर सीएमएस से वर्ष 2015 में पैदा हुए बच्चों का रिकॉर्ड तलब किया था.

बच्चों के केस में पुलिस सुस्त

बरेली में बच्चों के खोने या फिर चोरी होने के मामले लगातार सामने आते रहते हैं, लेकिन पुलिस इन मामलों में हीलाहवाली करती है. पहले तो पुलिस गुमशुदगी देर में दर्ज करती है और परिजनों से कह देती है कि वह बच्चे को देखें कि कहीं आसपास ही घूम रहा होगा. उसके बाद उनसे लंबी प्रोसेस के बहाने में एफआईआर दर्ज करते हैं. इतने में काफी देर हो जाती है और फिर बच्चे को तलाशने में काफी देर हो जाती है. इस संबंध में डीजीपी ने एक महीने पहले बच्चों के अपहरण में तुरंत कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं.

एएचटीयू करेगी बच्चों के केस की जांच

डीजीपी ने सभी जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जो भी बच्चा 3 वर्ष से 8 वर्ष की उम्र का है और उसका गायब होने के 4 महीने के अंतराल में भी पता नहीं चल सका है. ऐसे केस तुरंत एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट में ट्रांसफर हो जाएंगे और यही इनकी विवेचना होगी. हालांकि बरेली में अभी कोई भी केस एएचटीयू में बच्चे का नहीं ट्रांसफर हुआ है, जबकि बरेली में वर्ष 2006 से 31 मई 2018 तक 10 बच्चे इसी उम्र के हैं, जिनका सुराग नहीं लग सका है. इनमें से तीन बच्चे वर्ष 2017 से अब तक के हैं.