-ये नीतीश कुमार ने ही कहा था, चंदन विष व्यापे नहीं, लिपटे रहत भुजंग.

- शराब पर पूर्ण रोक से लेकर क्वालिटी एजुकेशन बड़ी चनौती

- भूमि सुधार की सिफारिश लागू कर पाएंगे नीतीश कुमार ?

PATNA : किसी से पूछ लीजिए लोग यही कहेंगे कि नीतीश कुमार की सबसे बड़ी चनौती लालू के साथ मिलकर शासन करना है. वजह ये कि लालू की अपनी शासन शैली रही और नीतीश की अपनी शासन शैली. लालू प्रसाद दूध दुहने वाले यादव के पुत्र हैं तो नीतीश कुमार वैध के पुत्र. इसलिए दोनों की कार्यशैली अलग रही. चुनाव में भी ये खूब दिखा. लालू भालू से फुकवाने, उड़ती चिडि़या को हल्दी लगाने, नरभक्षी, मां का दूध पीया है तो आरक्षण हटा कर दिखाओ जैसे बयान देते रहे तो नीतीश कुमार ने कविता सुनाया- उड़ती हवा सा था वो, गुजरात सा था वो, काला धन लाने वाला था वो, कहां गया उसे ढूंढो. नीतीश कुमार ने रहीम की पंक्ति कही थी जो उनकी सबसे बड़ी चुनौती होगी

''जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करि सकत कुसंग.

चंदन विष व्यापे नहीं, लिपटे रहत भुजंग.

दवा खरीद होती हो तो हो जाता है घोटाला''

नीतीश कुमार की अन्य चुनौतियों की बात करें तो स्वास्थ्य में काफी काम किया जाना है. अस्पतालों में की जरूरी दवाएं लोगों को नहीं मिल रही. बिहार में कई दवा घोटाले नीतीश राज में ही हो चुके हैं इसलिए दवा खरीद और उसे सही तरीके से अस्पतालों तक पहुंचाना कि जरूरतमंदों को मिल पाए यह बड़ी चुनौती है. बड़े पैमाने पर डॉक्टरों, नर्सो व अन्य स्टाफ की बहाली जरूरी है. पीएमसीएच जैसे अस्पताल बढ़ती आबादी के हिसाब से छोटे पड़ने लगे हैं. जमीन पर मरीजों का इलाज करने की नौबत आ जाती है कई बार.

लॉ एंड आर्डर बिगड़ गया है

ये अभी भी सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण है. सिर्फ अनंत सिंह को जेल भेजने भर से ये पूरा नहीं होगा. पटना जैसे शहर में भी रेप जैसी घटनाएं हो रही हैं. थाना स्तर से लॉ एंड आर्डर को दुरूस्त करना होगा. लॉ एंड ऑर्डर गड़बड़ाया तो जनता का मनोबल टूट जाएगा जिसने इतना बड़ा मेंडेट नीतीश-लालू को दिया है. रेप, हत्या, फिरौती की घटनाएं इधर के दिनों में काफी बढ़ी हैं.

क्वालिटी शिक्षा का सपना पूरा नहीं

शिक्षा के क्षेत्र में नीतीश कुमार ने नियोजित शिक्षकों का मानदेय तो बढ़ा दिया पर अभी भी क्वालिटी की शिक्षा बच्चों को सरकारी स्कूलों में नसीब नहीं है. दूसरी तरफ प्राइवेट स्कूलों की मनमानी आसमान पर है. प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने की बड़ी चुनौती नीतीश सरकार पर है. जो टीईटी पास अभ्यर्थी हैं इनका पूरी तरह से समायोजन नहीं हो पाया है इसे भी किया जाना है. बड़े पैमाने पर फर्जी शिक्षक बहाल हो गए. कोर्ट के आदेश के बाद कई तो पकड़े गए या नौकरी छोड़ कर भागे. लेकिन अभी भी कई जमे हुए हैं . इनकी शिनाख्त जरूरी है. समान स्कूल शिक्षा लागू करने का आत्मबल सरकार दिखा पाती है कि नहीं इसका इंतजार है. इसका दबाव केन्द्र पर बनाने की चुनौती है.

पेयजल सब को नहीं

जेडीयू ने अपने ख्00भ् के घोषणा पत्र में ही यह कहा था कि पांच साल में पूरे बिहार को पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा. लेकिन ये आज तक पूरा नहीं हो पाया. आर्सेनिक की समस्या कई इलाकों में अलग है.

बिजली कई इलाकों तक अब भी नहीं

अभी भी कई इलाके ऐसे हैं बिहार में जहां बिजली पहुंची ही नहीं. सोचिए कैसे रहते हैं वहां के लोग. नीतीश कुमार ने कहा था कि बिजली सुधारेंगे. बिजली सुधरी भी. लेकिन पूरे बिहार को एक समान बिजली नसीब नहीं है.

भूमि सुधार की सिफारिश

नीतीश कुमार भूमि सुधार की सिफारिश लागू करने में लाचार थे. लेकिन अब जब उन्हें सामाजिक न्याय के पहरुआ माने जाने वाले लालू प्रसाद का साथ मिल गया है तो क्या वे बी बंधोपाध्याय की सिफारिश वाला भूमि सुधार लागू करेंगे ये बड़ी चुनौती है.

शराूब, गांव और महिलाएं

नीतीश कुमार पर ये इलजाम लगा कि उन्होंने शराब की दुकानें गांव-गांव तक खुलवा दीं. पटना के एक आयोजन में नीतीश कुमार को महिलाओं ने शराब के नुकसान सार्वजनिक रूप से गिनाए थे. बताया था कि शराब ने कैसे कइयों का घर उजाड़ दिया है. इसके बाद नीतीश कुमार न सार्वजनिक मंच से वादा किया कि इस बार सरकार में आए तो शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लगाएंगे. महिलाओं ने बंपर वोटिंग की . इसलिए इनकी भावना का सम्मान होना ही चाहिए. शराब पर पूर्ण प्रतिबंध कम चुनौतीपूर्ण नहीं होगा लालू-नीतीश सरकार के लिए.