-पांच फीसदी बूथों पर नहीं है बीएलओ की नियुक्ति

-क्राइसिस में उपलब्ध कराई गई आशाओं की सूची

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ALLAHABAD: अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे जिला प्रशासन के पास बीएलओ की क्राइसिस एक बड़ी समस्या बन चुकी है. जिले के लगभग पांच फीसदी बूथ ऐसे हैं जहां बीएलओ मौजूद नहीं हैं. कर्मचारी उपलब्ध नहीं हो पाने से जिला प्रशासन को स्वास्थ्य विभाग की आशा बहुओं की तैनाती इस पद पर करनी पड़ रही है. बता दें कि एक सितंबर मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान शुरू होने जा रहा है.

लेखपाल नहीं बनना चाहते बीएलओ

सोर्सेज के मुताबिक कागजों पर प्रत्येक बूथ पर बीएलओ को तैनात दिखाया जा रहा है जबकि हकीकत इससे अलग है. पांच फीसदी बूथों पर पूर्व में तैनात बीएलओ अब वहां नहीं हैं. इनमें से कुछ कर्मचारियों का स्थानांतरण हो चुका है तो कुछ रिटायर हो चुके हैं. वहीं लेखपालों ने बीएलओ कार्य करने से पहले ही इंकार कर दिया. हाईकोर्ट के दखल के बाद जिला प्रशासन शिक्षकों को बीएलओ तैनात करने में होशियारी बरत रहा है. ऐसे में खाली बूथों पर बीएलओ की नियुक्ति टेढ़ी खीर बनता जा रहा है.

स्वास्थ्य विभाग पर लटकी तलवार

मरता क्या न करता की तर्ज पर जिला प्रशासन को बीएलओ के काम के लिए आशा बहुओं की तैनाती करनी पड़ रही है. इससे स्वास्थ्य विभाग को दिक्कत होना तय है. आशा बहुएं टीकाकरण, कुपोषण, नसबंदी समेत तमाम स्वास्थ्य योजनाओं में की रोल निभाती हैं. अगर यह चुनाव में व्यस्त हो गई तो स्वास्थ्य विभाग परेशान हो जाएगा. फिलहाल आशा बहुओं की सूची तहसीलों को सौंप दी गई है.

यह करते हैं बीएलओ

-एक सितंबर से 31 अक्टूबर तक चलने वाले मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान में बीएलओ का अहम रोल होगा.

-घर-घर जाकर बीएलओ सर्वे करेंगे और देखेंगे कि सूची में मौजूद मतदाता वास्तव में हैं या नहीं.

-एक जनवरी 2019 के आधार पर 18 से 21 साल के मतदाताओं को सूची में शामिल करने में उनकी अहम भूमिका होगी.

-मतदाता जागरुकता विशेष तिथ्यिों में बीएलओ बूथ पर मौजूद रहकर लोगों की मदद करेंगे.

-जनता से फार्म छह कलेक्ट कर उसे प्रशासन तक पहुंचाना बीएलओ का कार्य है.

अच्छे नहीं हैं शहर के बूथों के हालात

जिले में कुल बूथों की संख्या 4938 हैं और विधानसभाओं की संख्या 12 है. जबकि ग्रामीण एरिया की तरह शहर के बूथों पर भी बीएलओ बड़ी संख्या में मौजूद नही हैं. आंकड़ों पर जाएं तो शहर उत्तरी में सर्वाधिक 70 से 80, शहर पश्चिमी में 35 से 40 और शहर दक्षिणी विधानसभा में 20 से 25 बूथ अभी रिक्त पड़े हैं. अभियान के दौरान यहां की जनता को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.

जो पोलिंग बूथ रिक्त पड़े हैं वहां बीएलओ की तैनाती कराई जा चुकी है. आशा बहुओं की मदद भी ली जा रही है. मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान के दौरान कोई भी बूथ बिना बीएलओ नहीं होगा.

-केके बाजपेई, एडीओ