बरेली कॉलेज की ये 3 घटनाएं ऐसी थीं, जिन्होंने लास्ट ईयर नैक का ए ग्रेड मिलने की एतिहासिक खुशी को पल भर में हवा कर दिया और एक बार फिर कॉलेज साल भर अपनी अराजकता के चलते मशहूर रहा. नए साल में कॉलेज इस कामना के साथ खुला कि इस बार कैंपस से अराजकता कोसों दूर रहेगी और बात केवल स्टडीज की होगी. सैटरडे को एक बार फिर हुई स्टूडेंट्स की गुंडई ने इसको मिथ्या साबित कर दिया. दो स्टूडेंट्स ने अपने साथियों के साथ कर्मचारियों को जमकर पीटा और लाइब्रेरी में तोडफ़ोड़ की.

ये गुंडई तो थमती नहीं
कॉलेज का लचीलापन व्यवहार और पुलिस की नाकामी ही है जो कॉलेज में गुंडई रुकने के बजाय और बढ़ रही है. कोई मामला होता है उसमें एफआईआर तो दर्ज कराई जाती है, लेकिन पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने के बजाय समझौता करने का वेट करती है. वहीं कॉलेज केवल कागजों पर ही सख्ती की कार्रवाई करती है, जबकि असल में अराजकता फैलाने वाले स्टूडेंट्स खुलेआम कैंपस में घूमते हैं. कहीं न कहीं इस पूरी कार्रवाई से ऐसे छात्रों का हौसला बढ़ता जाता है और भविष्य में भी वे इस तरह के हंगामे में शामिल रहते हैं.

पचड़े में नहीं पडऩा
कैंपस के छात्रगुटों के बीच की आपसी तनातनी के पचड़े में पडऩे से पुलिस हमेशा से बचती आई है. यही वजह है कि हर घटना में संगीन धाराएं लगाने के बाद भी वे किसी भी स्टूडेंट के खिलाफ कार्रवाई करना तो दूर उन्हें पकडऩे तक ही जहमत नहीं उठाती. अब मामला 8 नवम्बर का ही लें. इसमें 18 स्टूडेंट्स के खिलाफ पुलिस ने संगीन धाराएं लगाई थीं. धरपकड़ के लिए दबिश देने का रोना रोया. हकीकत यह है कि वे ही स्टूडेंट्स बेधड़क कैंपस में घूमते नजर आए.

College का दोहरा रवैया
कॉलेज तो हर घटना के बाद कार्रवाई का दंभ तो भरता है लेकिन कुछ ही दिनों में उसके दोहरे रवैया का चेहरा सबके सामने आ जाता है. प्रॉक्टोरियल अपनी तरफ से थाने में तहरीर देकर पीछा छुड़ा लेता है. लेकिन बात जब कड़ी कार्रवाई करने की आती है तो हर बार जांच के नाम पर बैकफुट पर आ जाता है. हकीकत किसी से छिपी नहीं है. जिन स्टूडेंट्स के खिलाफ कार्रवाई की बात होती है वे ही कैंपस में प्रॉक्टोरियल बोर्ड के मेंबर्स के साथ अक्सर गुफ्तगू करते नजर आ जाते हैं. कभी भी कॉलेज ने कड़ी कारवाई कर अराजकता के खिलाफ कोई नजीर नहीं पेश की है.

Politics हावी

कॉलेज पर पॉलीटिक्स किस कदर हावी है इसकी हकीकत तो प्रिंसिपल डॉ. आरपी सिंह ने पिछले वीक में हुए एक फंक्शन में सबके सामने बयां कर दी. उन्होंने साफ लफ्जों में कहा कि कॉलेज में राजनीतिक प्रेशर ज्यादा है. हम किसी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराते हैं उपर से उनके खिलाफ कार्रवाई ना करने के लिए प्रेशर बिल्ड अप होने लगता है. प्रिंसिपल ने अपने कथन में उस असल वजह को सामने रख दी, जिसकी वजह आए दिन कॉलेज में गुंडई होती रहती है. यह राजनैतिक प्रेशर ना केवल पुलिस बल्कि कॉलेज के जिम्मेदारों पर भी रहता है.