आईआईटी बीएचयू के छठवें कन्वोकेशन में 1256 डिग्रियां व 47 मेधावियों को दिये गये 91 गोल्ड मेडल

- पारंपरिक भारतीय परिधान में सजे इंजीनियर्स के चेहरों पर दिखा सफलता का चटख का रंग

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VARANASI

बीएचयू के स्वतंत्रता भवन ने शनिवार को सफलता के चटख रंग से दमकते चेहरों का स्वागत किया. मौका था आईआईटी बीएचयू के छठवें कन्वोकेशन का. कन्वोकेशन में जिसके भी गले में सफलता का मेडल दमका उसकी खुशियों ने उमंगों की एक अलग दुनिया का नजारा देखा. कन्वोकेशन में बतौर चीफ गेस्ट आरबीआई के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में पूर्व डायरेक्टर किरण कर्णिक व समाजसेवी सोमदेव त्यागी ने दीक्षांत भाषण दिया. क्ख्भ्म् छात्र-छात्राओं में मेडल व डिग्रियां बांटी गई. ब्7 मेधावी छात्र-छात्राओं को 9क् गोल्ड मेडल भी दिया गया. केमिकल इंजीनियरिंग की मृणाली मोदी और कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनिय¨रग के मनु अग्रवाल ने सर्वाधिक आठ-आठ मेडल हासिल किया.

भारतीय परिधान में रहे सजे

पिछले बार की तरह इस बार भी डिग्री और मेडल लेने के लिए सभी स्टूडेंट्स परंपरागत भारतीय परिधान में सजे दिखे. बॉयज जहां धोती कुर्ता या कुर्ता पायजामा पहने हुए थे तो ग‌र्ल्स साड़ी और सलवार कुर्ता में काफी फब रही थीं. आईआईटी बीएचयू के लोगो से सजा उत्तरीय सभी स्टूडेंट्स के परिधान को और भी खास बना रहा था. आईआईटी के रजिस्ट्रार डॉ. एसपी माथुर ने मेडल लेने के लिए स्टूडेंट्स को प्रस्तुत किया. डायरेक्टर प्रो. राजीव संगल ने सभी उपस्थित व अनुपस्थित स्टूडेंट्स को उनकी डिग्री प्रदान करने की संस्तुति प्रदान की.

निकला प्रोसेशन भी

इसके पहले कन्वोकेशन की परंपरा का निर्वाह करते हुए प्रोसेशन निकला. प्रोसेशन का नेतृत्व आईआईटी के रजिस्ट्रार प्रो. माथुर ने किया. इसमें सीनेट मेंबर्स, आईआईटी के डायरेक्टर प्रो. राजीव संगल और चीफ गेस्ट किरण कर्णिक व सोमदेव त्यागी शामिल थे. कन्वोकेशन का शुभारंभ महामना पं. मदन मोहन मालवीय जी की प्रतिमा पर पुष्पहार अर्पित करने से हुआ. डायरेक्टर प्रो संगल ने कन्वोकेशन के शुभारंभ की घोषणा की. उन्होंने संस्थान की एनुअल रिपोर्ट पढ़ी और स्टूडेंट्स को डिसिप्लीन का पाठ पढ़ाया. समारोह में डीन 'एकेडमिक' प्रो. एएसके सिन्हा, प्रो. पीके जैन, प्रो. एके त्रिपाठी, प्रो. एके मुखर्जी, डिप्टी चीफ प्रॉक्टर प्रो. प्रभाकर सिंह, प्रो. एके झा, प्रो. एस जीत, प्रो. पीके मिश्र, प्रो. बी मिश्रा आदि उपस्थित थे.

भाषण

बतौर इंजीनियर तार्किक रखें सोच

बतौर मुख्य वक्ता दीक्षांत भाषण में किरण कर्णिक ने कहा कि टेक्नोलॉजी में आगे बढ़ने के लिए इनोवेशन बहुत जरूरी है. एक इंजीनियर के तौर पर सोच हमेशा तार्किक होनी चाहिए. ख्क्वीं सदी में तकनीकी के साथ-साथ इनोवेशन को लेकर चलने से ही देश प्रगति के पथ पर अग्रसर होगा. हमें सांइस का प्रयोग ऐसे करना होगा जिससे की मानव जीवन बेहतर हो सके. आप इंजीनियर इसमें बड़ी भूमिका निभा सकते हैं. देश को आप से बहुत उम्मीदें हैं. आपकी कोशिशें भी भारत को एक वास्तविक विश्व शक्ति बना सकती हैं.

स्वयं की योग्यता विकसित करें

दूसरे मुख्य वक्ता प्रसिद्ध समाजसेवी सोमदेव त्यागी ने छात्रों को आगामी जीवन के बारे में दिशा दी. बताया कि एक शैक्षणिक संस्थान कार्यकुशलता और पद्धति की जानकारी दे सकता है लेकिन इसे लागू कहां करना है इसका निर्णय छात्रों को स्वयं करना होगा. उन्होंने छात्रों को अर्थपूर्ण जीवन जीने पर बल दिया. कहा कि दूसरों की अयोग्यता से प्रभावित न होना ही स्वयं की योग्यता है. सलाह दी कि सारी डिग्रियां व उपलब्धियां बेकार है जब आप अपने परिवार के साथ फुरसत नहीं निकाल पाएं. सुझाव दिया कि बच्चों को छह वर्ष की आयु से ही उचित व भरपूर शिक्षा दी जानी चाहिए.

बॉक्स

बोर्ड ऑफ गवर्नेस के चेयरमैन रहे गायब

आईआईटी बीएचयू के इतिहास में यह पहला मौका रहा कि बोर्ड ऑफ गवर्नेस के चेयरमैन के अनुपस्थिति में कन्वोकेशन का आयेाजन हुआ. बोर्ड के चेयरमैन बीएचयू के वीसी होते हैं. पर बीएचयू के वीसी प्रो गिरीश चंद्र त्रिपाठी छुट्टी पर चल रहे हैं. आईआईटी सूत्रों के अनुसार उन्हें कई बार निमंत्रित करने करने के लिए फोन और मैसेज भी किया गया पर उन्होंने जवाब देना गवारा नहीं समझा. इसे लेकर समारोह में खूब चर्चा होती रही.