- गोरखपुर डिपो पर भिखारियों का आतंक, यात्रियों से पैसे मांगने के बहाने गायब कर देते हैं सामान

- भिखारियों के गैंग पर रोडवेज के जिम्मेदार भी नहीं करते कार्रवाई

केस वन

खोराबार के रहने वाले अमित गोयल लखनऊ जाने के लिए वॉल्वो पकड़ने गोरखपुर डिपो पहुंचे थे. बस छूटने में आधा घंटा था, लेकिन बस का एसी नहीं चलने के कारण वह नीचे उतरे थे. इसी बीच उनका सामान किसी ने चुरा लिया. उनका शक था कि बस में भीख मांग रही एक महिला जो संदिग्ध लग रही थी उसी ने सामान चुराया. जिसकी शिकायत भी की, लेकिन किसी ने सुध नहीं ली.

केस टू

रुस्तमपुर निवासी निशा दुबे अपने परिवार के साथ जनरथ बस से लखनऊ जा रही थीं. गोरखपुर डिपो से उन्होंने बस पकड़ी. इसी बीच एक महिला भिखारी आई. उसने उनके लगेज को छूने का प्रयास किया तो उन्होंने उसेफटकार लगाई. इस पर उसने अपने साथियों को बुला लिया और महिला यात्री से उलझ गई. इसकी शिकायत करने पर भी लेकिन स्टेशन प्रबंधन की तरफ से कोई एक्शन नहीं लिया गया.

GORAKHPUR: गोरखपुर बस डिपो से बस पकड़ने जा रहे हैं तो भिखारी गैंग से सावधान रहिएगा. इन दिनों रेलवे बस स्टेशन पर भिखारियों का ऐसा गैंग एक्टिव है जो भीख मांगने के बहाने पैसेंजर्स के लगेज पर हाथ साफ कर दे रहा है. खासकर ये चोर एसी बसों के पैसेंजर्स को निशाना बना रहे हैं. साथत ही आए दिन यात्रियों संग बदसलूकी करना भी इनके लिए आम बात हो चुकी है. वहीं, सामान चोरी की तमाम शिकायतें सामने आने के बावजूद इन भिखारियों के गैंग के खिलाफ न तो यूपी रोडवेज प्रबंधन की तरफ से कोई ठोस कदम उठाया जाता है और न ही पुलिस ही कोई कार्रवाई कर रही है.

दूसरे शहरों से आने वालों को बनाते हैं निशाना

कहने को ए ग्रेड बस स्टेशन गोरखपुर डिपो भिखारियों का अड्डा बनकर रह गया है. दिल्ली, सूरत, मुंबई आदि शहरों से आने वाले यात्री इन भिखारियों के टारगेट पर रहते हैं. यात्रियों के बस से उतरते ही ये गैंग उन्हें घेर लेता है. मौका मिलते ही यात्री के लगेज पर हाथ साफ कर देते हैं. जबकि पूर्व एआरएम गोरखपुर डिपो महेश चंद्र श्रीवास्तव ने इन भिखारियों को बस स्टेशन परिसर से खदेड़ने के लिए अभियान भी चलाया था, लेकिन उनके जाने के बाद ये गैंग फिर सक्रिय हो गया. सूत्रों की मानें तो स्थानीय पुलिस चौकी और गोरखपुर डिपो प्रबंधन की उदासीनता के चलते इनका बसों में भीख मांगने का धंधा फल-फूल रहा है. अगर किसी ने विरोध किया तो ये उनसे उलझ जाते हैं और मारपीट तक पर उतारू हो जाते हैं.

जिम्मेदार नहीं देते ध्यान

सुबह से लेकर शाम तक साधारण से लकर एसी बसों में घूम-घूमकर भीख मांगने वाले इन भिखारियों के दो दर्जन से ज्यादा अलग-अलग गुट हैं. यहां तक कि इनकी बसें भी बंटी हुई हैं. लेकिन डिपो प्रबंधन को इनको भगाने व बस में भिक्षाटन पर प्रतिबंध लगाने में दिलचस्पी ही नहीं ले रहा.

फैक्ट फाइल .

बस स्टेशन पर घूमते रहते भिखारी - 30

बस की संख्या - 250

रोज आते पैसेंजर - 50,000

एसी बसों की संख्या - 35

वर्जन

बस स्टेशन हो या फिर बस के भीतर अगर भिखारी भीख मांग रहे हैं और उसकी आड़ में यात्रियों के साथ बदसलूकी करते हैं तो स्टेशन इंचार्ज तत्काल इन्हें स्टेशन परिसर से खदेड़ें. अगर वे नहीं ऐसा नहीं करते तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

- डीवी सिंह, आरएम, यूपी रोडवेज