RANCHI: रांची के जिस एनजीओ पर सिमडेगा की तीन आदिवासी लड़कियों की ट्रैफिकिंग करने का आरोप है. उसी एनजीओ को रेड रेस्क्यू करने, ट्रेनिंग देने और उनके बचाव के लिए राशि का आवंटन कर दिया गया है. उक्त राशि उज्ज्वला प्रोजेक्ट(लड़कियों व महिलाओं के अनैतिक देह व्यापार से रोकथाम व बचाव से संबंधित योजना) के लिए दी गई है. यह पैसा मार्च महीने में ही ट्रांसफर किया गया है. जबकि उसे सीसीआई भी नहीं किया गया है. पैसे ट्रांसफर करने के मामले में तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है.

जांच में पाया गया है दोषी

जानकारी के मुताबिक, रांची के एक एनजीओ की भूमिका पुलिस जांच में गलत पाई गई है. इस एनजीओ एसवीडब्ल्यूएसटी (साउथ विहार वेलफेयर सोसायटी ऑफ ट्राइबल)के संचालक व सचिव के खिलाफ पीडि़ताओं ने नौकरी का झांसा देकर दुष्कर्म करने के प्रयास का आरोप लगाया था. जून 2012 में झारखंड ह्यूमन राइट्स मूवमेंट की ओर से हाइकोर्ट में रिट पीटीशन क्रिमिनल दायर किया गया था. दोनों ही आरोप जांच में सही पाए गए हैं.

आरोपी की अग्रिम जमानत रद्द

इस मामले में एसवीडब्ल्यूएसटी की सचिव अनिमा एक्का की ओर से दायर अग्रिम जमानत की अर्जी 13 फरवरी 2013 को रद की जा चुकी है. संचालक अजय कुमार तिवारी पर लड़की से दुष्कर्म के प्रयास का आरोप जांच में सही पाया गया है.

क्या है मामला

एसवीडब्ल्यूएसटी के संचालक अजय तिवारी और सचिव अनिमा बा एक्का के खिलाफ सिमडेगा की तीन लड़कियों ने नौकरी व पढ़ाने का झांसा देकर ट्रैफिकिंग करने का आरोप लगाया था. इंटर पास लड़की को ऑफिस में नौकरी देने की बात कही गई थी. लेकिन, रांची में उसे महादेव हांसदा के घर पर झाडू-पोछा और बर्तन धोने का काम दिया गया था. पीडि़ता का कहना है कि अजय तिवारी ने दो बार उसके साथ दुष्कर्म करने का प्रयास भी किया था. वहीं, दूसरी लड़की को 2000 रुपए की नौकरी व सेंट जेवियर्स स्कूल में एडमिशन करवाने का झांसा दिया गया. लेकिन उसे भी घरेलू नौकरानी के तौर पर रखा गया. वहीं, तीसरी लड़की को को नौकरी का झांसा देकर दिल्ली के वसुंधरा स्थित जेपी दास के घर में घरेलू कामकाज के लिए भेजा गया था. मामले में पुलिस ने जांच की थी. झारखंड ह्यूमन राइट्स मूवमेंट ने मामले में कोर्ट से हस्तक्षेप करने की अपील की थी.

हाइकोर्ट ने दिया था जांच का आदेश

इस मामले में हाइकोर्ट ने अगस्त 2012 में सिमडेगा के एसपी को एफआइआर दर्ज करने और जांच करवाने का आदेश दिया था. साथ ही, यह निर्देश भी दिया था कि डीजीपी की निगरानी में मामले को निपटाया जाए. मामले की जांच ठेठइटांगर पुलिस ने की, जिसकी चार्जशीट सिमडेगा सत्र न्यायालय को सौंप दी थी.

कोट

इस एनजीओ की जांच कराई जाएगी. जांच में यदि मामला सही पाया गया तो तत्कालीन अधिकारियों के बारे में भी सरकार को लिखा जाएगा.

-दिव्यांशु झा, डीडीसी, रांची