- नए सिरे से आवंटित होंगे पूर्व मंत्रियों के कब्जे वाले बंगले

- शपथग्रहण के बाद इन बंगलों पर नेमप्लेट लगाने की होगी आपाधापी

- आधा दर्जन दिग्गजों को भी झेलना पड़ सकता है बंगले का संकट

PATNA : मंत्रियों को मिलने वाले बीस से अधिक बड़े बंगलों पर नए नेमप्लेट लगाने की तैयारी तेज है. जिनके मंत्री बनने की उम्मीद है, उनकी नजर अभी से बड़े बंगलों पर टिकी है. वैसे भवन निर्माण विभाग की ओर से कवायद शुरू करने में थोड़ी देर है.मंत्रियों को आवंटित होने वाले कई बंगलों का सच ये है कि इनमें से कई बंगले पूर्व मंत्रियों के कब्जे में थे. इन बंगलों में रह रहे मंत्रियों ने इस उम्मीद से बंगला नहीं छोड़ा था कि इस बार भी उनकी नैया पार उतर ही जाएगी. लेकिन अब जब कई हार चुके हैं तो अब यह तय है कि उन्हें बंगला छोड़ना पड़ेगा. इसमें पूर्व शिक्षा मंत्री वृशिण पटेल का अणे मार्ग के पीछे स्थित बंगला, हार्डिग रोड में पूर्व साइंस एंड टेक्नोलॉजी मंत्री अनिल कुमार का बंगला, पोलो रोड स्थित पूर्व अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री शाहिद अली खान, छज्जू बाग स्थित पूर्व उद्योग मंत्री गौतम सिंह, ललित भवन के समीप स्थित पूर्व उद्योग मंत्री रेणु कुशवाहा का बंगला, सरपेंटाइन रोड स्थित पूर्व परिवहन मंत्री अजीत कुमार, स्ट्रैंड रोड स्थित पूर्व ग्रामीण कार्य मंत्री डॉ. भीम सिंह, पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री नीतीश मिश्रा, पूर्व खान मंत्री सत्यदेव नारायण आर्य, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री रामधनी सिंह आदि के बंगले शामिल हैं. ये सभी चुनाव हारने वाले पूर्व मंत्रियों की श्रेणी में शामिल हैं.

पूर्व मंत्रियों के अतिरिक्त कई वर्तमान मंत्री को भी हार का मुंह देखना पड़ा है. इन्हें भी अपना बंगला खाली करना पड़ सकता है. इनमें श्रम संसाधन मंत्री दुलालचंद गोस्वामी, भवन निर्माण मंत्री दामोदर रावत, परिवहन मंत्री रमई राम, लघु जल संसाधन मंत्री मनोज कुशवाहा का नाम लिया जा सकता है. वैसे दो बार विधानसभा अध्यक्ष रहे उदय नारायण चौधरी भी चुनाव हार चुके हैं. पूर्व मंत्रियों में नरेंद्र सिंह के बंगले पर भी नजर है. वैसे वे विधान परिषद् के सदस्य हैं. जिस वक्त वह विधान पार्षद बने थे उस समय वह जदयू के कोटे में थे. हम में उनके जाने के बाद मामला अटक गया है.

हम में गए विधान पार्षदों की सदस्यता खत्म किए जाने का मामला अपना असर दिखाएगा ही. नरेंद्र सिंह सिंह सहित पूर्व मंत्री सम्राट चौधरी और डॉ. महाचंद्र सिंह को भी अपना बंगला खाली करना पड़ सकता है. इन्हें मंत्रियों वाले बंगले आवंटित हैं. पूर्व मंत्री अवधेश कुशवाहा को तो स्टिंग ऑपरेशन के बाद जदयू ने चुनाव ही नहीं लड़ाया. ऐसे में उन्हें भी बंगला खाली करना पड़ेगा. घोसी के विधायक रहे राहुल शर्मा और विधायक मंजीत सिंह के पास हार्डिग रोड में बड़ा आवास है. दोनों चुनाव हार गए हैं. इन दोनों को भी अपना बंगला खाली करना होगा.