- फ्रांस से आई 10 हजार पेयर भीमल स्लीपर्स की डिमांड

- उद्योग विभाग की हिमाद्री विंग कर रही मार्केटिंग

- भीमल के रेशे से महिलाएं तैयार कर रही हैं स्लीपर

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DEHRADUN : उत्तराखंड में तैयार की जा रही भीमल की स्लीपर दुनिया में छाने को तैयार हैं. फ्रांस से 10 हजार पेयर भीमल स्लीपर्स की डिमांड उत्तराखंड को मिली है. 4 हजार पेयर स्लीपर फ्रांस को एक्सपोर्ट भी कर दी गई हैं. जबकि बाकी तैयार की जा रही हैं. यही नहीं राज्य में रिंगाल, जूट, कंडाली (बिच्छू घास) और कॉपर से तैयार प्रोडक्ट्स की डिमांड बढ़ने लगी है. इनकी ऑनलाइन सेल के लिए भी उद्योग विभाग तैयारी कर रहा है. उत्तराखंड की कॉटेज इंडस्ट्री के लिए ये उत्साहित करने वाली खबर है.

ऑनलाइन बिक्री के लिए अमेजॉन से एमओयू
राज्य में छोटे-छोटे समूहों द्वारा भीमल, रिंगाल, कंडाली जैसे पेड़ पौधों से तैयार किए जा रहे उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री के लिए उद्योग विभाग कई कंपनियों से वार्ता कर रहा है. हाल ही में अमेजॉन से विभाग ने 20 उत्पादों की बिक्री के लिए एमओयू साइन किया है.

महिलाएं तैयार कर रहीं भीमल की स्लीपर
भीमल की स्लीपर बनाने में कई महिलाएं जुटी हुई हैं. ऋषिकेश, यमकेश्वर, ढालवाला और चमोली में इनका उत्पादन किया जा रहा है. भीमल के रेशे से स्लीपर तैयार की जाती हैं. राज्य में तो इनकी डिमांड है ही अब विदेशों से भी डिमांड पहुंचने लगी है, जिससे इनका उत्पादन कर रही महिलाएं खासी उत्साहित हैं.

हिमाद्रि कर रहा मार्केटिंग
उद्योग विभाग की विंग उत्तराखंड हैंडलूम एंड हैंडीक्राफ्ट डेवलेपमेंट काउंसिल (हिमाद्री) भीमल की स्लीपर्स की मार्केटिंग कर रही है. इसके अलावा हिमाद्री द्वारा तैयार और भी कई हैंडमेड प्रोडक्ट लोगों द्वारा पसंद किए जा रहे हैं. इनमें मंदिरों की वुडन कलाकृति, सेंटेड प्रोडक्ट, कॉपर की पूजा थालियों के गिफ्ट पैक शामिल हैं.

कॉपर की डिजाइनर थालियों पर काम
उद्योग विभाग के निदेशक सुधीर चंद्र नौटियाल बताते हैं कि कॉपर की थालियों में बाजार से वे कॉम्पिटीशन कर रहे हैं. बाजार में कॉपर की डिजाइनर थालियों की काफी डिमांड है और ये बाजार में मौजूद भी हैं. ऐसे में अब इनके डिजाइन पर विशेष फोकस किया जा रहा है. इसके अलावा कुमाऊं की ऐपण कला पर भी जोर दिया जा रहा है.

एक्सपोर्ट प्राइस 200 रुपए पर पेयर
भीमल के रेशों से तैयार स्लीपर्स का रिटेल प्राइस 300 रुपए रखा गया है, जबकि एक्सपोर्ट प्राइस 200 रुपए निर्धारित किया गया है. फ्रांस को इसी दर पर स्लीपर सप्लाई की गई हैं.

ग्रेटर नोएडा भी भेजे थे प्रोडक्ट्स
16, 17 व 18 जुलाई को ग्रेटर नोएडा में आयोजित बायर सेलर मीट में भी उत्तराखंड के इन प्रोडक्ट्स को डिस्प्ले किया गया. इसका परिणाम भी उत्साहित करने वाला है, वहां से लगातार इन प्रोडक्ट्स की डिमांड राज्य को मिल रही है. इनमें भीमल के रेशे से तैयार स्लीपर की डिमांड काफी है.

जानें, क्या है भीमल
भीमल एक प्लांट है जो उत्तराखंड में बहुतायात से पाया जाता है. इसका बॉटनिकल नेम ग्रेविया ऑप्टिवा है. तराई से 2000 मीटर की ऊंचाई तक ये प्लांट पाया जाता है, जिसकी लंबाई 9 से 12 मीटर तक होती है. इस प्लांट को वंडर ट्री भी कहा जाता है, इसका कोई हिस्सा बेकार नहीं जाता. पत्तियों से पशुओं को हाइली न्यूट्रिएंट फॉडर मिलता है. स्टेम से फाइबर मिलता है, लकड़ी जलाने के काम आती है. इससे निकलने वाले चिपचिपे पदार्थ से शैंपू बनाया जाता है.

नेचुरल फाइबर से तैयार प्रोडक्ट की डिमांड विदेशों से ज्यादा आ रही है. भीमल की स्लीपर भी ऐसा ही प्रोडक्ट है. फ्रांस से इनकी अच्छी-खासी डिमांड मिली है. कंडाली के शॉल और जैकेट्स भी काफी पसंद किए जा रहे हैं.
सुधीर चंद्र नौटियाल, निदेशक, उद्योग विभाग.