बिहार की हार के लिए शीर्ष नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया
बिहार में भाजपा की करारी हार पर पार्टी में विरोधी सुर तेज हो गए हैं। चुनाव परिणाम के बाद शुरू हुई छिटपुट बयानबाजी के बीच दीपावली की पूर्व संध्या पर मंगलवार को पार्टी के चार बुजुर्ग नेता मैदान में उतर आए। लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, यशवंत सिन्हा और शांता कुमार ने एक स्वर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। चारों ने साझा बयान जारी कर उन्हें हार की जिम्मेदारी अपने ऊपर लेने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि बिहार के नतीजों से साफ है कि दिल्ली की हार से कोई सबक नहीं लिया गया।

समीक्षा वही लोग ना करें जो चुनाव के कर्ता धर्ता थे
भाजपा में मार्गदर्शक मंडल के सदस्य आडवाणी और जोशी ने यशवंत सिन्हा और शांता कुमार के साथ बैठक के बाद दिवाली के मौके पर भाजपा में बड़ा बम फोड़ दिया। चारों नेताओं ने  कहा कि अब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को  हार की सीधी जिम्मेदारी लेनी चाहिए और खुले दिल से इसके कारणों का विश्लेषण करना चाहिए। इन नेताओं ने साझा बयान में कहा कि बिहार में हार का मुख्य कारण पिछले एक साल में पार्टी को शक्तिहीन बनाना है। नेताओं ने हार की समीक्षा किए जाने की मांग करते हुए कहा कि पराजय के लिए सबको जिम्मेदार ठहराना दरअसल खुद को बचाना है। इस समीक्षा में यह भी बताया जाए कि किस तरह पार्टी कुछ मुट्ठी भर लोगों के हाथ में आ गई और कैसे पार्टी के साझा सहमति के चरित्र को नष्ट कर दिया गया। आखिर में उन्होंने यह भी कहा कि इसकी समीक्षा उन लोगों के हाथ में नहीं होनी चाहिए जो इस चुनाव में कर्ता-धर्ता थे और हार के लिए जिम्मेदार हैं।

वरिष्ठ नेताओं को कर दिया गया था किनारे
उल्लेखनीय है कि 70 साल से अधिक की आयु का होने के कारण जिन नेताओं को मोदी ने अपने मंत्रिमंडल में लेने से इन्कार कर दिया था उनमें लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, यशवंत सिन्हा और शांता कुमार भी थे। आडवाणी और जोशी दोनों भाजपा मार्गदर्शक मंडल के सदस्य हैं। वे इस बात से भी नाराज हैं कि जो कुछ हो रहा है वह मार्गदर्शन के हिसाब से नहीं हो रहा। मार्गदर्शन मंडल के अन्य सदस्यों में अटल बिहारी वाजपेयी, प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री राजनाथ सिंह हैं।

भाजपा ने किया मार्गदर्शन का स्वागत
भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की फटकार के बाद मंगलवार को देर शाम पार्टी ने बयान जारी करके कहा कि वह बुजुर्ग नेताओं से मिले सुझावों और मार्गदर्शन का स्वागत करती है। वाजपेयी और आडवाणी ने जीत और हार की सामूहिक जिम्मेदारी लेने की स्वस्थ परंपरा कायम की है। उल्लेखनीय है कि आडवाणी समेत चारों नेताओं के बयान से कुछ समय पहले दिन में भाजपा ने पार्टी नेताओं को बिहार की हार पर बयानबाजी करने से मना किया था। साथ ही ऐसा न करने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई। पार्टी का दिशा-निर्देश है कि बिहार चुनाव में हार पर सिर्फ प्रवक्ता बोलेगा।

पीएम मोदी में लोगों को लालू नजर आए
आडवाणी खेमे के इन नेताओं के तल्ख स्वरों के पहले ही पिछले दो दिनों में शत्रुघ्न सिन्हा और दो अन्य भाजपा सांसदों हुकुमदेव नारायण यादव और आरके सिंह के बाद मंगलवार को बेगुसराय से दो बार सांसद रहे भोला सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि वह लालू की गुगली में फंस गए। जनता प्रधानमंत्री से मिलने आई थी लेकिन उन्हें उनके अंदर लालू नजर आया। भोला सिंह ने कहा कि मोदी को लालू के बयानों का जवाब देने की क्या जरूरत थी? नजरअंदाज कर देना चाहिए था। उन्होंने कहा कि मुझे पार्टी की नाव डूबने का डर नहीं है। लेकिन जहां नाव डूबी वहां घुटने भर पानी था। उन्होंने कहा कि किसी की बेटी पर बोल रहे हैं किसी के बेटे पर। राज्य स्तर के नेता ऐसा बोल सकते हैं पर प्रधानमंत्री को ऐसा नहीं बोलना चाहिए।

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