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LUCKNOW : विवेक तिवारी हत्याकांड के आरोपी सिपाहियों के पक्ष में अपना विरोध जता रहे पुलिसकर्मी अब अपने मोर्चे को नया रंग दे रहे हैं। एक जुट हुए पुलिसकर्मी पहचान छिपाकर मैसेज दे रहे हैं कि वह प्रशांत के पक्ष में नहीं बल्कि वर्षों पुरानी पुलिस व्यवस्था के खिलाफ हैं और उसमें परिवर्तन की अपील कर रहे हैं। पुलिसकर्मियों ने 5 अक्टूबर को विरोध के बाद हुई कार्रवाई को देखते हुए विरोध का तरीका और रणनीति बदल डाली। पुलिसकर्मियों ने बुधवार को विरोध के दौरान कई नायाब तरीके ईजाद किये।

ग्रुप की डीपी में काला झंडा

पुलिस अधिकारियों की चेतावनी के बावजूद भी थानों के वाट्सएप ग्रुप पर काला झंडा लगाकर विरोध प्रदर्शन किया गया। ऐसा ही एक मामला हजरतगंज में सामने आया। हजरतगंज कोतवाली प्रभारी के अलावा इंस्पेक्टर, दारोगा और पुलिस कर्मियों का एक इंटरनल ग्रुप है। इस ग्रुप में कई पुलिसकर्मी एडमिन हैं। ग्रुप के डीपी में विरोध का प्रतीक काला झंडा लगाया गया। सभी ने मौन होकर इसका खुला समर्थन किया। अभी कुछ दिन पहले भी सिपाहियों ने आरोपी प्रशांत के समर्थन में विरोध दर्ज कराया था।
विवेक तिवारी हत्याकांड : थाने के वाट्सएप ग्रुप की डीपी पर फहराया काला झंडा
एलआईयू को लगाया गया
पुलिसकर्मियों की ओर से 5 अक्टूबर को हुए विरोध प्रदर्शन के बाद उन्होंने 10 और 21 अक्टूबर को विरोध का ऐलान किया था। आलाधिकारियों ने विरोध प्रदर्शन पर नजर रखने के लिए एलआईयू की टीम के साथ अन्य अफसरों को भी लगा रखा था। यही वजह रही कि बुधवार को विरोध के दौरान पुलिसकर्मी पहचान छिपाए रहे। वहीं अधिकारी सोशल मीडिया की सभी फोटो को कलेक्ट कर रिपोर्ट आलाधिकारियों को भेजेंगे।

कार्रवाई के बाद भी सबक नहीं
5 अक्टूबर को काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन करने के मामले में तीन इंस्पेक्टर समेत कुल 11 पुलिसकर्मियों पर गाज गिरी थी। इसके बाद भी हजरतगंज कोतवाली के इंटरनल वाट्सएप ग्रुप में विरोध का काला झंडा फहराया गया।

इस बार सर्तक थे पुलिस कर्मी

पिछली बार हुई कार्रवाई से बचने के लिए पुलिसकर्मी इस बार सर्तक नजर आये। उन्होंने काली पट्टी बांध कर अपना विरोध तो जताया और फोटो सोशल मीडिया पर वायरल भी की, लेकिन अपनी पहचान छिपाए रखे। किसी ने चेहरे पर हेलमेट लगा रखा था तो किसी ने नकाब लगा रखा था। कुछ फोटो में अपना चेहरा छिपाते नजर आए।

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