- सभी प्रमुख बाजार रोज की तरह खुले

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LUCKNOW :

नोट बंदी के विरोध में कुछ राजनीतिक दलों बुलाए गये बंद का राजधानी में कोई असर नहीं दिखा. हालांकि वामदलों द्वारा बंद के आह्वान का प्रदेश की किसी भी प्रमुख पार्टी ने समर्थन नहीं किया था. राजधानी के सभी प्रमुख बाजार रोज की तरह खुले थे. यह बात अलग है कि ग्राहक अभी भी यहां से नदारद ही रहे. वजह बताई जा रही है कैश की किल्लत जो नौ नवंबर से बनी हुई है, लेकिन पहले की तुलना में पहले से बाजारों की स्थिति में थोड़ा सुधार आया है.

राजनीति बर्दाश्त नहीं

व्यापारी नेता सुहैल हैदर का कहना है कि भारत बंद का असर लखनऊ में बिल्कुल भी नहीं रहा. यह बंद पूरी तरह से राजनैतिक दलों की ओर से कॉल किया गया था, इसलिए व्यापारियों ने इसमें हिस्सा नहीं लिया. राजधानी के अमीनाबाद, नक्खास, चौक, भूतनाथ और आलमनगर मार्केट रोज की तरह खुली रहीं. हजरतगंज में भी इसका कोई असर नहीं रहा. ना सिर्फ लखनऊ में बल्कि आसपास के जिलों में भी कोई असर नहीं दिखा.

प्रमुख सियासी पार्टियों रहीं दूर

प्रदेश की प्रमुख सियासी दल भी इस बंद से दूर रहे. कांग्रेस ने एक दिन पहले ही खुद को बंद से अलग करने की बात कही थी, जबकि सपा और बसपा दोनों ही पहले से बंद से दूर थे. यही वजह थी कि प्रदेश में बंद को लेकर कोई इफेक्ट नहीं दिखा. वहीं नोटबंदी का फेवर कर रहे संगठनों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों ने दो घंटे अधिक दुकानें और बाजार खोलने का दावा किया था.

नोटबंदी की दुश्वारियां फौरी

लखनवाइट्स का है कि इसमें भारत बंद की कोई जरूरत नहीं है. नोटबंदी का जो भी असर दिख रहा है वह फौरी है. आने वाले दिनों में इसके बेहतर परिणाम होंगे. ना सिर्फ सामान सस्ते होंगे बल्कि भ्रष्टाचार और कालेधन पर भी लगाम लगेगी. प्रधानमंत्री ने भी लोगों से 50 दिन मंागे हैं. ऐसे में जनता को 50 दिन का समय देने में बुराई नहीं है. कहा यह भी जा रहा है कि नोटबंदी से ना सिर्फ देश का लाभ होने वाला है, बल्कि आने वाले दिनों में महंगाई काफी कम होगी.

किसी राजनैतिक दल के इशारे पर हम लोग अपने प्रतिष्ठान क्यों बंद रखें? नोट बंदी पर नफा नुकसान का आकलन किया जा रहा है. आगे की रणनीति बाद में तय करेंगे.

- सुहैल हैदर

महामंत्री, लखनऊ व्यापार मंडल.