PATNA: जहां एक ओर पूरा देश डिजिटलाइजेशन की ओर बढ़ रहा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी डिजिटल इंडिया की बात करते हैं. वहीं, दूसरी ओर बिहार सरकार के कदम डिजिटलाइजेशन की ओर कछुए की चाल से बढ़ रहा है. जबकि अन्य राज्य इस मामले बहुत तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. मध्य प्रदेश, दिल्ली और केरल सहित कई राज्य पूर्ण डिजिटलाइजेशन की ओर बढ़ रहे हैं. पोर्टल के माध्यम से मूलभूत सुविधा और सूचना आम जनता तक पहुंचा रहे हैं. जबकि बिहार में डिजिटलाइजेशन का काम बहुत धीमी गति से चल रहा है. सारे राज्यों की अपनी एक वेबसाइट है जहां सरकार तक जनता आसानी से पहुंच सकती है. अब वह जमाना गया जब लोगों को छोटे से काम के लिए भी सरकारी दफ्तरों में भटकना पड़ता था. लेकिन बिहार अब भी बाकी राज्यों की तरह उस मुकाम तक नहीं पहुंचा है. डिजिटलाइजेशन के दौर में बिहार में कई जनोपयोगी सुविधाएं हैं जिसके लिए आज भी लोगों को सरकारी दफ्तर के चक्कर लगाने पड़ते हैं.

जनता से सरकार कोसों दूर

मध्य प्रदेश, और केरल जैसे राज्यों की वेबसाइट पूरी तरह अपडेट हैं और लोगों के हित के लिए काम कर रही है. लोग सरकार तक अपने सुझाव और समस्याएं आसानी से पहुंचा रहे हैं और वेबसाइट पर ही नई योजनाएं, ऑनलाइन पेमेंट, शिक्षा संबंधी जानकारियां मौजूद है. इन राज्यों में सरकार खुद लोगों से बात करती है. मध्य प्रदेश में सीएम हेल्पलाइन नम्बर और ई फॉर्म जैसी सेवाएं मौजूद हैं जहां लोग फोन कर अपनी शिकायत या समस्या को दर्ज करा सकते हैं. पर बिहार सरकार की अपनी कोई वेबसाइट ही नहीं है.

पानी का बिल जमा करने में बहता है पसीना

आज सारे काम ऑनलाइन, घर बैठे हो जाता है और सारी सुविधाएं आसानी से मिल जाती है. पर बिना लाइन लगे बिहार में पानी का कनेक्शन और पानी का बिल नहीं भर सकते हैं. नए कनेक्शन के लिए भटकना ही पड़ेगा. वहीं, राजस्थान सरकार ने सब कुछ ऑनलाइन कर दिया है. बिहार सरकार की इस तरह की कोई वेबसाइट नहीं है.