- गंगाघाट क्रॉसिंग पुल के 2 हिस्सों में रखे हैं बड़े-बड़े गार्टर, जो कभी भी गिर सकते हैं, बिना बोल्ट लगाए ही डाल दी बीम

- गार्टर रखे पुल के ठीक नीचे से होकर गुजरता है ट्रैफिक, पुल के ऊपर चल रहा है काम, नीचे गिरता है मलबा

- 2013 में पुल हुआ था पास, अभी तक पूरा नहीं हुआ काम, सड़कों पर फैला मलबा, मंदिर का ऊपरी हिस्सा भी टूटा

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KANPUR : बनारस में हुए हादसे से पूरा देश दुख में डूब गया. हर कोई यही चाहता है कि भगवान न करे कि कहीं पर भी ऐसा दर्दनाक हादसा अपने आपको दोहराए, लेकिन विभागीय लापरवाही के चलते कानपुर में ऐसा हादसा हो सकता है. हम आपको डराना नहीं चाहते हैं, बल्कि हमारा मकसद शहर के सो रहे सिस्टम को जगाना और जनता को जागरूक करना है. क्योंकि विभागीय लापरवाही की सजा सिर्फ आम आदमी को ही भुगतनी पड़ती है. हम बात कर रहे हैं गंगाघाट क्रॉसिंग पर बन रहे कैंट फ्लाईओवर (42 स्पेशल गंगा घाट क्रॉसिंग पुलल) की, क्योंकि बनारस में निर्माणाधीन पुल और कानपुर में बन रहे इस पुल के हालात जुदा नहीं हैं. यहां भी बड़े-बड़े गार्टर महज पिलर पर टिका दिए गए हैं और उसके नीचे से रोजाना हजारों वाहन गुजरते हैं. ऊपर से निर्माण सामग्री अक्सर नीचे गिरती रहती है. निर्माण सामग्री सड़क के हर ओर फैली हुई है और पुल के नीचे दोनों तरफ की लेन चालू है. दैनिक जागरण आई नेक्स्ट की टीम ने पड़ताल की तो लापरवाही खुलकर सामने आ गई.

2015 में होना था पूरा
बनारस में पुल का निर्माण करने वाली संस्था ही कानपुर में भी कैंट ब्रिज का निर्माण कर रही है. यहां भी नियमों को ताक पर रखकर उ.प्र. सेतु निर्माण निगम पुल का निर्माण कर रहा है. कहीं पर भी सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं किया गया है. स्थानीय लोगों भी बताया कि जब से पुल निर्माण शुरू हुआ है छोटे-मोटे हादसे होते रहते हैं. जबकि नियमत: निर्माणाधीन जगह पर रास्तों को ब्लॉक किया जाना चाहिए. गार्टर को कहीं भी इंटरलॉक नहीं किया गया. वहीं जब निर्माण निगम के डीपीओ से इस मामले में बात ही गई तो उन्होंने लापरवाही को स्वीकारते हुए इसे जल्द पूरा करने की बात कही.

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यह परिस्थितियां बनारस जैसी

-निर्माण होने के बावजूद ट्रैफिक को नहीं किया गया डायवर्ट.

-पुल के ऊपरी हिस्से में रखे गार्टर को नहीं किया इंटरलॉक.

-सेतु निर्माण निगम ही बनारस में भी कर रही थी पुल का निर्माण.

-सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर किया जाता रहा काम, निर्माण की चेतावनी का एक बोर्ड तक नहीं लगा.

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जानलेवा 10 लापरवाही..

1. पुल निर्माण के दौरान भी दोनों तरफ से खुला हुआ है ट्रैफिक, अक्सर होते हैं एक्सीडेंट.

2. पुल से अक्सर नीचे गिरती है निर्माण सामग्री, स्थानीय लोगों के मुताबिक कई लोग हो चुके हैं घायल.

3. बिना सुरक्षित किए ही रख दिए गए हैं गार्टर और नीचे से होकर गुजरते हैं हजारों वाहन.

4. बीम को डालने में नहीं लगाए गए नट-बोल्ट, जंग लगी सरिया का किया जा रहा प्रयोग.

5. निर्माणाधीन हिस्से के अगल-बगल नहीं की गई बेरिकेडिंग, पर्यावरण नियमों का भी उल्लंघन.

6. बिना नट-बोल्ट लगाए ही खड़ा कर दिया गया स्ट्रक्चर, निचला हिस्सा गल चुका है.

7. अप्रैल 2015 में पूरा होना था काम, लेकिन निर्धारित समय के 3 साल बाद भी काम पड़ा है अधूरा.

8. बिना सुरक्षा मानकों को पूरा किए हो रहा निर्माण, पुल के नीचे मंदिर का गुंबद भी टूटा.

9. पुल के अगले हिस्से में चल रहा है खुदाई का काम, लेकिन निर्माणाधीन जगह पर घूम रहे जानवर व बच्चे.

10. बीम के नीचे लगाए गए सुरक्षा जाल टूटे हैं, इससे कोई भी हिस्सा गिरेगा तो सीधे जमीन पर आएगा.

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प्रोजेक्ट डिटेल

पास हुआ वर्ष 2012 में

लंबाई 849 मीटर

चौड़ाई 2 लेन

काम शुरू हुआ अप्रैल 2013 में

कंप्लीशन टारगेट अप्रैल 2015

प्रोजेक्ट कॉस्ट (ब्रिज कार्पोरेशन) 31.25 करोड़

रेलवे का हिस्सा 700 मीटर

कॉस्ट 3.75 करोड़

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शहर में हो चुके हैं हादसे

-2008 में घंटाघर ब्रिज का टाटमिल तरफ का हिस्सा धंस गया था, 1 महीने तक ब्रिज रहा था बंद.

-2009 में गोविंगपुरी पुल का एक हिस्सा धंस गया था, 1 महीने के लिए पुल बंद किया गया था.

-2010 में दादा नगर पुल पर विजय नगर की तरफ का हिस्सा गिर गया था. मलबा नीचे रेलवे ट्रैक पर भी गिर था. 20 दिन में बंद रहा था टै्रफिक.

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निर्माण जब शुरू हुआ था तब ट्रैफिक डायवर्जन के लिए लिखा था, अब फिर से ट्रैफिक विभाग को लिख दिया जाएगा. सुरक्षा मानकों को पूरा करने के लिए निर्देश दिए जाएंगे. 1 हफ्ते में निर्माण वाली जगह को बैरिकेड कर दिया जाएगा.

-भूपेंद्र कुमार, डीपीओ, उ. प्र. सेतु निर्माण निगम.

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5 साल बाद भी पुल का निर्माण पूरा नहीं हो सका है. गाटर भी ऐसे ही रख दिए गए हैं. बनारस हादसे के बाद अब इनसे डर लगने लगा है.

-अनवार

छोटे-मोटे हादसे तो यहां होते ही रहते हैं. सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं किया जाता है. मजदूरों को निर्माण के दौरान हेलमेट तक पहनने के लिए नहीं दिया जाता है.

-रोहित

पुल पर निर्माण का काम कभी शुरू हो जाता है और कभी पूरी तरह से बंद हो जाता है. हाल ही में एक जानवर नींव के लिए खोदे गए बड़े गड्ढे में गिरा गया था.

-बाबूलाल

हाल ही में आई आंधी के वक्त मैं यही सो रहा था, गार्टर हिलते हुए महसूस हुआ. डर कर मैं दूसरी तरफ भाग गया. इसके बाद मैंने इसके नीचे सोना ही बंद कर दिया.

-कल्लू