feature@inext.co.in
KANPUR: अंगुलिमाल नाम का एक बहुत बड़ा डाकू था। वह लोगों को मारकर उनकी उंगलियां काट लेता था और उनकी माला पहनता था। इसी से उसका यह नाम पड़ा था। आदमियों को लूट लेना, उनकी जान ले लेना, उसके बाएं हाथ का खेल था। लोग उससे डरते थे। उसका नाम सुनते ही उनके प्राण सूख जाते थे। संयोग से एक बार भगवान बुद्ध उपदेश देते हुए उधर आ निकले।

बुद्धा के पास गया उन्हें मारने
लोगों ने उनसे प्रार्थना की कि वह वहां से चले जाएं। अंगुलिमाल ऐसा डाकू है, जो किसी के आगे नहीं झुकता। बुद्ध ने लोगों की बात सुनी, पर अपना इरादा नहीं बदला। वह बेधड़क वहाँ घूमने लगे। जब अंगुलिमाल को इसका पता चला तो वह झुंझलाकर बुद्ध के पास आया। वह उन्हें मार डालना चाहता था, लेकिन जब उसने बुद्ध को मुस्कुराकर प्यार से उसका स्वागत करते देखा तो उसका पत्थर का दिल कुछ मुलायम हो गया। बुद्ध ने उससे कहा, 'क्यों भाई, सामने के पेड़ से चार पत्ते तोड़ लाओगे?' अंगुलिमाल के लिए यह काम क्या मुश्किल था! वह दौड़कर गया और जरा-सी देर में पत्ते तोड़कर ले आया।

जीवन की व्याख्या करना बंद करके, बस उसका अनुभव कर: सद्गुरु जग्गी वासुदेव

वास्तु टिप्स: उत्तर या पूर्व दिशा में होनी चाहिए घर की बालकनी, जानें किस जगह पर क्या रखें

बुद्ध ने दिया आत्मग्यान तो पिघला दिल
'बुद्ध ने कहा, अब एक काम करो। जहां से इन पत्तों को तोड़कर लाए हो, वहीं इन्हें लगा आओ।' अंगुलिमाल बोला, 'यह कैसे हो सकता है?' बुद्ध ने कहा, 'भैया! जब जानते हो कि टूटा जुड़ता नहीं तो फिर तोडने का काम क्यों करते हो?' इतना सुनते ही अंगुलिमाल को बोध हो गया और वह उस दिन से अपना पेशा छोड़कर बुद्ध की शरण में आ गया।

Spiritual News inextlive from Spiritual News Desk