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PATNA : हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट में कोई सिक्योरिटी नहीं है. सेंटर पर आप किसी भी गाड़ी में यह नंबर प्लेट लगवा सकते हैं. इसके लिए बस एक बार आपको किसी गाड़ी का पेपर दिखाकर रसीद लेना होगा इसके बाद तो उस रसीद के आधार पर किसी भी गाड़ी में नंबर लगवा लीजिए. पैसों की लालच में नंबर प्लेट लगाने के दौरान न तो गाड़ी का मॉडल चेक होगा और न ही इंजन व चेचिस नंबर की पड़ताल की जाएगी. हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट को लेकर किए जा रहे सुरक्षा के दावों की पोल दैनिक जागरण आई नेक्स्ट के स्टिंग ऑपरेशन में खुल गई है.

जमकर हो रही मनमानी

पटना में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट को पटना के सभी सेंटरों पर वाहनों की भीड़ लगी हुई है. दैनिक जागरण आई नेक्स्ट को सूचना मिली कि हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट बनाने वाले जमकर मनमानी कर रहे हैं. राजीव नगर थाना से थोड़ी ही दूर पर स्थित हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट बनाने के सेंटर की शिकायत मिली थी. शिकायतों की पड़ताल में जब दैनिक जागरण आई नेक्स्ट का रिपोर्टर मौके पर पहुंचा तो कई बड़े खुलासे हुए.

स्टिंग में सामने आई सच्चाई

रिपोर्टर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगवाने वाले एक वाहन स्वामी के साथ सेंटर पर पहुंचा. वाहन स्वामी ने पैसा जमा कर रसीद ले लिया. इस दौरान सेंटर के बाहर दो तीन लड़के गाडि़यों में दनादन नंबर प्लेट लगाने में व्यस्त थे. जब एक लड़के को रसीद दी गई तो वह कई नंबर प्लेट लेकर बाहर आया. एक एक कर वह गाड़ी पूछता गया और नंबर प्लेट लगाता गया. दो पहिया वाहनों से 20, चार पहिया वाहनों से 40 रुपए की वसूली भी की जा रही थी. जो लड़के प्लेट लगा रहे थे वह न तो गाड़ी का कागज देख रहे थे और न ही इंजन व चेचिस नंबर.

बड़ा झूठ: सेटेलाइट से कनेक्ट होता है हाई सिक्योरिटी प्लेट नंबर

रिपोर्टर - हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट से क्या सुरक्षा मिलेगी?

सेंटर कर्मी - यह पूरी तरह से सुरक्षित है, चोरों से लेकर हर किसी से सेफ है.

रिपोर्टर - क्या है इसमें खास कि यह इतना सुरक्षित है?

सेंटर कर्मी - यह एल्यूमिनियम की प्लेट पर बना होता है और सेटेलाइट से कैच करता है.

रिपोर्टर - अच्छा इसमें कोई चिप लगी है क्या?

सेंटर कर्मी - इसको सिम की तरह ही समझिए, जैसे मोबाइल को नेटवर्क मिलता है, ऐसे यह भी सेटेलाइट से पकड़ में आता है.

रिपोर्टर - आम नंबर प्लेट की अपेक्षा इसमें क्या अंतर है?

सेंटर कर्मी - सबसे बड़ा अंतर तो सेटेलाइट से पकड़ में आने का है उसके बाद इसमें एक नंबर होता है जिससे पूरी डिटेल मिल जाती है.

रिपोर्टर - लेकिन आप तो रसीद देखकर गाड़ी में नंबर प्लेट लगा दे रहें हैं, इंजन नंबर, चेचिस नंबर कौन कहे गाड़ी का मॉडल भी नहीं चेक कर रहे?

सेंटर कर्मी - जो वाहन स्वामी रसीद दिखा रहा है उसी की गाड़ी में ही लगाया जा रहा है.

रिपोर्टर - लेकिन रसीद किसी और गाड़ी का बनवाए और नंबर प्लेट चोरी की गाड़ी में लगवा दे तो?

सेंटर कर्मी - अब जब खुद आदमी गलत करेगा तो हम क्या कर सकते हैं?

रिपोर्टर - तब कहां से हाई सिक्योरिटी हुई?

सेंटर कर्मी - आपको ऐसा लगाता है, गाड़ी बुक करते समय ही हम लोग इंजन नंबर और चेचिस नंबर की पड़ताल कर लेते हैं.

रिपोर्टर - आप के वहां पैसा भी अधिक लिया जा रहा है और रसीद कम की दी जा रही है ऐसा क्यो?

सेटर कर्मी - ऐसा नहीं है, कहां पैसा अधिक लिया जा रहा है.

रिपोर्टर - निर्धारित दर से पैसा अधिक लिया जा रहा है, लगाने के नाम पर 20 से 40 रुपए, इसकी रसीद दीजिए?

सेंटर कर्मी - नियम कानून तो बहुत है, कहां तक इसपर आप जाइएगा.

रिपोर्टर - क्यों आपको जो रेट दिया गया है उसमें लगाने का पैसा नहीं मिलता क्या?

सेंटर कर्मी - उसमें पैसा मिलता है लेकिन और खर्चा कहां से चलेगा, यह कोई नहीं सोचता.

यह है सिक्योरिटी का सच

-नंबर प्लेट में कोई सिक्योरिटी सिस्टम नहीं है.

-प्लेट किसी भी सेटेलाइट से कनेक्ट नहीं होने वाला है.

-प्लेट में बस एक सिक्योरिटी नंबर होगा जो हर वाहन को एलॉट किया जाता है

-आगे की प्लेट पर कोडिंग नंबर अलग नंबर होता है और पीछे के लिए अलग.

-नंबर के आधार पर ही पूरी फीडिंग की जाती है.

-प्लेट की डिजाइन ऐसी होती है जिसे लेजर गन से पूरी जांच की जा सकती है.

-नंबर प्लेट को लेकर अगर कोई चिप व सेटेलाइट का दावा कर रहा है तो पूरी तरह गलत है.

पटना में 6 सेंटरों पर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाया जा रहा है. प्लेट में कोई चिप नहीं लगी है और न ही यह सेटेलाइट से ही कोई कनेक्ट करता है. सिक्योरिटी को लेकर नंबर है और इससे एक पल में वाहन से संबंधित हर जानकारी मिल जाएगी. मनमानी करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी.

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