क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ : रिम्स को व‌र्ल्ड क्लास हॉस्पिटल बनाने की बात हो रही है. लेकिन इलाज के लिए आने वाले मरीजों को छोटी-छोटी सुविधाएं भी मुश्किल से मिल पा रही हैं. अब देखिए न सेंट्रल पैथोलॉजी की बायोकेमिस्ट्री मशीन 15 दिनों से खराब पड़ी है. लेकिन इसे चालू कराने को लेकर प्रबंधन गंभीर नहीं है. अगर ऐसा होता तो मरीजों को मुफ्त में होने वाली जांच के लिए तीन से चार गुना पैसे नहीं चुकाने पड़ते. इसे लेकर सेंट्रल कलेक्शन सेंटर का संचालन करने वाली जील इंडिया ने कंप्लेन भी की. इसके बावजूद मशीन चालू कराने को लेकर प्रबंधन गंभीर नहीं है. ऐसे में रिम्स को एम्स बनाने का सपना तो सपना ही रह जाएगा.

50 परसेंट सैंपल की जांच नहीं

इलाज के लिए आने वाले मरीज टेस्ट कराने सेंट्रल कलेक्शन सेंटर आते हैं, जहां से सैंपल कलेक्ट करने के बाद सभी विभागों में सैंपल भेज दिया जाता है. लेकिन अभी जितने सैंपल कलेक्ट हो रहे हैं उसके आधे सैंपल की भी जांच नहीं हो पा रही है. इस वजह से मरीजों को रिपोर्ट नहीं मिल पा रही है. वहीं दोबारा सैंपल कलेक्ट करने से मरीजों को परेशानी हो रही है.

45 रुपए का टेस्ट, चुकाने पड़ रहे है 500

रिम्स में लिपिड प्रोफाइल टेस्ट के लिए 200 रुपए चुकाने होते हैं, इसी टेस्ट के लिए बाहर 500 रुपए लिया जा रहा है. वहीं एलएफटी का चार्ज रिम्स में 45 रुपए है तो प्राइवेट में 500 लग रहे हैं. इसके अलावा एसजीपीटी, एसजीओटी, अल्क्लाइन फास्फेट, कॉलेस्ट्राल, टोटल प्रोटीन, एल्बुमिन, एमाइलेज, टोटल बिलरुबिन जैसे जरूरी टेस्ट भी नहीं हो पा रहे हैं. इस वजह से मरीजों की जेब कट रही है. वहीं 20 रुपए की सीबीसी जांच के लिए प्राइवेट सेंटर में 400 रुपए चार्ज लिया जा रहा है.