पिछले वर्षो में लगे कुंभ के दौरान हुई घटनाओं से सबक लेते हुए इस बार सतर्क है मेला प्रशासन

इस बार कुंभ मेला में आने वाले श्रद्धालुओं की सकुशल वापसी का बनाया गया है प्लान

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ALLAHABAD: संगम की रेत पर इस बार लगने जा रहे कुंभ मेला में आने वाले श्रद्धालुओं को स्नान के लिए घाट की तलाश में भटकना नहीं पड़ेगा. श्रद्धालुओं के आने की अनुमानित संख्या को देखते हुए पिछले वर्षो की तुलना में दो गुना अधिक घाट बनाए जाएंगे. पंद्रह किलोमीटर एरिया में बसाए जाने वाले कुंभ मेला में 50-50 मीटर की दूरी पर स्नान घाटों के निर्माण का टारगेट है. यह घाट अरैल से लेकर फाफामऊ और छत नाग तक बनाए जाएंगे. प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने कुंभ में पंद्रह करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान लगाया है. इन्हें गंतव्य तक सकुशल वापस पहुंचाने के लिए मेला प्रशासन ने जुलाई महीने में ही रणनीति बना ली है.

बारिश बाद शुरू होंगे कार्य

पांच वर्ष पहले कुंभ मेला में मौनी अमावस्या शाही स्नान के दौरान संगम नोज पर भगदड़ मची थी. इसमें दो श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी. इसी रात वापस लौट रहे श्रद्धालुओं के साथ जंक्शन पर बड़ा हादसा हो गया था. इन्हीं पिछली घटनाओं से सबक लेते हुए मेला प्रशासन ने इस बार आपदा प्रबंधन पर ज्यादा फोकस किया है. कुंभ मेलाधिकारी विजय किरण आनंद की मानें तो इस बार आने वाले श्रद्धालुओं की अनुमानित भीड़ को देखते हुए प्रबंधन की मुकम्मल व्यवस्था की जा रही है. मेला एरिया में श्रद्धालुओं के लिए बनाए जाने वाले घाटों का निर्माण कार्य बारिश के बाद शुरू होगा. सितम्बर तक बाढ़ की आशंका को देखते हुए सिर्फ घाट के लिए जमीन या स्थल चिन्हित किए जाएंगे.

फैक्ट फाइल

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मीटर की दूरी पर कुंभ में बनाए जाएंगे स्नान घाट

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गुना अधिक (पिछले कुंभ से) इस बार स्नान घाट बनाने की है तैयारी

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स्नान घाट संगम नोज से नागवासुकि मंदिर तक बनाए गए थे पिछले वर्षो के माघ व कुंभ मेला में

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करोड़ श्रद्धालुओं के इस बार कुंभ मेला में आने का प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने लगाया है अनुमान

पंद्रह किमी की दूरी में हर कदम पर घाट बनाए जाएंगे. बारिश के बाद इस पर काम शुरू होगा. तीस से अधिक घाट बनाए जाए जाने का लक्ष्य रखा गया है. श्रद्धालुओं को सुरक्षित वापस उनके उनके गंतव्य तक पहुंचाने के भी मुकम्मल इंतजाम किए जाएंगे.

विजय किरण आनंद, कुंभ मेलाधिकारी